बीते शनिवार को दक्षिण कोरियाई खुफिया एजेंसियों ने एक बार फिर खबर दी कि उत्तर कोरिया जल्द ही एक बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण करने वाला है. एजेंसियों के अनुसार उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षण स्थल पर हलचल बढ़ गई है. वहीं इस खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उत्तर कोरिया को और मौका नहीं दिया जा सकता और अब उसे बचाव के लिए दी गई समय सीमा समाप्त होती जा रही है.

हालांकि, इसके बाद जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया ने एक बार फिर आगे आकर उत्तर कोरिया से बैठकर बातचीत करने को कहा है. लेकिन, उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु हथियार और मिसाइल कार्यक्रम पर अमेरिका से बातचीत की संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया है. उसने कहा है, ‘अमेरिका के लिए यह बेहतर होगा कि वह हमारे साथ परमाणु निशस्त्रीकरण पर वार्ता करने का दिवास्वप्न छोड़ दे. दिन में सपने देखना बंद करो.’

इन सभी गतिविधियों के बीच दुनिया के कई जानकार अब मान चुके हैं कि उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच युद्ध लगभग निश्चित है. वर्तमान में बने इस माहौल में यह प्रश्न हर किसी के जहन में बार-बार उठता है कि युद्ध होने की स्थिति में उत्तर कोरिया किन देशों को नुकसान पहुंचा सकता है यानी उसकी मिसाइलों की पहुंच के दायरे में कौन-कौन से मुल्क आते हैं. अमेरिका, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलियाई खुफिया एजेंसियों की रिपोर्टों के आधार पर इन देशों की मीडिया ने इस बारे में काफी जानकारी दी है. आइये जानते हैं कि उत्तर कोरियाई मिसाइलें दुनिया के किन-किन कोनों तक पहुंच सकती हैं.

कम दूरी वाली बैलिस्टिक मिसाइलें

खुफिया एजेंसियों के मुताबिक उत्तर कोरिया के पास इस समय करीब एक हजार मिसाइलें हैं. इनमें सबसे बड़ा जखीरा कम दूरी वाली बैलिस्टिक मिसाइलों का है. इनकी खासियत यह है कि ये उसकी सबसे विश्वसनीय मिसाइलें हैं. वर्तमान में देश के शासक किम जोंग उन के शासन में इन मिसाइलों का 50 से ज्यादा बार परीक्षण किया गया है जिनमें से केवल एक ही परीक्षण विफल रहा है. दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय जांच एजेंसी के मुताबिक इन मिसाइलों में सबसे ज्यादा चर्चित मिसाइल ईआर-स्कड है, जो 1000 किमी तक मार कर सकती है. इस लिहाज से देखें तो इसकी रेंज में पूरा दक्षिण कोरिया और जापान का दूसरा सबसे बड़ा शहर ओसाका आ जाते हैं. इसके अलावा उत्तर कोरिया के सबसे बड़े मददगार चीन के भी दो बड़े शहर राजधानी बीजिंग और सबसे घनी आबादी वाला शहर शंघाई भी इसकी रेंज में आते हैं.

हालांकि, विशेषज्ञों की मानें तो दक्षिण कोरिया जैसे उत्तर कोरिया के सबसे करीब बसे देशों के लिए सबसे बड़ा खतरा कम दूरी श्रेणी की स्कड-सी एमएआरवी और स्कड-बी एमएआरवी मिसाइलें हैं. इनमें लगे एमएआरवी रॉकेट की खासियत यह होती है कि यह बेहद तीव्र गति से पूर्व निर्धारित लक्ष्य पर मार करता है और लक्ष्य निर्धारण के बाद भी अंतिम समय में इसके लक्ष्य को बदला जा सकता है. इस मिसाइल से निपटने के लिए ही दक्षिण कोरिया ने अपने सीमाई इलाके में अमेरिकी सेना का ‘टर्मिनल हाइ एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस’ यानी थाड मिसाइल सिस्टम लगाया है जो ऐसी मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने की क्षमता रखता है.

