महान फनकार मोहम्मद रफी को अंग्रेजी नहीं आती थी. कहा तो यहां तक जाता है कि मशहूरियत के आगाज के दिनों में वे मुस्कुराकर ऑटोग्राफ की फरमाइश ठुकरा देते थे, क्योंकि उन्हें अंग्रेजी में खूबसूरत-सा हस्ताक्षर करना नहीं आता था. लेकिन ताजिंदगी जो भाषा उनके हाथों और जुबान से फिसलती रही, उसी अंग्रेजी में रफी साहब ने दो मुख्तलिफ गीत गाए, जिन पर जमाने की नजर कम ही पड़ती है. संगीतकार जोड़ी शंकर-जयकिशन ने इन गीतों को तैयार किया था और दोनों ही गीतों की धुन अपने और रफी के पुराने हिट हिंदी गीतों से ली थी.

बात सन् 1968 की है जब शंकर-जयकिशन एक ऐसे गैर-फिल्मी म्यूजिक एलबम पर काम रहे थे जिसके सारे गाने अंग्रेजी में थे. रफी ने भले ही अपने पूरे फिल्म करियर में हिंदी के अलावा 14 भारतीय और कुछ विदेशी भाषाओं में तकरीबन पांच हजार गीत गाए हैं, लेकिन उस वक्त इस एल्बम के दो गीतों को गाने के लिए वे तैयार ही नहीं हो रहे थे. ऐसे में इन गीतों के लेखक हरिन्द्रनाथ चटोपाध्याय ने – जोकि एक्टर होने के साथ-साथ अंग्रेजी भाषा के जाने-माने कवि भी थे – न सिर्फ उनकी हौसला-अफजाई की, बल्कि अंग्रेजी शब्दों का उच्चारण सही रखने की जिम्मेदारी भी ली. इन अंग्रेजी गीतों में पहला गीत ‘द शी आई लव’ है जो ‘गुमनाम’ (1965) फिल्म के महामशहूर ‘हम काले हैं तो क्या हुआ’ के संगीत पर नए लिरिक्स चढ़ाता है. दूसरा गीत यही काम कालजयी गीत ‘बहारो फूल बरसाओ’ (1966) के साथ करता है और इसमें रफी साहब का अंग्रेजी शब्दों का उच्चारण एकदम सटीक नहीं है. लेकिन ‘ऑल्दो वी हेल फ्रॉम डिफरेंट लैंड्स...द वर्ल्ड इज वन’ नामक यह 49 साल पुराना गीत आश्चर्यजनक रूप से हमारे मौजूदा समय का सटीक मूल्यांकन करता है.

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यह बड़ी ही विचित्र, साथ ही परेशान करने वाली बात है कि आज से तकरीबन आधी सदी पहले जो दुनिया की चिंताएं थीं, वे आज भी जस की तस बनी हुई हैं. हरिन्द्रनाथ चटोपाध्याय तब भी - जॉन लेनन की तरह - युद्ध और उन्माद के बीच दुनिया के एक होने की बात कर रहे थे, और आज भी सीरिया से लेकर बांग्लादेशी और रोहिंग्या शरणार्थियों के प्रति प्रभावशाली मुल्कों द्वारा बरती जा रही असंवेदनशीलता ऐसे गानों को फिर से मौजू बना रही है. इसीलिए शायद रफी का यह गीत पिछले कुछ वक्त से इंटरनेट पर इधर-उधर फिर से नजर भी आने लगा है. किसी सजग वैश्विक नागरिक ने इस दुर्लभ गीत के ऊपर शरणार्थियों की पीड़ा बयां करने वाली और युद्ध की विभीषिका दिखाने वाली तस्वीरें चस्पा की हैं और आज व गुजरे हुए कल को मिलाकर एक ऐसा प्रार्थना गीत तैयार कर दिया है, जिसकी अहमियत हम जल्द समझें तो बेहतर.

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