लगता है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान को सरकारी डंडे के जोर पर लागू किया जा रहा है. इसकी एक मिसाल आंध्र प्रदेश के खम्मम जिले से सामने आई है. द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक स्थानीय प्रशासन ने खम्मम के नेलाकोंडपल्ली मंडल के राजेश्वरपुरम गांव में कई घरों का बिजली-पानी बंद कर दिया है. क्योंकि इन घरों में अब तक शौचालय की सुविधा नहीं है.

सूत्रों के मुताबिक सरकार ने स्वच्छ ग्रामीण मिशन के तहत पूरे जिले को ‘खुले में शौच से मुक्ति’ यानी ओडीएफ दर्ज़ा दिलाने के लिए 2,500 शौचालय बनाने की स्वीकृति दी थी. हर परिवार के लिए 12-12 हजार रुपए की राशि भी स्वीकृत की. साथ ही काम पूरा करने के लिए 14 नवंबर तक की समय सीमा तय की गई. लेकिन इस समय सीमा के नज़दीक आ जाने के बावज़ूद अब तक कई गांवों में लोगों ने शौचालय नहीं बनवाए हैं. इसलिए अब लक्ष्य पूरा करने के लिए उन पर सरकारी मशीनरी दबाव बना रही है.

ख़बर के मुताबिक स्थानीय शासन ने राजेश्वरपुरम के 32 घराें के लिए पानी और बिजली की आपूर्ति बंद कर दी है. इसी तरह कोमतलागुडम, बोप्परम के कई घरों के लिए पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई है. जबकि तिम्मेनेनिपालेम गांव के लोगों को इसी तरह की कार्रवाई के लिए नोटिस जारी किया गया है. सिर्फ यही नहीं ग्रामीणों को उनकी पेंशन और सरकारी के तरफ से मिलने वाली अन्य सुविधाएं रोकने की भी धमकी दी जा रही है. पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी टी प्रभाकर राव इस कार्रवाई की पुष्टि करते हैं.

राव के मुताबिक, ‘लोगों को तीन विकल्प दिए गए थे. पहला- वे खुद शौचालय बनवा लें और सरकार खर्च का भुगतान करे. दूसरा- लोग सिर्फ नींव और सैप्टिक टैंक आदि का काम करा लें और बाकी निर्माण सरकार करा दे. तीसरा- सरकार सामग्री की आपूर्ति कर दे और लोग निर्माण खुद करा लें. इस सिलसिले में जागरूकता अभियान भी चलाया गया. लेकिन इसके बाद भी कई लोग शौचालय निर्माण नहीं करा रहे हैं. इसलिए सख़्ती बरतनी पड़ रही है.’