काले धन पर नियंत्रण और कर प्रणाली को सरल बनाने के उद्देश्य से लिए गए दो बड़े आर्थिक फैसले यानी नोटबंदी और जीएसटी बीते कुछ महीनों से लगातार चर्चा में हैं. अर्थव्यवस्था और राजनीति के जानकार जहां इन मामलों को लेकर सरकार की आलोचना-समालोचना करने में व्यस्त हैं, वहीं आम जनता का बड़ा हिस्सा इन फैसलों को समझने-जूझने (ध्यान दें बूझने नहीं, जूझने) यानी किसी तरह अपना काम निकालने की कोशिश में है. इसके साथ ही कुछ लोग इन मुद्दों पर सोशल मीडिया के जरिए अपनी राय रखने की कोशिश करते रहे हैं. लेकिन तार्किकता की कमी कह लें या दूसरी खामियां, ये बातें दूर तक नहीं सुनी जा सकीं.

ऐसे में कुछ स्टैंडअप कॉमेडियन्स अपने तरीके से इन कमियों को पाटने की कोशिश कर रहे हैं. वे अपनी प्रस्तुतियों में मोदी सरकार के कई फैसलों, नीतियों और खामियों की जमकर धुलाई कर रहे हैं. वे हंसी-हंसी में ही सही, मंच से बहुत सारी ऐसी बातें कह रहे हैं जो कई लोग जोर से और इस तरीके से कह देना चाहते हैं कि उन्हें सुनने के अलावा सरकार चलाने वालों के पास कोई और चारा न बचे. नोटबंदी, जीएसटी और जनता को नापसंद आने वाले सरकार के कई ऐसे फैसलों के बाद ये कॉमिक परफॉर्मेंसेंज विरोध का सबसे सटीक तरीका बन गईं. नोटबंदी की सालगिरह पर इन वीडियोज को देखकर यह समझा जा सकता है कि बीते एक साल में हम और अर्थव्यवस्था किन-किन मोड़ों से होकर गुजरे हैं.

स्टैंडअप कॉमेडियन अभिजीत गांगुली अपने इस वीडियो में न सिर्फ नरेंद्र मोदी का नाम लेकर उनके काम करने और करवाने के तरीके पर तंज करते हैं बल्कि इस बात के लिए भी उन्हें निशाना बनाते हैं कि उनकी आलोचना करने वालों पर किस-किस तरह के हमले किए जाते हैं. आम तौर पर रोजमर्रा की चीजों और लोगों की आदतों पर चुटकुले बनाने वाले अभिजीत उनमें भी राजनीति का तड़का तो लगा ही देते थे. लेकिन इस वीडियो में उन्होंने खुलकर प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार की आलोचना की है और इतने मजेदार ढंग से की है कि खुद उन्हें भी इस पर हंसी ही आएगी. नोटबंदी पर टिप्पणी करते हुए गांगुली कहते हैं मोदी जी ने उन्हें नोट बदलवाने का काम दिया और वे ऐसे काम देते रहते हैं. जिन बातों को कहने के लिए हमें एक मजबूत विपक्ष की दरकार होती है, वे बातें गांगुली अपने लगभग पांच मिनट की इस परफॉर्मेंस में बड़े दमदार और मजेदार तरीके से कह जाते हैं.

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लेखक, गीतकार और स्टैंडअप कॉमेडियन वरुण ग्रोवर ‘मसान’ फिल्म के बाद से ही सोशल मीडिया पर खासे लोकप्रिय हो चुके हैं. बीते साल ग्रोवर अलग-अलग मंचों से कई बार सरकार की गलतियों पर तंज करते दिखे. इनमें से न्यूज चैनल आज तक द्वारा आयोजित साहित्यिक सेमीनार साहित्य आज तक और लखनऊ लिटरेचर फेस्टिवल में दी गई उनकी प्रस्तुतियां सबसे ज्यादा चर्चा में रहीं. लखनऊ लिट-फेस्ट के इस वीडियो में उन्होंने नोटबंदी के हर दिन बदलते नियमों से शुरूआत कर मोदी सरकार का विरोध करने से जुड़े खतरों और ट्रंप समर्थक हिंदुओं तक पर अपने व्यंग्य बाण छोड़े हैं.

