तेलंगाना के 20 लाख किसानों को अगले एक हफ़्ते तक 24 घंटे मुफ़्त बिजली मिलेगी. राज्य सरकार ने किसानों को मुफ़्त बिजली देने की अपनी योजना के तहत यह एक हफ़्ते का ट्रायल सोमवार से शुरू कर दिया. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक़ अधिकारियों का कहना है कि यह अपनी तरह का पहला क़दम है. उन्होंने बताया कि राज्य के 23 लाख किसानों को इस क़दम से फ़ायदा मिलेगा.

तेलंगाना पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन (ट्रांस्को) के अध्यक्ष देवुलापल्ली प्रभाकर राव ने बताया, ‘हम कृषि क्षेत्र को अगले हफ़्ते के लिए 24 घंटे मुफ़्त बिजली देंगे. किसानों की मांग और उसके आकलन के आधार पर स्थिति की समीक्षा करेंगे.’ राव ने बताया कि मार्च 2018 से पूरे राज्य में बिजली की सप्लाई सुव्यवस्थित कर दी जाएगी. बिजली की आपूर्ति उन किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है जो खेतों की सिंचाई के लिए मोटरयुक्त पंपों का इस्तेमाल करते हैं. वर्तमान में बिजली वितरण कंपनियां कृषि क्षेत्र को सबसे व्यस्त समय में ज़्यादा से ज़्यादा 9500 मेगावाट बिजली दे सकती हैं. ट्रांस्को के अधिकारियों के आकलन के मुताबिक़ बढ़ती मांग की पूर्ति और मुफ़्त-बिजली परियोजना को लागू करने के लिए इस वक़्त 1500 से 2000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली और चाहिए. ट्रांस्को अध्यक्ष का कहना है, ‘हम अतिरिक्त मांग को पूरा करने के लिए तैयार हैं. लेकिन असल मांग कितनी है यह ट्रायल के बाद ही पता चलेगा.’

इस ट्रायल से पहले राज्य सरकार ने प्रायोगिक परियोजना के तहत करीमनगर, मेडक और नालगोंडा ज़िलों के साढ़े नौ लाख से भी ज़्यादा पंपों के लिए पांच महीनों तक लगातार मुफ़्त बिजली मुहैया कराई थी. मुख्यमंत्री कार्यालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि देश के कुछ ही राज्यों में किसानों को मुफ़्त बिजली देने से संबंधित परियोजनाएं लागू की गई थीं, लेकिन इसे सुनिश्चित करने वाला तेलंगाना पहला राज्य है. प्रवक्ता ने कहा, ‘नहर सिंचाई की कमी की वजह से तेलंगाना के अधिकतर किसान भूजल पर निर्भर हैं. उन्हें पहले कभी भी पर्याप्त बिजली नहीं मिली. तेलंगाना के अलग राज्य बनने के बाद मौजूदा सरकार ने किसानों को नौ घंटे बिजली देना सुनिश्चित किया.’ प्रवक्ता ने कहा कि सरकार ने पिछले तीन सालों में 12 हज़ार करोड़ रुपये ख़र्च करके बिजली के संचारण और वितरण के नेटवर्क को मज़बूत किया है. उन्होंने कहा कि अब वह (सरकार) किसानों को 24 घंटे मुफ़्त बिजली देने में सक्षम है.