हरे रंग से दिखने वाला क्षेत्र उत्तर कोरिया है जबकि वृत्त की परिधि मिसाइल की रेंज को दर्शाती है
हरे रंग से दिखने वाला क्षेत्र उत्तर कोरिया है जबकि वृत्त की परिधि मिसाइल की रेंज को दर्शाती है

मध्यम दूरी वाली बैलिस्टिक मिसाइल

ऑस्ट्रेलियाई एजेंसियों के मुताबिक उत्तर कोरिया की मध्यम दूरी श्रेणी में सबसे चर्चित मिसाइल पुकगुकसांग-2 या केएन-15 है. यह 1200 किमी से लेकर अधिकतम 2000 किमी तक की दूरी तय कर सकती है. उत्तर कोरिया ने पिछले एक साल में इन मिसाइलों का नौ बार परीक्षण किया है जिसमें केवल दो परीक्षण ही असफल रहे. इस मिसाइल की रेंज के लिहाज से देखें तो इसकी जद में पूरा जापान, करीब-करीब आधा चीन, आधा मंगोलिया, पूर्वी रूस और ताइवान का पूरा हिस्सा आ जाता है.

पनडुब्बी से लांच होने वाली बैलिस्टिक मिसाइलें

उत्तर कोरिया ने पिछले साल दावा किया था कि उसने पनडुब्बी से मिसाइल लांच की तकनीक भी विकसित कर ली है. दक्षिण कोरियाई एजेंसियों की मानें तो उत्तर कोरिया की नेवी ने अब तक पनडुब्बी से छह मिसाइल टेस्ट किए हैं जिनमें से तीन सफल रहे हैं. ये भी बताया जाता है कि उसकी वर्तमान में पनडुब्बी-प्रक्षेपित मिसाइलों की अनुमानित सीमा 1200 किलोमीटर है. उत्तर कोरिया के पास आधुनिक सिन्पो क्लास पनडुब्बी है जो एक बार में 2800 किमी तक जाने में सक्षम है. अगर इतनी दूरी तय करने के बाद इस पनडुब्बी से मिसाइल छोड़ी जाती है तो वह करीब 4000 किमी का रास्ता तय कर सकती है. ऐसे में इस मिसाइल की रेंज में फिलिपींस, वियतनाम, थाईलैंड और म्यांमार जैसे देश आ जाते हैं.

लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (आईआरबीएम)

मध्यम दूरी वाली बैलिस्टिक मिसाइलों के बाद अगर लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल की बात करें तो उत्तर कोरिया ने इस श्रेणी में भी खासी कामयाबी हासिल कर ली है. वह दावा करता है कि इस श्रेणी की उसकी मिसाइलें 3000-6000 किमी दूर स्थित लक्ष्य को भेद सकती हैं. लेकिन, जानकार इसकी अधिकतम सीमा 5000 किमी तक ही मानते हैं. 2016 में उत्तर कोरिया ने इस श्रेणी में 4000 किमी तक जाने वाली मिसाइल का निर्माण कर लिया था.

रेंज के लिहाज से यह मिसाइल अमेरिका के कब्जे वाले गुआम द्वीप पर स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों के साथ-साथ दक्षिण-पूर्व एशिया को भी निशाना बनाने में सक्षम है. साथ ही इस मिसाइल की जद में पूरा चीन, नेपाल, आधा रूस और सिंगापुर आ जाते हैं. अगर भारत की बात करें तो यहां के बड़े शहरों में कोलकाता, भुव्नेश्वर, पटना, लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, देहरादून और मनाली के साथ पूरा उत्तर-पूर्व भारत इस मिसाइल की रेंज में आता है. हालांकि, इन मिसाइलों की विश्वसनीयता बहुत कम बताई जाती है क्योंकि किम जोंग के शासन में इनके 14 परीक्षण किए गए जिनमें केवल तीन ही सफल हुए.

हालांकि, इस लंबी दूरी की मिसाइल के असफल परीक्षणों के बाद भी पिछले साल के अंत में उत्तर कोरिया ने दुनिया भर की चिंता तब बढ़ा दी, जब वह इसी श्रेणी की ह्वासांग-12 मिसाइल बनाने में सफल हो गया. दक्षिण कोरियाई जानकारों के अनुसार यह मिसाइल 3000 मील यानी करीब 4800 किमी की रेंज तक मार करने में सक्षम है. यह वही मिसाइल है जिसके उत्तर कोरिया ने सितम्बर में जापान के ऊपर से दो सफल परीक्षण किए थे. इस मिसाइल की रेंज के लिहाज से अगर देखें तो भारत की राजधानी दिल्ली और पाकिस्तान का भी काफी हिस्सा इसकी जद में आ जाता है.

