छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रस्तावित प्रतिमा की ऊंचाई को बढ़ाने के महाराष्ट्र सरकार के प्रस्ताव को पर्यावरण मंजूरी मिल गई है. हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार महाराष्ट्र कोस्टल जोन मैनेजमेंट अथॉरिटी (एमसीजेडएमए) ने इसकी ऊंचाई 192 मीटर से बढ़ाकर 210 मीटर करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. मराठा शासक शिवाजी की यह प्रतिमा अरब सागर में 16 हेक्टेयर की एक चट्टान पर बनाई जानी है. इसका निर्माण पूरा होने के बाद यह दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा होगी. अभी चीन के स्प्रिंग टेंपल में 208 मीटर की बुद्ध की प्रतिमा दुनिया में सबसे ऊंची है.

शिवाजी की प्रस्तावित प्रतिमा को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) की मंजूरी पहले ही मिल चुकी है. एमसीजेडएमए के अध्यक्ष सतीश गवई ने कहा, ‘हमारी सबसे बड़ी चिंता थी कि क्या उन्हें डीजीसीए की मंजूरी मिलेगी जो उन्हें मिल चुकी है.’ उन्होंने आगे कहा, ‘जब उन्होंने (सरकार) अन्य विभागों से मिली मंजूरियों और दुनिया के अन्य प्रतिमाओं की तुलना हमारे सामने रखी तो हमने बताया कि शिवाजी महाराज की तलवार की नोक 210 मीटर की ऊंचाई पर होगी.’ उनके मुताबिक अभी केवल मौखिक मंजूरी दी गई है, लेकिन कुछ दिन में औपचारिक जवाब दे दिया जाएगा. वहीं, राज्य सरकार द्वारा इसके निर्माण के लिए गठित छत्रपति शिवाजी महाराज स्मारक समिति ने बताया कि इसे बनाने का काम जनवरी 2018 में शुरू होगा जिसके 2021 तक पूरा होने की उम्मीद है.

हालांकि, मछुआरों और पर्यावरण संरक्षकों ने इस परियोजना पर सवाल उठाए हैं. मछुआरों का कहना है कि इससे मछली पकड़ने के क्षेत्र और द्वीप पर असर पड़ेगा. वहीं, पर्यावरण संरक्षकों का कहना है कि इससे समुद्री जीवन प्रभावित होगा.

बजट 35 गुना बढ़ा

पिछले साल मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने वित्त विभाग को इस परियोजना के लिए 3,600 करोड़ रुपये देने का निर्देश दिया था. लेकिन हालिया आकलन में सामने आया है कि अब इसके निर्माण पर लगभग 4,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. मुंबई तट पर शिवाजी की प्रतिमा बनाने का पहला प्रस्ताव 12 साल पहले आया था, तब से 2016 तक इसकी लागत 35 गुना बढ़ चुकी है. 2004 में इसका बजट महज 100 करोड़ रुपये था.