सतर्कता समिति से हरी झंडी न मिलने के बाद भी राकेश अस्थाना सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर बनाए गए | सोमवार, 23 अक्टूबर 2017

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने गुजरात कैडर के आईपीएस राकेश अस्थाना को सीबीआई में स्पेशल डायरेक्टर नियुक्त कर दिया है. इसका मतलब ये है कि सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा के रिटायर होते ही एजेंसी की कमान अब अस्थाना के हाथ में हो सकती है. वह भी इस तथ्य के बावज़ूद कि शनिवार को ही केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की एक समिति ने इस पद पर अस्थाना की पदोन्नति का प्रस्ताव ख़ारिज़ किया था. सीबीआई में अस्थाना के पास इस वक़्त अगस्तावेस्टलैंड हैलीकॉप्टर रिश्वत कांड और दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार के अफसरों के भ्रष्टाचार सहित अन्य कई महत्वपूर्ण जांचों की ज़िम्मेदारी है. उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नज़दीकी माना जाता है.

द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक केंद्र की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने रविवार को 1984 बैच के अफसर अस्थाना की नियुक्ति को हरी झंडी दी. उनके साथ इसी बैच के सात अन्य आईपीएस अफसरों को भी दूसरी केंद्रीय एजेंसियों में स्पेशल डायरेक्टर या विशेष महानिदेशक बनाया गया है. मसलन- केंद्रीय आरक्षित पुलिस बल (सीआरपीएफ) में एडीजी (अतिरिक्त महानिदेशक) दीपक कुमार मिश्र को स्पेशल डीजी बना दिया गया है. सीआरपीएफ में ही एक अन्य एडीजी सुदीप लखटकिया को भी स्पेशल डीजी बनाया गया है.

जम्मू-कश्मीर : टेरर फंडिंग मामले में एनआईए ने आतंकी सैयद सलाहुद्दीन के बेटे को गिरफ्तार किया | मंगलवार, 24 अक्टूबर 2017

राष्ट्रीय जांच एजंसी (एनआईए) ने टेरर फंडिंग के एक मामले में एक और गिरफ्तारी की. द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार 2011 के टेरर फंडिग मामले की जांच के दौरान एनआईए को आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन के सरगना सैयद सलाहुद्दीन के बेटे सैयद शाहिद युसुफ का नाम पता चला था. जांच एजेंसी ने पूछताछ करने के बाद मंगलवार को उसे गिरफ्तार कर लिया.

रिपोर्ट के मुताबिक एनआईए ने सैयद शाहिद युसुफ पर हिजबुल मुजाहिद्दीन के सदस्य आजाद अहमद भट उर्फ एजाज मकबूल भट से वर्षों तक पैसे लेने का आरोप लगाया है. सैयद शाहिद युसुफ कृषि विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएट हैं और 2013 से जम्मू-कश्मीर के कृषि विभाग में नौकरी कर रहे हैं. जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तान स्थित समूहों ने 2011 में बड़े पैमाने पर आतंकियों तक आर्थिक मदद पहुंचाई थी. इस मामले की जांच कर रही एनआईए ने सैयद शाहिद युसुफ सहित अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया है.

जेएनयू के कुलपति पर दलित और पिछड़े वर्ग के अध्यापकों से भेदभाव के आरोप लगे | बुधवार, 25 अक्टूबर 2017

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के कुलपति एम जगदीश कुमार पर जाति के आधार भेदभाव करने के आरोप लगाए गए हैं. आरोप लगाने वाले ख़ुद जेएनयू के अध्यापक हैं जो अनुसूचित जाति और जनजाति (एससी-एसटी) से ताल्लुक रखते हैं. टेलीग्राफ़ की ख़बर के मुताबिक़ क़रीब 50 अध्यापकों ने इस शिकायत के साथ कुलपति को एक ज्ञापन सौंपा है.

अध्यापकों ने बताया कि विश्वविद्यालय से संबंधित फ़ैसले लेने वाली सबसे ऊंची कार्यकारी परिषद ने उनसे भेदभाव किया. जगदीश कुमार इस परिषद के प्रमुख हैं. ज्ञापन में अध्यापकों की ओर से कहा गया है कि वे विश्वविद्यालय के एससी-एसटी अध्यापकों और अन्य सदस्यों से होने वाले खुले भेदभाव से काफ़ी दुखी हैं. ज्ञापन में लिखा है, ‘आपके (जगदीश कुमार) माननीय कार्यालय के साथ-साथ आपके नेतृत्व वाले प्रशासन द्वारा भी खुला भेदभाव किया गया है.’

इन अध्यापकों का आरोप है कि हाल में विश्वविद्यालय ने एक एससी-एसटी अध्यापक का प्रोफेसर के पद पर प्रमोशन इसलिए नहीं किया कि उसने किसी पीएचडी स्कॉलर को गाइड नहीं किया था. उनके मुताबिक ऐसा कोई नियम नहीं है जो किसी का इस कारण से प्रमोशन रोकता हो. अध्यापकों का यह भी आरोप है कि अनुसूचित जाति के एक अध्यापक को सबसे वरिष्ठ होने के बावजूद नैनो साइंसेज़ विभाग का अध्यक्ष नहीं बनाया गया.

