केंद्र की नरेंद्र माेदी सरकार सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया के निजीकरण की तैयारी में है. लेकिन वह संभवत: किसी विवाद में नहीं पड़ना चाहती है. इसीलिए उसने निजीकरण की प्रक्रिया से जुड़े बिक्री और कानूनी पहलुओं पर सलाह-मशविरे के लिए निजी कंपनियों से मदद मांगी है. और बिजनेस स्टैंडर्ड की ख़बर के मुताबिक इन दोनों कामों के लिए सात-सात (कुल 14) कंपनियों ने सरकार को सलाह देने में रुचि दिखाई है.

सूत्रों के मुताबिक सरकार के निवेश एवं सार्वजनिक पूंजी प्रबंधन विभाग (डीआईपीएएम) ने निजी फर्मों से सलाह-सेवा के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेंस्ट (ईओआई) आमंत्रित किए थे. इसके तहत लेन-देन सलाहकार के तौर पर केपीएमजी, ईवाई, रॉसचाइल्ड एंड कंपनी, बीएनपी पारिबास, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज़, एडेल्विस फाइनेंशियल सर्विसेस और ग्रांट थॉर्नटन ने सरकार के साथ काम करने में रुचि दिखाई है. जबकि कानूनी सलाहकार के रूप में ट्राई लीगल,एएलएमटी लीगल, लूथरा एंड लूथरा, क्रॉफोर्ड बायले एंड कंपनी, शार्दूल अमरचंद मंगलदास, सिरिल अमरचंद मंगलदास व हैमुराबी एंड सोलोमन पार्टनर्स काम करना चाहते हैं.

इस सिलसिले में ईओआई दाख़िल करने की आख़िरी तारीख़ 23 अक्टूबर थी और 27 अक्टूबर को ये कंपनियां डीआईपीएएम के अफसरों के सामने अपना-अपना प्रजेंटेशन देने वाली हैं. बताया जाता है कि इन कंपनियों को सलाह-शुल्क के तौर पर भी सरकार मोटी रकम देने को तैयार है. एक उच्च अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर इसकी पुष्टि भी करते हैं. वे कहते हैं, ‘जिन कंपनियों को भी सलाहकार नियुक्त किया जाएगा उनकी फीस अधिक हो सकती है. लेकिन इस सौदे में उनकी सेवाएं सरकार के लिए काफी मायने रखती हैं. क्योंकि इस सौदे पर पूरी दुनिया की निगाह लगी होगी. इस सौदे से हमें वैश्विक पहचान मिलने वाली है.’

ग़ौरतलब है कि एयर इंडिया के विमानों के बेड़े में इस वक़्त 142 विमान हैं. इसके अलावा देश और विदेश में हजारों करोड़ रुपए की संपत्ति का मालिकाना हक़ भी उसके पास है. इसके अलावा पांच कंपनियां एयर इंडिया की सहायक के तौर पर और एक साझीदारी में भी चलती है. सरकार इन सभी को सौदे में शामिल करना चाहती है. हालांकि अब तक एयर इंडिया को ख़रीदने में सिर्फ इंडिगो एयरलाइंस ने ही रुचि दिखाई है.