कतालोनिया की अपदस्थ सरकार के प्रमुख कार्लेस पुज्देमोन और उनके चार मंत्रियों ने बीती पांच नवंबर को ब्रसेल्स की पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. वे 30 अक्टूबर से ब्रसेल्स में ही डेरा डाले हुए हैं. स्पेन के सर्वोच्च शासकीय न्यायालय ने शनिवार, चार नवंबर की शाम, उनकी गिरफ्तारी के लिए एक ‘यूरोपीय वारंट’ जारी किया था. 54 वर्षीय पुज्देमोन ने तभी ही कह दिया था कि वे बेल्जियम के न्यायिक अधिकारियों के साथ सहयोग करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. पुज्देमोन और उनके चार अन्य पूर्व मंत्रियों का त्वरित और स्वैच्छिक आत्मसमर्पण यही दिखाता है कि उन्हें बेल्जियम की न्यायप्रणाली की निष्पक्षता पर स्पेनी न्यायप्रणाली की अपेक्षा अधिक विश्वास है.

आत्मसमर्पण करते ही पांचों व्यक्तियों को हिरासत में ले लिया गया. इसके बाद एक बेल्जियन जज को 24 घंटों के भीतर उनकी प्राथमिक सुनवाई करनी और यह तय करना था कि वारंट के अनुसार उन्हें विधिवत तुरंत गिरफ़्तार कर लिया जाना चाहिये या नहीं. इस जज ने 10 घंटे की सुनवाई के बाद पांचों को कुछ शर्तें के साथ रिहा कर दिया. मुख्य शर्त यह है कि बेल्जियम के क़ानूनों के अनुसार वारंट की वैधता के बारे में अगले 15 दिनों के भीतर अदालती फैसला होने तक वे बेल्जियम में ही रहेंगे और उनके रहने-ठहरने का निश्चित पता-ठिकाना होगा. उनकी रिहाई से स्पेन खिन्न है.

‘बिना ज़मानत रिहाई मिल गयी’

इस रिहाई पर कार्लेस पुज्देमोन ने ट्वीट किया, ‘बिना ज़मानत रिहाई मिल गयी. हमारी संवेदनाएं उन सहयोगियों के साथ हैं, जिन्हें एक ऐसी सकार ने अन्यायपू्र्ण ढंग से जेल में बंद कर रखा है, जिसका व्यवहार लोकतंत्र से कोसों दूर है.’ पुज्देमोन के साथ ही रिहा हुयीं उनकी कृषिमंत्री मेरिक्सेय सेर्रेत ने लिखा, ‘बेल्जियम में उन्होंने हमें ज़मानत के बिना ही छोड़ दिया, स्पेन में तो हम जेल में होते.’

बेल्जियम के संघीय अभियोजन कार्यालय के प्रवक्ता ने पत्रकारों को बताया कि बेल्जियन अधिकारी कतालान मंत्रियों के आत्मसमर्पण से पहले ही उनके संपर्क में थे. उनकी प्राथमिक सुनवाई करने वाले जज को इतना ही तय करना था कि स्पेन के यूरोपीय गिरफ्तारी वारंट पर अमल ठुकरा दिया जाना चाहिये, संबद्ध लोगों को गिरफ्तार कर लेना चाहिये या उन्हें शर्तबंद अथवा ज़मानती रिहाई दे देनी चाहिये. रविवार की सुनवाई के समय वकील के साथ केवल यही पांच लोग उपस्थित थे.

15 दिनों के भीतर निर्णय

सुनवाई की फ़ाइलें अब जिस अदालत में जायेंगी, उसे नियमानुसार 15 दिनों के भीतर निर्णय लेना है कि स्पेनी सरकार के ‘यूरोपीय वारंट’ पर अमल होना चाहिये या नहीं. एक बेल्जियन वकील के मुताबिक अदालत के सामने मुख्य प्रश्न यह होगा कि वारंट में जो आपराधिक आरोप लगाये गये हैं, वे कहीं राजनीति-प्रेरित तो नहीं हैं और स्पेनी अधिकारी कहीं ज़्यादती तो नहीं कर रहे हैं? यानी, आरोप यदि ‘राजनीति-प्रेरित’ और ‘ज़्यादती-भरे’ आंके गये, तो पहली अदालत ही वारंट पर अमल को ठुकरा सकती है.

सभी जानते हैं कि पुज्देमोन और उनके साथ के चारों मंत्री जनता द्वारा चुने राजनेता थे. उन्होंने कतालोनिया में जो जनमतसंग्रह करवाया और उसके आधार पर स्वतंत्रता की घोषणा की, वह संविधान-सम्मत नहीं था, तब भी वह एक राजनैतिक कार्य ही था न कि कोई हिंसापूर्ण गतिविधि या गुप्त आपराधिक षड़यंत्र. यदि वारंट की समीक्षा करने वाली अदालत का भी ऐसा ही कुछ मानना रहा, तब वह वारंट पर अमल, यानी अभियुक्तों के प्रत्यर्पण की मांग को ठुकरा सकती है.

