मेघालय के 200 लोगों ने यूआईडीएआई (यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया) से आग्रह किया है कि उन्हें ‘आधार’ से बाहर कर दिया जाए. आधार नंबर जारी करने के लिए उनसे संबंधित जो भी बायोमेट्रिक आदि जानकारियां यूआईडीएआई ने अपने पास सुरक्षित की हैं वे सब उसके डाटाबेस से हटा दी जाएं.

द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक एमपीसीए (मेघालय पीपुल्स कमेटी ऑन आधार) ने इसी सोमवार को राजधानी शिलॉन्ग से यह अभियान शुरू किया है. इसमें अब 200 लोग जुड़ चुके हैं. यह संख्या और बढ़ने की संभावना है. इन्होंने यूआईडीएआई को लेिखे पत्र में कहा है कि जब उनसे संबंधित जानकारियां हटा दी जाएं तो उन्हें बाकायदा इसकी सूचना भी दी जाए. इन लोगों ने लिखा है, ‘हम नहीं चाहते कि हमारी निजी जानकारियां आपके (यूआईडीएआई) या किसी अन्य तीसरे-चौथे पक्ष द्वारा इस्तेमाल की जाएं या उन्हें साझा किया जाए.’

ख़बर के मुताबिक एमपीसीए के इस अभियान में केएसयू (खासी स्टूडेंट़स यूनियन) भी शामिल है जिसका इस इलाके में अच्छा प्रभाव है. यह संगठन शुरू से ही आधार का विरोध करता रहा है. इसकी दलील है कि इससे अवैध प्रवासियों को भी भारत की नागरिकता पर दावा करने का अधिकार मिल जाएगा. इससे राज्य की स्थानीय जनजातीय आबादी के हित प्रभावित होंगे. केएसयू के अलावा कुछ अन्य संगठन भी इस अभियान में शामिल हैं. इनकी मुख्य चिंता आधार के जरिए निजता के उल्लंघन और लोगों पर निगरानी के मसलों को लेकर है.

इस अभियान में शामिल एक सदस्य तरुण भरतिया कहते हैं, ‘जब आधार के लिए नामांकन किया गया तब किसी से यह नहीं पूछा गया कि वे अपनी निजी जानकारियों के इस्तेमाल पर सहमत हैं या नहीं. आज यही हर किसी की सबसे बड़ी चिंता है. इसीलिए अब जबकि हमने यूआईडीएआई को पत्र लिखकर आधार डाटा बेस से अपना नाम हटवाने का आग्रह किया है तो हम देखना चाहते हैं कि उनकी प्रतिक्रिया किस तरह की रहती है.’