पैराडाइज़ पेपर्स से दुनियाभर में सियासी भूचाल देखने को मिल रहा है. सोमवार को भारत सरकार ने मामले की जांच के आदेश दे दिए. मंगलवार को वित्त मंत्रालय की ओर से कहा गया कि पैराडाइज़ पेपर्स मामले की जांच की निगरानी के लिए ‘मल्टी एजेंसी ग्रुप’ को पुनर्गठित किया जाएगा और तेज़ कार्रवाई की जाएगी. यह ग्रुप पिछले साल इसी तर्ज पर लीक हुए पनामा पेपर्स की भी जांच कर रहा है.

पैराडाइज़ पेपर्स के नाम से लीक हुए 1.34 करोड़ वित्तीय दस्तावेज़ों में 714 भारतीयों के नाम शामिल हैं. इटरनेशनल कंसोर्शियम ऑफ़ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) के तहत कई मीडिया संस्थानों ने पैराडाइज़ पेपर्स पर काम किया है जिनमें भारत का इंडियन एक्सप्रेस अख़बार भी शामिल है.

पैराड़ाइज़ पेपर्स के ज़रिए सामने आए मामलों पर अख़बार से बात करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि यह अच्छा है क्योंकि इससे पता चलता है कि अब कुछ भी छिपा नहीं रह सकता. वित्त मंत्री ने कहा, ‘इसके (पैराडाइज़ पेपर्स) ज़रिए टैक्स छिपाने वाली कंपनियों की गोपनीयता और उनके ज़रिए होने वाले लेन-देन को ध्वस्त कर दिया गया है.’ अरुण जेटली ने कहा कि इस खुलासे से यह भी पता चलता है कि वे लोग ग़लतफ़हमी में हैं जो यह समझते हैं कि उनकी टैक्स चोरी का किसी को पता नहीं चलेगा.

वित्त मंत्री की इस बात से केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के अध्यक्ष सुशील चंद्रा ने भी सहमति जताई. सुशील चंद्रा पैराडाइज़ पेपर्स के प्रकाशन के बाद बनाए गए जांच दल का नेतृत्व करेंगे. इस जांच दल में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और वित्तीय खुफिया इकाई (एफआईयू) के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे. चंद्रा ने बताया कि आयकर विभाग को मामले पर कार्रवाई करने के आदेश दे दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि विभाग पैराडाइज़ पेपर्स के ज़रिए सामने आए भारतीयों के आयकर रिटर्न की छानबीन करेगा.

उधर, पैराडाइज़ पेपर्स के प्रकाशन के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने संज्ञान लेते हुए कम से कम दो मामलो में कार्रवाई शुरू कर दी है. इनमें से एक मामला ‘ज़िकित्ज़ा हेल्थ केयर लिमिटेड’ से जुड़ा है. कांग्रेस के सचिन पायलट और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम इसके निदेशक सदस्य रह चुके हैं. राजस्थान में हुए घोटाले को लेकर सीबीआई और ईडी पहले से ही इस कंपनी की जांच कर रही है. दूसरा मामला ‘डिएगो एंड यूएसएल’ कंपनी से संबंधित है. यह कंपनी कभी विजय माल्या के तहत रही थी. इन दोनों ही मामलों को लेकर ईडी का कहना है कि पैराडाइज़ पेपर्स के ज़रिए नए तथ्य सामने आए हैं जिनकी जांच की जाएगी.