आठ नवंबर, 2016 का वह बिलकुल आम-सा दिन था और सूरज डूबने तक कोई ऐसे संकेत दिखाई नहीं दिए थे कि आने वाली रात ऐतिहासिक होने जा रही है. लेकिन आठ बजे के बाद अचानक काफी कुछ बदल गया. उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की और कहा कि आधी रात के बाद से पांच सौ और हजार रुपए के नोट मान्य नहीं होंगे. मिनटों में नोटों के रद्दी कागज में तब्दील हो जाने की यह सूचना जब लोगों तक पहुंची तो बहुतों ने इसे मजाक समझा. लेकिन जैसाकि कहा जाता है - मजाक का भी एक वक्त होता है. नोटबंदी करोड़ों ईमानदार लोगों के लिए एक बड़ा झटका साबित हुई. इन लोगों में मुख्य रूप से वे किसान और छोटे-छोटे कारोबारी शामिल थे, जिनकी आजीविका पर सरकार के इस एक फैसले से संकट आ खड़ा हुआ था.

जब करोड़ों लोगों के जीवन में अचानक दुश्वारियां आ जाएं तो उनकी अभिव्यक्ति होनी भी स्वाभाविक है. उस अफरा-तफरी के माहौल में कई ऐसे संवेदनशील कलाकार भी थे जिन्होंने लोगों की दुश्वारियों को अपनी कला के जरिये आवाज देने की कोशिश की. हम चूंकि गीत-संगीत प्रेमी समाज हैं सो जनता की यह प्रतिक्रिया कला की इसी विधा में सबसे ज्यादा देखने-सुनने को मिली. इसके जरिए गांव-देहात के किसान से लेकर ऑस्कर विजेता संगीतकार तक अपनी बात कहते नजर आए. दिलचस्प बात यह है कि यह सिलसिला आज भी जारी है. नोटबंदी की सालगिरह पर बनाया गया यह वीडियो भी नोटबंदी के बाद के भारत की कुछ झलकियां दिखाता है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी टिप्पणी करता है. यह गाना साल 1962 में आई फिल्म चाइना टाउन के ‘बार-बार देखो...’ की पैरोडी है.

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‘द मोदी सॉन्ग’ नाम का यह वीडियो यूट्यूब चैनल ‘ईस्ट इंडिया कॉमेडी’ (ईआईसी) ने बनाया है. ईआईसी की टीम में अतुल खत्री, अंगद सिंह रान्याल, अज़ीम बनतवाला, सपन वर्मा, साहिल शाह, कुणाल राव और सौरभ पंत शामिल हैं. ईस्ट इंडिया कॉमेडी सबसे ह्यूमरस और सरोकारों पर बात करने वाला चैनल माना जाता है. अपने एक लाइव शो के दौरान ईआईसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और न्यूज एंकर अर्णब गोस्वामी पर पैरोडी गाने सुनाये थे. इनमें से मोदी सॉन्ग सबसे ज्यादा लोकप्रिय हुआ. यह गाना 90 के दशक में अलीशा चिनॉय के गाए ‘मेड इन इंडिया’ का रीमेक है. इस गाने में बिना पीएम मोदी का नाम लिए उन्हें निशाना बनाया गया है और नोटबंदी से हुई परेशानी को बेहद मजेदार तरीके से पेश किया गया है.

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ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान ने अपनी एक ऑर्केस्ट्रा प्रस्तुति के जरिए नोटबंदी पर टिप्पणी की थी. इस म्यूजिकल पीस की खासियत यह है कि एकदम भावुक कर देने वाली मेलोडी के साथ यहां प्रधानमंत्री के भाषणों की कुछ लाइनें और धन-धना-धन, कैशलेश, डिजिटल इकनॉमी जैसे कुछ शब्द बार-बार सुनाई देते हैं. साथ ही इसमें पीएम मोदी के साथ-साथ कुछ न्यूज एंकर और अन्य नेताओं की आवाजों को भी इस्तेमाल किया गया है. अटपटे लगने वाले इस मेल के जरिए रहमान यह दिखाना चाह रहे थे कि देश में मचे इस शोर के बीच वह किस दिशा में आगे बढ़ रहा है, इसका कुछ पता नहीं चल रहा. ‘द फ्लाइंग लोटस’ शीर्षक से बनाया गया यह वीडियो खासा चर्चा में रहा था. यहां तक कि छिटपुट विवादों के बाद रहमान को यह सफाई भी देनी पड़ी थी कि उन्होंने किसी राजनीतिक मकसद के लिए इसे नहीं बनाया है.

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बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के एक छात्र द्वारा अपलोड किया गया यह वीडियो किसी ग्रामीण कवि की रचनात्मकता दिखाता है. बकौल कवि महोदय नोटबंदी एक बहुत बढ़िया कदम है जिससे भ्रष्ट नेताओं के होश ठिकाने आ गए हैं. इस सबके बावजूद उनकी कविता/तुकबंदी का पहला हिस्सा किसी गांव या कस्बे में नए नोट न मिलने से पैदा हुई मुसीबतों को भली तरह से बताता है. यहां पर इस बात का जिक्र कर देना जरूरी है कि नोटबंदी के दौरान एक बड़ा तबका यह मानता रहा कि इसका असर केवल अमीर लोगों पर पड़ने वाला है, यह तुकबंदी भी कुछ इन्हीं भावनाओं को दिखाती है. भाषा से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन बुजुर्ग का ताल्लुक पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसी हिस्से से होगा.

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एक अवॉर्ड शो के दौरान प्लेबैक सिंगर सोनू निगम स्टैंडअप कॉमेडी के जरिए गायकों पर नोटबंदी के असर की बात करते नजर आए थे. यह वीडियो उनकी गायकी और कॉमिक टाइमिंग से ज्यादा बेहतरीन मिमिक्री के चलते लोकप्रिय हुआ था. हालांकि यह वीडियो सीधे सरकार पर कोई टिप्पणी नहीं करता लेकिन नोटबंदी के दौरान आम लोगों ने नए-पुराने नोटों को लेकर क्या महसूस किया, यह संगीत की बड़ी-बड़ी हस्तियों के किस्सों के जरिए बताता है. लोगों के लिए यह जानना बेहद दिलचस्प रहा कि सेलिब्रिटीज नोटबंदी से बुरी तरह परेशान भले न हुए हों, लेकिन उसके असर से बच भी नहीं पाए थे.

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