हर साल नवंबर की शुरुआत होते ही ‘नो शेव नवंबर’ या ‘मोवेंबर’ शब्द देखने-सुनने-पढ़ने में आने लगते हैं. पहला हफ्ता बीतते-बीतते इस हैशटैग के साथ सोशल मीडिया पर तस्वीरें दिखाई देना शुरू हो जाती हैं. भले ही यहां पर बात शेविंग न करने की की जा रही हो लेकिन ऐसा नहीं है कि यह सिर्फ शेव न बनाने तक सीमित है. कटिंग, वैक्सिंग, थ्रेडिंग यानी शरीर के बालों को हटाने के लिए किया जाना वाला हर इंतजाम नवंबर में रोक दिया जाता है. ऐसा सिर्फ किसी एक शहर या देश में नहीं, बल्कि दुनियाभर में किया जाता है.

इस सबके बावजूद नो शेव नवंबर मना रहे बहुत से लोग जहां इसे मनाए जाने के कारणों से अंजान है वहीं कुछ आलसी लोगों के लिए यह कुछ दिन के लिए बालों और दाढ़ी की देखभाल से आराम पाने के मौका बस है. चलिए, इस बार सिर-पैर के सवाल में जानते हैं कि आखिर नवंबर में ऐसा क्या है जो हर साल इसी महीने में लोगों का ‘बाल’ प्रेम जाग उठता है. इसके साथ ही नो शेव नवंबर के साथ सुनाई देने शब्द ‘मोवेंबर’ का मतलब क्या है.

‘नो शेव नवंबर’ असल में कैंसर खासकर प्रोस्टेट कैंसर के प्रति जागरूकता के लिए शुरू किया गया अभियान है. इस अभियान का समर्थन करने वाले लोग नवंबर के महीने में दाढ़ी या बालों को कटवाना बंद कर देते हैं. बालों के रखरखाव में किए जाने वाले खर्च के बराबर राशि इस अभियान में दान दे दी जाती है. ‘नो शेव नवंबर’ अभियान की शुरूआत एक अमेरिकी गैर-लाभकारी संगठन ‘मैथ्यू हिल फाउंडेशन’ ने साल 2009 में की थी.

मैथ्यू हिल फाउंडेशन इन पैसों को उन संस्थाओं तक पहुंचाता है जो कैंसर से बचाव, इलाज या शोध और शिक्षा के लिए काम कर रही हैं. यहां पर इसकी शुरुआत की कहानी जान लेना भी जरूरी है. नवंबर 2007 में अमेरिका के शिकागो शहर में रहने वाले मैथ्यू हिल की कैंसर से लड़ते हुए मौत हो गई. इसके बाद उनके आठ बच्चों ने अपने पिता को सम्मान देने और उन्हीं की तरह कैंसर से लड़ रहे लोगों की मदद के लिए कुछ करने की सोची और नो शेव नवंबर कैंपेन की शुरुआत की. शुरुआत के दो साल बाद सोशल मीडिया के जरिए इसे दुनियाभर में पहुंचाने की कोशिश की गई. इसी का नतीजा अब यह है कि लोग वजह जानें या न जानें नो शेव नवंबर मनाते जरूर हैं.

अब बात करते हैं ‘मोवेंबर’ की. मोवेंबर दो शब्दों मुश्टैश (मूंछ) और नवंबर को मिलाकर बनाया गया शब्द है. ‘नो शेव नवंबर’ की ही तरह यह भी एक जागरूकता अभियान है. नो शेव नवंबर जहां सिर्फ कैंसर जागरूकता तक सीमित है वहीं मोवेंबर इसके साथ-साथ पुरुषों को उनके स्वास्थ्य और जीवनशैली के प्रति सचेत करने का काम करता है. 2004 में शुरू हुए इस अभियान में पुरुष नवंबर में मूंछें उगाकर इसे अपना समर्थन देते हैं.