गुजरात के एक अस्पताल में बीते तीन दिनों में 18 नवजात बच्चों की मौत के मामले में रविवार को गुजरात सरकार ने जांच के आदेश दे दिए हैं. बच्चों की मौतों को लेकर विपक्ष की ओर से सरकार के ख़िलाफ़ विरोध हो रहे थे और मुख्यमंत्री विजय रूपाणी और स्वास्थ्य मंत्री शंकर चौधरी के इस्तीफ़े की मांग की जा रही थी जिसके बाद रविवार को एक जांच समिति की घोषणा की गई. उधर, अस्पताल का कहना है कि अस्पताल में औसतन 5-6 नवजात हर रोज़ मरते हैं, इसलिए नौ मौतें होना ‘बस थोड़ा ज़्यादा हैं’. उसके मुताबिक मारे गए बच्चों में से कई बच्चे (नौ) निजी अस्पतालों से रेफ़र किए जाने के बाद वहां ला गए थे.

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक़ इस मामले में अस्पताल के निरीक्षक डॉ एमएम प्रभाकर ने शनिवार शाम तक बच्चों की मौत की घटना से ज़ोरदार तरीक़े से इनकार कर दिया था. लेकिन बाद में उन्होंने इस बात को माना. वहीं, पत्रकारों से बात करते हुए विजय रूपाणी ने कहा कि जांच में अगर अस्पताल की तरफ़ से लापरवाही पाई गई तो समिति ज़रूरी क़दम उठाएगी. उन्होंने कहा, ‘मेरी जानकारी के मुताबिक़ कोई भी बच्चा दवाई, इलाज या सुविधा की कमी से नहीं मरा.’

दिलचस्प बात यह है कि भाजपा के प्रवक्ता भरत पांड्या ने ही अस्पताल के एक अधिकारी के बयान को मीडिया से साझा कर दिया था. इसके बाद डॉ प्रभाकर ने भी वही बयान जारी किया था. इसमें कहा गया था कि नौ बच्चों को लूनावाड़ा, सुरेंद्रनगर, मंसा, विरमगाम और हिम्मतनगर जैसी जगहों से रेफ़र किए जाने के बाद अस्पताल लाया गया था. यह भी बताया गया कि वज़न केवल एक किलो के आसपास होने और जन्म के समय होने वाली अन्य गंभीर परेशानियों के चलते बच्चों की हालत पहले से नाज़ुक थी. वहीं, अस्पताल में पैदा हुए चार बच्चों की मौत जन्म के समय दम घुटने जैसी घातक जटिलताओं के चलते हुई.