सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार की उस याचिका पर रोक लगा दी जिसमें उसने कल्याणकारी योजनाओं में आधार कार्ड की अनिवार्यता को लेकर सवाल उठाया था. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक़ कोर्ट ने ममता सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि उसका यह क़दम संघीय ढांचे के ख़िलाफ़ है. बीते 28 अक्टूबर को राज्य सरकार ने कई सरकारी योजनाओं को आधार से जोड़ने के केंद्र के आदेश को चुनौती दी थी. इस पर जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच ने कहा है, ‘एक संघीय राष्ट्र में कैसे कोई राज्य सरकार संसद द्वारा पारित क़ानून को चुनौती दे सकती है. इसमें कोई संदेह नहीं कि इसकी (आधार) जांच की ज़रूरत है लेकिन इस याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता.’

बंगाल सरकार की तरफ़ से पेश होने वाले वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि यह याचिका श्रम विभाग की ओर से दायर की गई थी क्योंकि विभाग द्वारा कई योजनाओं के तहत आर्थिक सहायता दी जाती है. कोर्ट ने याचिका को संघीय ढांचे के खिलाफ बताते हुए यह भी टिप्पणी की कि इस सुनवाई के बाद राज्य भविष्य में केंद्र द्वारा बनाए और कानूनों को भी चुनौती दे सकता है. कोर्ट ने राज्य सरकार के वकील से कहा, ‘आप हमें इस बात को लेकर संतुष्ट करें कि राज्य ने इसे (आधार) कैसे चुनौती दी.’ कोर्ट के मुताबिक़ केंद्र के क़दम को एक व्यक्ति द्वारा चुनौती दी जा सकती है लेकिन राज्यों द्वारा नहीं. कोर्ट ने कहा, ‘ममता बनर्जी आएं और व्यक्तिगत रूप से याचिका दायर करें. हम उस पर विचार करेंगे.’ कोर्ट की तरफ़ से याचिका में संशोधन किए जाने की बात पर सिब्बल ने कहा कि वे याचिका में संशोधन करेंगे.

वहीं, एक दूसरी सुनवाई में कोर्ट ने मोबाइल फ़ोनों को आधार से लिंक करने के आदेश को लेकर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है और चार हफ़्तों के अंदर जवाब मांगा है. उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार दोपहर तक कोर्ट को बता सकती है कि वह कई योजनाओं, मोबाइल और बैंक अकाउंट से आधार लिंक करने की अंतिम तिथि मार्च तक बढ़ाएगी या नहीं. एनडीटीवी के मुताबिक़ याचिकाकर्ता वकील राघव तन्खा ने दूरसंचार मंत्रालय के 16 अगस्त 2016 और 23 मार्च 2017 के नोटिफिकेशन को चुनौती दी है. इस नोटिफ़िकेशन में मंत्रालय ने पुराने मोबाइल नंबर के वेरिफिकेशन के और नया मोबाइल नंबर लेने के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य कर दिया है.