केरल के लव जिहाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट की राय से उलट लड़की की रजामंदी को सबसे प्रमुख बताया है. समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार सोमवार को शीर्ष अदालत ने कहा कि इस मामले में लड़की सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति है. अदालत ने मुस्लिम लड़के से शादी करने वाली हिंदू लड़की हादिया (धर्म परिवर्तन के बाद का नाम) के पिता और केरल पुलिस को 27 नवंबर को अगली सुनवाई पर उसे अदालत में पेश करने का आदेश दिया है. इस मामले में मुस्लिम युवक शफीन जहां पर हिंदू लड़की हादिया को फुसलाकर शादी करने और जबरन उसका धर्म परिवर्तन कराने का आरोप है.

इससे पहले हादिया के पिता केएम आशोकन की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए केरल हाई कोर्ट ने आपसी रजामंदी से शादी करने और धर्म परिवर्तन के लिए कोई दवाब न होने की हादिया की गवाही को नहीं माना था. इसके साथ हाई कोर्ट ने दोनों की शादी को रद्द घोषित कर दिया था. वहीं, अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दी थी. शीर्ष अदालत ने एनआईए को इसके आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) से कथित जुड़ाव की पड़ताल करने का भी आदेश दिया था.

हालांकि, मुस्लिम युवक शफीन जहां ने इस मामले की जांच एनआईए से कराने का आदेश वापस लेने की मांग के साथ सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई थी. इस पर सुनवाई करते हुए अक्टूबर में शीर्ष अदालत ने कहा था कि वह हाई कोर्ट द्वारा संविधान के अनुच्छेद-226 के तहत शादी को रद्द करने के अधिकार की समीक्षा करेगा. इस बीच सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर केरल सरकार ने कहा है कि राज्य पुलिस की जांच में ऐसा कुछ नहीं मिला है, जिससे इसकी जांच एनआईए से कराए जाने की जरूरत है. वहीं, इसी महीने एक अन्य मामले की सुनवाई करते हुए केरल हाई कोर्ट भी कह चुका है कि राज्य में सभी अंतरधार्मिक विवाह को लव जिहाद से जोड़ना हैरान करने वाला है.