नोटबंदी की वर्षगांठ के मौक़े पर सरकार ‘कालाधन-विरोधी दिवस’ मनाने की सोच रही है. लेकिन इससे दो दिन पहले ही पनामा पेपर्स की तरह ‘पैराडाइज़ पेपर्स’ नाम से लीक हुए 1.34 करोड़ वित्तीय दस्तावेज़ उसके लिए मुश्किल का सबब बन सकते हैं जिनमें उसके भी नेताओं के नाम शामिल हैं. इन दस्तावेज़ों को जर्मनी के अख़बार ज़्यूडडॉयचे त्साइटुंग ने हासिल किया है. पनामा पेपर्स की जांच भी इसी अख़बार के नेतृत्व में की गई थी. इंटरनेशनल कंसोर्शियम ऑफ़ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) के तहत कई न्यूज़ संस्थानों ने पैराडाइज़ पेपर्स पर काम किया. 96 ऐसे संस्थानों ने जांच करने के बाद इन्हें प्रकाशित किया है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़ इन दस्तावेज़ों में सैकड़ों भारतीयों के नाम शामिल हैं.

ये दस्तावेज़ दो फ़र्मों बरमुडा ऐपलबी और सिंगापुर एशियासिटी से संबंधित हैं. ये दोनों कंपनियां दुनिया की उन 19 कंपनियों में शामिल हैं जिनके ज़रिए दुनियाभर के अमीर और ताक़तवर लोग अपना पैसा छिपाते हैं. बीबीसी ने बताया कि इस पूरे हफ़्ते सैकड़ों लोगों और कंपनियों की टैक्स और वित्तीय जानकारियां साझा की जाएंगी. इन जानकारियों से पता चलेगा कि कैसे राजनेताओं, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, मशहूर हस्तियों और अन्य ताक़तवर लोगों ने अपने नकद पैसे और सौदों को छिपाया.

जिन न्यूज़ संस्थानों ने पैराडाइज़ पेपर्स की जांच की उनमें भारत का इंडियन एक्सप्रेस अख़बार भी शामिल है. अख़बार ने बताया कि कॉरपोरेट्स के अलावा जिन भारतीयों के नाम इन दस्तावेज़ों में हैं उनमें अभिनेता अमिताभ बच्चन भी शामिल हैं. पनामा पेपर्स में भी उनका नाम सामने आया था. ख़बर के मुताबिक़ 2004 से पहले अमिताभ बच्चन बरमूडा की एक कंपनी के शेयरधारक बने थे. उनके अलावा कॉरपोरेट लॉबीइस्ट नीरा राडिया और अभिनेता संजय दत की पत्नी मान्यता दत्त (पुराने नाम के साथ) का नाम भी इन दस्तावेजों में होने की खबर है. इनके अलावा इनके तार केंद्रीय उड्डयन मंत्री जयंत सिन्हा और भाजपा के राज्यसभा सदस्य आरके सिन्हा से भी जुड़ते हैं. बताया जा रहा है कि कुल 714 भारतीयों के नाम इन दस्तावेज़ों में शामिल हैं.

बरमूडा की ऐपलबी 119 साल पुरानी कंपनी है. ज़्यादातर भारतीयों के नाम इसी कंपनी से जुड़े हैं. कई देशों के वकील, अकाउंटेंट, बैंकर और दूसरे लोग कंपनी के नेटवर्क में शामिल हैं. ये लोग कंपनी के क्लांइटों के विदेशी खाते मैनेज करते हैं और उनके लिए कंपनियों के सेट अप का काम करते हैं. इसके अलावा टैक्स से बचने, अचल संपत्तियों को संभालने और विमान ख़रीदने जैसे कामों में भी ये लोग मदद करते हैं. ऐसे कई नामचीन भारतीय कंपनियां और व्यापारी ऐपलबी के क्लाइंट रहे हैं जिनके मामलों की जांच सीबीआई और प्रवर्दन निदेशालय (ईडी) जांच कर रहे हैं.

भारत के अलावा पैराडाइज पेपर्स में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अरबपति वाणिज्य सचिव विलबर रॉस का नाम भी सामने आया है. कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रू़डो के एक प्रमुख सहयोगी (जो उनके चीफ फंडरेज़र हैं) के ख़ुफ़िया लेनदेन की बात भी इन जरिये सामने आई है. इनसे ट्विटर और फ़ेसबुक में रूसी कंपनियों के निवेश का भी पता चला है. साथ ही इन दस्तावेजों से ब्रिटेन की महारानी क्वीन एलिज़ाबेथ-2 के निजी धन में से क़रीब एक करोड़ पाउंड विदेश में निवेश किए जाने के मामले का भी पता चला है.