अंतरमहाद्वपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम)

इसके बाद उत्तर कोरिया की अंतरमहाद्वीपीय श्रेणी की मिसाइलों की शुरुआत होती है. इसमें सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाली मिसाइल ह्वासांग-14 है. यह केएन-14 और केएन-20 के नाम से भी जानी जाती है. यह एक ऐसी बैलिस्टिक मिसाइल है जिसने अमेरिका सहित कई यूरोपीय देशों की भी चिंताएं बढ़ा दी हैं और इसका कारण इस मिसाइल की मारक क्षमता है. इस साल जुलाई में उत्तर कोरिया ने इसके दो सफल परीक्षण किए हैं. चार जुलाई को हुए पहले परीक्षण के बाद विशेषज्ञों ने इसकी मारक क्षमता साढ़े आठ हजार किमी तक बतायी थी. लेकिन, इसके बाद 28 जुलाई को हुए दूसरे परीक्षण के बाद कहा जा रहा है कि यह 10 हजार किमी तक मार करने में सक्षम है.

इस लिहाज से अगर देखें तो दुनिया के कई बड़े हिस्से इसकी जद में आते दिखते हैं. इनमें कनाडा और अमेरिका के प्रमुख राज्य वाशिंगटन, अलास्का और कैलिफ़ोर्निया शामिल हैं. हालांकि, वाशिंगटन डीसी और न्यूयार्क जैसे शहर इस मिसाइल की रेंज से बाहर हैं. ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड की राजधानी आकलैंड, एशिया में भारत, पाकिस्तान, मध्यपूर्व में ईरान, सऊदी अरब, तुर्की, यूरोप में इटली, जर्मनी, ब्रिटेन और स्पेन सहित कई देश इस मिसाइल की जद में आ जाते हैं.

उत्तर कोरिया ने इस साल अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल श्रेणी में ह्वासांग-14 से भी बेहतर मिसाइल ह्वासांग-13 या केएन-08 बनाने का भी दावा किया है. कुछ दक्षिण कोरियाई जानकार उसके इस दावे की पुष्टि भी करते हैं. परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम यह मिसाइल करीब 7,200 मील यानी 12,000 किमी तक मार कर सकती है. हालांकि, इस मिसाइल को लेकर राहत की बात बस इतनी है कि अभी तक इसका कोई भी परीक्षण सफल नहीं हो सका है.

उपग्रह से मिसाइल लांच

इन सबके अलावा उत्तर कोरिया ने अंतरिक्ष में भी कुछ हद तक सफलता पा ली है. उसका दावा है कि उसने ऐसे रॉकेट बना लिए हैं जिनसे उपग्रह को कक्षा में स्थापित किया जा सकता है. अगर उसका यह दावा सच है तो फिर लगभग पूरी दुनिया उसकी मिसाइलों की जद में आ जायेगी. अनुमान के मुताबिक इस स्थिति में उसकी मिसाइलें करीब 15,000 किमी तक मार करने में सक्षम होंगी. हालांकि, अधिकतर जानकारों का कहना है कि उत्तर कोरिया ने अभी इस मामले में परीक्षण के लिए जो उपग्रह इस्तेमाल किए हैं वे काफी हल्के हैं. इनके मुताबिक ये उपग्रह बड़ा नुकसान करने वाले भारी बमों को ले जाने में सक्षम नहीं हैं.

दुनिया के किस कोने में बचाव संभव

विशेषज्ञों की मानें तो उत्तर कोरिया की मिसाइल क्षमता को जानने के बाद दुनिया में केवल एक ही जगह ऐसी बचती है जहां उसकी मिसाइलें नहीं पहुंच पाएंगी, और यह जगह है दक्षिण अमेरिका. दक्षिण अमेरिका में भी अर्जेंटीना का समुद्री तटीय शहर ‘मार डेल प्लाटा’ सबसे ज्यादा सुरक्षित माना जा रहा है. दरअसल, पृथ्वी पर यह शहर उत्तर कोरिया के एकदम विपरीत में स्थित है और ऐसे में वर्तमान क्षमताओं को देखते हुए यहां उत्तर कोरियाई मिसाइलें किसी भी हाल में नहीं पहुंच सकतीं.

यानी अब आप अगर उत्तर कोरिया की मिसाइलों से बचना चाहते हैं तो दुआ कीजिए कि अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच बातचीत से इस समस्या का हल निकल आए, अन्यथा अर्जेंटीना में ठिकाना बनाने के बारे में सोचिए और आज से ही स्पेनिश सीखना शुरू कर दीजिये.