भारतीय जनता पार्टी में तकरीबन साल भर पहले से यही चर्चा चल रही थी कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जा सकता है. लेकिन अंतिम दौर में यह बाजी प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के हाथ लगी. बीते हफ्ते अमित शाह द्वारा एक रैली में उनके नाम के ऐलान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र कुमार मोदी ने ट्वीट किया, ‘प्रेम कुमार धूमल के पास व्यापक प्रशासनिक अनुभव है और एक बार फिर वे बढ़िया मुख्यमंत्री बनेंगे.’

जेपी नड्डा को चेहरा बनाने को लेकर पार्टी के अंदर कुछ मजबूत तर्क दिए जा रहे थे. सबसे पहली बात यह कही जा रही थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें काफी पसंद करते हैं. भाजपा में आज की तारीख में स्थिति यह है कि ज्यादातर बड़े निर्णय प्रधानमंत्री और बहुत हो तो पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की पसंद के हिसाब से ही लिए जाते हैं.

जेपी नड्डा के पक्ष में धूमल की बढ़ती उम्र को भी माना जा रहा था. कहा जा रहा था कि नड्डा धूमल के मुकाबले कम उम्र के हैं और पार्टी उन्हें आगे करके मतदाताओं को एक नया विकल्प दे सकती है. उनके पक्ष में तीसरी बात यह थी कि प्रेम कुमार धूमल और उनके पुत्र और हमीरपुर के सांसद अनुराग ठाकुर का नाम कई विवादों में घसीटा जा चुका था.

तो फिर आखिर ऐसा क्या हुआ कि नड्डा पीछे रह गए और प्रदेश की राजनीति में उनके प्रतिद्वंदी प्रेम कुमार धूमल एक बार फिर से भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बन गए? भाजपा नेताओं से बात करने पर मोटे तौर पर इस निर्णय के पीछे तीन वजहें समझ में आती हैं.

सबसे पहली वजह यह बताई जा रही है कि कांग्रेस ने मौजूदा मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अगुवाई में ही चुनाव लड़ने का निर्णय लिया. पहले चर्चा चल रही थी कि कांग्रेस भी किसी नए चेहरे को इस चुनाव में आगे करेगी. लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद कांग्रेस ने अपने आजमाए हुए चेहरे वीरभद्र सिंह पर ही यकीन करना ठीक समझा. बताया जा रहा है कि ऐसे में भाजपा को भी अपनी जवाबी रणनीति में बदलाव करना पड़ा. पार्टी को लगा कि वीरभद्र सिंह का यह कार्यकाल उतना बुरा भी नहीं रहा है, जितना चुनाव अभियानों के दौरान वह दावा कर रही है. ऐसे में प्रदेश में आजमाए हुए चेहरे को ही आगे करने पर पार्टी के अंदर बातचीत शुरू हुई.

इस निर्णय के पीछे दूसरी वजह भी पहली वजह से ही जुड़ी हुई है. वीरभद्र सिंह ठाकुर हैं. प्रदेश में ठाकुर मतदाता सबसे प्रभावशाली हैं. जेपी नड्डा ब्राह्मण हैं. ऐसे में भाजपा के अंदर यह बात चलने लगी कि अगर नड्डा को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया गया तो प्रदेश के ठाकुर मतदाता पूरी तरह से कांग्रेस के साथ गोलबंद हो सकते हैं और ऐसे में भाजपा के लिए यह चुनाव निकालना मुश्किल हो सकता है. इस स्थिति में पार्टी में किसी ठाकुर नेता को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने पर बात शुरू हुई और यह स्वाभाविक ही था कि यह तलाश धूमल पर आकर पूरी होती.

पार्टी नेताओं में एक तीसरी वजह की चर्चा भी चल रही है. बताया जा रहा है कि तकरीबन चार महीने पहले केद्रीय मंत्री के तौर पर जेपी नड्डा के किसी काम से प्रधानमंत्री मोदी बहुत नाराज हो गए थे. अब इसकी व्याख्या यह कहकर की जा रही है कि उस घटना से नड्डा के प्रति मोदी का विश्वास पहले जैसा नहीं रहा और प्रेम कुमार धूमल को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने के पीछे यह भी एक बड़ी वजह रही. इसके पहले तक नड्डा की पहचान नरेंद्र मोदी के कुछ सबसे विश्वस्त नेताओं में से एक की रही थी.

अब यह तो चुनावी नतीजे ही बता पाएंगे कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा एक बार फिर से प्रेम कुमार धूमल पर दांव लगाने से पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में भाजपा की वापसी हो पाती है या नहीं