सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या की दोबारा जांच की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई को चार हफ्ते के लिए टाल दिया है. समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार इस मामले में अदालत को सलाह देने के लिए नियुक्त न्यायमित्र अमरेंद्र शरण ने अपना जवाब देने के लिए शीर्ष अदालत से सोमवार को अतिरिक्त समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया. अदालत ने न्यायमित्र से इस याचिका की कानूनी वैधता जांचने और इसके दोनों पक्षों को इसमें दखल देने के अपने अधिकार को स्पष्ट करने का भी निर्देश दिया है.

मुंबई के शोधकर्ता और अभिनव भारत के न्यासी डॉ पंकज फडनीस ने सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका लगाई है. उन्होंने महात्मा गांधी की हत्या में एक से ज्यादा लोगों के शामिल होने की आशंका के अलावा अन्य आधारों पर इसकी दोबारा जांच कराने का आदेश देने की मांग की है. उधर, महात्मा गांधी के प्रपोत्र तुषार गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका का विरोध किया है. उन्होंने सवाल उठाया है कि कई दशक बाद इस मामले को दोबारा खोलने की जरूरत क्या है?

छह अक्टूबर को इस पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने पहले तो लॉ ऑफ लिमिटेशन (किसी मामले को अदालत में उठाने की समय सीमा तय करने वाला कानून) के तहत इसे दोबारा खोलने की प्रासंगिकता पर सवाल उठाया. लेकिन बाद में वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र शरण को न्यायमित्र नियुक्त कर उन्हें यह बताने का निर्देश दे दिया था कि क्या इसमें दोबारा जांच का आदेश देने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं. 30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली में नाथू राम गोडसे ने महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी थी. इस मामले में नाथू राम गोडसे और नारायण आप्टे को फांसी दी गई थी. वहीं, विनायक दामोदर सावरकर सबूतों के अभाव में बरी हो गए थे.