नोटबंदी के बाद कैशलेस लेन-देन को बढ़ावा देने की कोशिशों से क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल के साथ बकाया रकम भी काफी बढ़ गई है. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के मुताबिक सितंबर 2016 से सितंबर 2017 के बीच के 12 महीनों में क्रेडिट कार्ड की बकाया रकम में 38.7 फीसदी का उछाल आया है. इस दौरान कुल बकाया रकम 59,900 करोड़ रुपये हो गई. पिछले साल इसी अवधि में यह रकम 43,200 करोड़ रुपये थी. हालांकि, बीते दो साल में क्रेडिट कार्ड की बकाया रकम में लगभग 77.74 फीसदी का उछाल आया है. सितंबर 2015 में यह रकम 33,700 करोड़ रुपये थी.

सामान्य तौर पर बैंक क्रेडिट कार्ड की बकाया रकम पर 3.49 फीसदी प्रति माह (41.88 फीसदी प्रति वर्ष) की दर से ब्याज लेते हैं. इसका मतलब है कि बैकों को क्रेडिट कार्ड की 59,900 करोड़ रुपये की बकाया रकम पर 2,090 करोड़ रुपये का ब्याज मिलेगा. इसके साथ बैंक कुल राशि पर 18 फीसदी वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) भी लेते हैं. एक बैंक अधिकारी के मुताबिक क्रेडिट कार्ड के मामले में बकाया रकम फंसने का जोखिम बहुत ज्यादा रहता है, इसलिए बकाया रकम पर ब्याज दर ऊंची रखी जाती है. इसके बावजूद पिछले साल नोटबंदी लागू होने के बाद बाद क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल बढ़ा है. एक सर्वेक्षण के मुताबिक शहरी इलाकों के लगभग 57 फीसदी क्रेडिट कार्डधारकों ने कहा कि वे एक साल पहले की तुलना में आज क्रेडिट कार्ड का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं. आरबीआई के मुताबिक देश में क्रेडिट कार्ड की संख्या अगस्त 2016 में 2.64 करोड़ थी जो अगस्त 2017 में 3.27 करोड़ हो गई.

भारत में क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल की वजहों में काफी विविधता है. सर्वे में शामिल 18-24 वर्ष के युवा क्रेडिट कार्डधारकों ने कहा कि उन्हें नगदी लेकर चलना पसंद नहीं, इसलिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं. वहीं. 45 वर्ष या उससे ज्यादा उम्र के क्रेडिक कार्डधारकों ने कहा कि क्रेडिट कार्ड से उन्हें रकम को बाद में चुकाने का मौका मिल जाता है, इसलिए वे इसका इस्तेमाल करते हैं.