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यूट्यूब चैनल द वायरल फीवर की वेब सीरीज ह्यूमरसली योर्स से लोकप्रिय हुए विपुल गोयल अब नाम से ही पहचाने जाने वाले चुनिंदा कॉमेडियंस में शामिल हो चुके हैं. कॉमेडियन बनने का संघर्ष दिखाने वाली इस वेब सीरीज में वे अभिनेत्री रसिका दुग्गल से सटायर भरा रोमांस लड़ाते हुए दिखे थे. यह सीरीज उनके बढ़िया एक्टर होने का सबूत भी देती है लेकिन उससे पहले वे एक कॉमेडियन हैं. पिछले दिनों विपुल कॉमेडी में फैले सेक्सिज्म को लेकर कई कॉमेडियंस के साथ चर्चा करते नजर आए थे और इस वीडियो ने भी खूब चर्चाएं बटोरी थीं. फिलहाल इस वीडियो में विपुल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ अपने व्यंगात्मक अंदाज में कर रहे हैं. इसमें वे नोटबंदी, जीएसटी, स्वच्छता अभियान, गैस सब्सिडी से लेकर अमित शाह और केजरीवाल तक को निशाना बनाते हैं और कई जरूरी सवाल उठाते दिखते हैं. खास बात यह है कि सरकार को निशाना बनाने के साथ-साथ विपुल जरूरत से ज्यादा भोली जनता और राहुल गांधी पर भी उतना ही सधा हुआ कटाक्ष करते हैं.

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कुणाल कामरा सोशल मीडिया पर इतने लोकप्रिय कॉमेडियन हैं कि इनके खुद के यूट्यूब चैनल पर एक करोड़ से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं. कुणाल ने इस वीडियो में देशभक्ति की ‘नई परिभाषा’ तय करने वालों पर जमकर कटाक्ष किया है. वे अपनी इस परफॉर्मेंस में अपने आस-पास मौजूद उन लोगों को निशाना बनाते हैं जो हर तर्क का जवाब ‘सियाचिन में हमारे जवान लड़ रहे हैं और तुम...’ कहकर देते थे. नोटबंदी के दौरान यह जुमला खासा चर्चा में रहा था. इसके बाद मार्च में रिलीज हुआ यह वीडियो खूब वायरल हुआ था और फर्जी देशभक्तों और ट्रोल तक भी पहुंचा जिसका नतीजा यह हुआ कि कामरा को सोशल मीडिया पर जान से मारने की धमकियों तक का सामना करना पड़ा. इसके बाद भी वे लगातार सोशल मीडिया पर और अपनी स्टैंडअप परफॉर्मेंसेज में जो कहना था कहने से नहीं चूके. पिछले दिनों इंडिया टुडे द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने अपने अंदाज में कहा - ‘अगर मैं प्रधानमंत्री मोदी होता और मुझसे नोटबंदी पर कुछ बोलने के लिए कहा जाता, तो मैं सिर्फ सॉरी कहता.’ इस वीडियो को यूट्यूब पर तीन लाख से ज्यादा बार देखा गया है और इसे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी शेयर किया था.

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आमतौर पर अपने विवादित वीडियोज के लिए चर्चा में रहने वाले यूट्यूब चैनल एआईबी के इस वीडियो में मोदी और नोटबंदी के अंध समर्थकों पर जमकर तंज किया गया था. वीडियो दिखाता है कि कैसे सोशल मीडिया पर अंध समर्थकों की फ़ौज, जिसने पहले से ही उधम मचा रखा है, को नोटबंदी ने वास्तविक दुनिया में भी अपने कुतर्क पेश करने का मौका दे दिया था. इसके साथ ही बहस में कैसे नई तरह से परिभाषित देशभक्ति देखने को मिलती है और कैसे सैनिकों का जिक्र आते ही यह अपने चरम पर पहुंच जाती है और यह वह बिंदु होता है जहां पर हर बहस ख़त्म हो जाती है. हालांकि यह वीडियो स्टैंडअप कॉमेडी की कैटेगरी में नहीं आता लेकिन नोटबंदी की ए-टू-जेड कहानी समझने के लिए यह इकलौता वीडियो देखना काफी है. यह पूरी ईमानदारी से दिखाता है कि कैसे कैश की समस्या से जूझते आम आदमी की कुढ़न धीरे-धीरे अराजकता-असंवेदनशीलता में बदल सकती है.

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