चुनावी रण में उतर रहे हिमाचल प्रदेश के 60 विधायकों की संपत्ति में अच्छी ख़ासी बढ़ोतरी हुई है. ये सभी 2012 के चुनावों में जीतकर विधानसभा पहुंचे थे और अब फिर से चुनाव लड़ रहे हैं. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक़ 2012 में इन 60 विधायकों की कुल संपत्ति 314 करोड़ रुपये से ज़्यादा थी जो मौजूदा विधानसभा चुनाव तक क़रीब 567 करोड़ रुपये हो गई है. यह बढ़ोतरी क़रीब 80 प्रतिशत है. विधायकों द्वारा चुनाव आयोग को सौंपे गए हलफ़नामों के ज़रिए ये जानकारी मिली है. असोसिएशन फ़ॉर डेमोक्रेटिक रिफ़ॉर्म्स (एडीआर) ने इन हलफ़नामों की जांच की थी.

पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के यदविंदर गोमा ने अपनी संपत्ति 5.2 लाख रुपये घोषित की थी. उन्होंने अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित जयसिंहपुर सीट से चुनाव लड़ा था. पांच साल बाद वे फिर चुनाव लड़ रहे हैं और इस बार उनकी संपत्ति 1.2 करोड़ रुपये हो गई है. यानी 2189 प्रतिशत की बढ़ोतरी. इसमें 52 लाख रुपये की खेती की ज़मीन, 50 लाख रुपये की आवासीय संपत्ति और छह लाख रुपये का सोना है जिसमें उनकी पत्नी का भी हिस्सा है. अपने हलफ़नामे में गोमा ने कहा है कि यह सब उन्होंने अपनी खेती और विधायकी के काम से कमाया है. विधायक के रूप में उन्हें हर महीने 55 हज़ार रुपये का वेतन मिलता है. विधायक बलबीर सिंह वर्मा की संपत्ति में सबसे ज़्यादा उछाल देखा गया है. 2012 में उनके पास 41 करोड़ रुपये से ज़्यादा की संपत्ति थी जो अब क़रीब 91 करोड़ रुपये हो गई है. वर्मा की राजनीतिक निष्ठा भी बदल गई है. 2012 में उन्होंने चौपाल निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ा था. इस बार वे भाजपा के टिकट पर मैदान में हैं.

भाजपा के टिकट पर इस बार का चुनाव का लड़ रहे 26 विधायकों की संपत्ति में 114 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. 2012 में इनकी कुल संपत्ति क़रीब 105 करोड़ रुपये थी जो अब 224 करोड़ रुपये से ज़्यादा है. इस मामले में कांग्रेस विधायक उनसे पिछड़ गए हैं. इस बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े रहे 33 विधायकों की कुल संपत्ति 2012 में 208 करोड़ रुपये थी जो अब क़रीब 341 करोड़ रुपये है. यानी 64 प्रतिशत की वृद्धि. पिछले चुनावों में जीतने वाले प्रत्याशियों में लगभग सभी की संपत्तियों में इज़ाफ़ा हुआ है. केवल दो ही विधायक इससे अछूते रहे. इनमें एक ख़ुद प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह हैं. 2012 में उनकी कुल संपत्ति की क़ीमत 34 करोड़ रुपये थे जो अब साढ़े 30 करोड़ रुपये रह गई है. दूसरे हैं राज्य के सामाजिक न्याय मंत्री धनी राम शांडिल. उनकी संपत्ति 2.1 करोड़ रुपये थी जो अब 1.1 करोड़ हो गई है.