गुजरात चुनाव में शरद यादव वाला जेडीयू कांग्रेस से गठबंधन कर चुनाव लड़ेगा | गुरुवार, 26 अक्टूबर 2017

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) में शरद यादव के नेतृत्व वाला धड़ा गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ेगा. एनडीटीवी की ख़बर के मुताबिक़ गुरुवार को शरद यादव ने इसकी घोषणा की. उन्होंने बताया कि इस बारे में उन्होंने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से बात की है. शरद यादव के मुताबिक गठबंधन इस तरह बनाया जाना चाहिए कि उसमें बंटवारा कम से कम हो. शरद यादव ने कहा, ‘हमने कांग्रेस से गठबंधन करने के बारे में पहले ही कहा था. (विपक्ष के) लोग एकजुट रहें, इसके लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं.’

विपक्षी पार्टियां भाजपा का मुक़ाबला कैसे करेंगी, इस पर शरद यादव ने कहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा अपने लिए केवल 31 प्रतिशत वोट हासिल कर पाई थी और विपक्ष को 69 प्रतिशत वोट मिले थे. वहीं, शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी को साथ लेने पर शरद यादव ने कहा कि गुजरात चुनाव में कांग्रेस विपक्ष का नेतृत्व कर रही है इसलिए यह फ़ैसला उसे करना है कि एनसीपी को शामिल किया जाए या नहीं. उन्होंने कहा, ‘हमने राहुलजी से बात की है कि बिखराव कम से कम होना चाहिए.’

वरिष्ठ पत्रकार और एडिटर्स गिल्ड के सदस्य विनोद वर्मा को छत्तीसगढ़ पुलिस ने गिरफ्तार किया | शुक्रवार, 27 अक्टूबर 2017

छत्तीसगढ़ पुलिस ने वरिष्ठ पत्रकार विनोद वर्मा को गिरफ्तार कर लिया. हिंदुस्तान टाइम्सके मुताबिक वर्मा को शुक्रवार तड़के करीब 3.30 पर उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया गया. पुलिस सूत्रों के मुताबिक वर्मा पर आरोप है कि वे छत्तीसगढ़ के एक मंत्री को उनकी सेक्स सीडी के आधार पर ब्लैकमेल कर रहे थे. कहा जा रहा है कि वर्मा ने मंत्री के एक सहयोगी को इसी हफ़्ते फोन किया था और उनसे पैसों की मांग की थी. इस सिलसिले में रायपुर के पंडरी पुलिस थाने में उनके ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज़ कराई गई है. इसी के आधार पर छत्तीसगढ़ पुलिस ने दिल्ली की एक दुकान पर छापा मारा और वहां से कथित सीडी के करीब 1000 प्रिंट ज़ब्त किए.

सूत्रों के मुताबिक दुकानदार से पूछताछ के आधार पर गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित वर्मा के घर पर छापा मारा गया. यहां से विनोद वर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया. गाजियाबाद पुलिस के सूत्रों ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया है कि वर्मा के पास से मंत्री की सीडी के कई प्रिंट बरामद किए गए हैं. उनके लैपटॉप और पेन ड्राइव को भी कब्ज़े में ले लिया गया है. विनोद वर्मा बीबीसी के पूर्व पत्रकार हैं. अमर उजाला के डिजिटल सेक्शन के संपादक भी रह चुके हैं. वर्तमान में वे एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के सदस्य हैं और स्वतंत्र पत्रकार की हैसियत से सक्रिय हैं.

गर्भपात कराने के लिए महिला के पति की मंज़ूरी ज़रूरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट | शनिवार, 28 अक्टूबर 2017

महिला को गर्भपात कराने के लिए पति की मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं है. शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में पंजाब-हरियाणा कोर्ट के फ़ैसले को बरक़रार रखते हुए यह बात कही. डेक्कन क्रॉनिकल की ख़बर के मुताबिक़ मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने कहा कि पति अपनी पत्नी पर अनचाहे गर्भधारण के लिए दबाव नहीं बना सकता. सीजेआई दीपक मिश्रा ने कहा कि क़ानून के मुताबिक़ गर्भपात के लिए केवल महिला की सहमति ही पर्याप्त है.

साल 1994 में सीमा और अनिल की शादी हुई थी. 1995 में उन्हें एक बेटा हुआ. लेकिन आपसी झगड़ों की वजह से दोनों पति-पत्नी अलग हो गए. 1999 से सीमा अपने बेटे के साथ उनके माता-पिता के यहां रह रही हैं. अलग होने के बाद सीमा ने अनिल से होने वाले दूसरे बच्चों को जन्म नहीं देने का फ़ैसला किया और गर्भपात करा लिया. अनिल ने इसके बदले सीमा, उनके माता-पिता व भाई और गर्भपात करने वाले डॉक्टरों के ख़िलाफ़ 30 लाख रुपये की भरपाई का केस ठोक दिया. लेकिन साल 2011 में पंजाब-हरियाणा कोर्ट ने अपील ख़ारिज करते हुए कहा, ‘एक महिला कोई मशीन नहीं है जिसमें कच्चा माल डाल दिया जाए और एक पूरा उत्पाद बाहर आ जाए.’ कोर्ट ने कहा कि गर्भधारण के लिए महिला का मानसिक रूप से तैयार होना ज़रूरी है.’