क्या चीन ब्रह्मपुत्र का रुख मोड़ने की तैयारी में है? यह सवाल इस खबर के बाद उठ रहा है कि चीनी इंजीनियरों ने तिब्बत से इस नदी का पानी सूखे से जूझते शिनजियांग प्रांत में ले जाने के लिए करीब 1000 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाने की योजना सरकार को सौंप दी है. यह सुरंग वहां से शुरू होगी जहां से ब्रह्मपुत्र अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश करती है. ब्रह्मपुत्र को तिब्बत में यार्लुंग सांगपो कहा जाता है.

इस तरह की योजनाएं पहले भी बनाई गई हैं. लेकिन विशाल लागत, तकनीकी चुनौतियों और पर्यावरण को होने वाले संभावित नुकसान के चलते उन्हें आगे नहीं बढ़ाया गया. लेकिन कई विशेषज्ञों का मानना है कि दिन ब दिन उन्नत हो रही तकनीक की वजह से यह काम अब न उतना मुश्किल रह गया है और इसकी लागत भी पहले से कम हो सकती है.

यह भारत के लिए बुरी खबर है जो लंबे समय से ब्रह्मपुत्र पर इस तरह की परियोजनाओं का विरोध करता रहा है. माना जा रहा है कि अगर चीन इस तरह की परियोजना पर आगे बढ़ता है तो ब्रह्मपुत्र में बहुत कम पानी बचेगा जिससे पूर्वोत्तर के लिए काफी मुश्किलें पैदा हो सकती हैं.