बेल्जियम पर दबाव डालने का प्रयास

यह आकलन यदि पहली नहीं, तो बाद की भी किसी ऊंची अदालत का हो सकता है. इसीलिए पुज्देमोन ने अपने लिए बेल्जियम के एक ऐसे नामी वकील को चुना है, जिसने कुछ साल पहले, स्पेनी बास्क प्रदेश की स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले दो आतंकवादियों तक को छुड़ा लिया और उनका प्रत्यर्पण नहीं होने दिया. स्पेन और बेल्जियम के बीच उसी समय से थोड़ा मनमुटाव भी है. इस बार भी सुनने में आया है कि स्पेन में बेल्जियम के राजदूत को बुला कर बेल्जियम की सरकार पर दबाव डालने का प्रयास हुआ है. ब्रसेल्स में स्पेनी राजदूत और यूरोपीय संसद के कुछ सांसद भी इसी दिशा में सक्रिय बताये जाते हैं.

पर, बेल्जियम की पहली अदालत का अगले 15 दिनों में निर्णय यदि वारंट पर अमल करने के पक्ष में हुआ, तो इसका अर्थ होगा, पांचों लोगों की गिरफ्तारी और उन्हें स्पेन के हाथों में प्रत्यर्पित करने की प्रक्रिया का आरंभ. इस सारी प्रक्रिया के दौरान होने वाले निर्णयों के विरुद्ध एक के बाद दूसरे ऊंचे न्यायालय में अपील करने की भी इतनी संभावनाएं होंगी कि दो से तीन महीने और बीत जायेंगे.

पुज्देमोन अपनी पार्टी के शीर्ष प्रत्याशी

अटकलें लगाई जा रही हैं कि प्रत्यर्पण की लंबी प्रक्रिया का लाभ उठा कर कार्लेस पुज्देमोन कतालोनिया में 21 दिसंबर को होने वाले चुनाव में भी संभवतः भाग ले सकेंगे. उनकी पार्टी ने उन्हीं को अपना शीर्ष प्रत्याशी बनाने का निर्णय किया है. जब तक कोई अदालत विधिवत उन्हें कोई सज़ा नहीं सुना देती, तब तक वे चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित नहीं किये जा सकते.

27 अक्टूबर को स्पेन से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा के बाद से उसके खुशहाल प्रदेश कतालोनिया से जुड़े राजनैतिक संकट में रविवार 5 नवंबर का दिन, इसी कारण, एक और नाटकीय मोड़ की तरह है. सबसे पहला मोड़ यह था कि 27 अक्टूबर के ही दिन स्पेन की केंद्र सरकार ने कतालोनिया की प्रादेशिक सरकार को अपस्थ और वहां की संसद (विधानसभा) को भंग कर वहां का शासन अपने हाथों में ले लिया. अपदस्थ सरकार के प्रमुख कार्लेस पुज्देमोन अपनी आसन्न गिरफ्तारी से बचने के लिए कई मंत्रियों और सहयोगियों के साथ 30 अक्टूबर की शाम ब्रसेल्स पहुंच गये. ब्रसेल्स ही बेल्जियम की राजधानी और यूरोपीय संघ का मुख्यालय है. पुज्देमोन ने कहा कि कतालोनिया का स्वाधीनता संग्राम अब वे ब्रसेल्स से ही चलायेंगे.

बग़ावत, राजद्रोह और धन के दुरुपयोग का आरोप

30 अक्टूबर वाले उसी दिन स्पेन के सरकारी महाभियोजक ने पुज्देमोन सहित उनकी अपदस्थ सरकार के सभी मंत्रियों पर बग़ावत, राजद्रोह और सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए देश के सर्वोच्च शासकीय न्यायालय में अभियोगपत्र दाखिल किया था. न्यायालय ने यह अभियोगपत्र सुनवाई के लिए कार्मेन लामेला नाम की जिस महिला जज को सौंपा, उसने अगले ही दिन सभी अभियुक्तों को 2 और 3 नवंबर की सुबह माद्रिद (मैड्रिड) पहुंचने और अदालती सुनवाई के लिए उपस्थित होने का आदेश दिया.

इस आदेश का पालन करते हुए अपदस्थ सरकार के नौ मंत्री, जो कतालोनिया में ही थे, दो नवंबर को अदालत में हाज़िर हुए. उन में से एक को छोड़ कर बाक़ी सब घर नहीं लौट सके. वे सुनवाई के तुरंत बाद गिरफ्तार कर जेल भेज दिये गये. जिस एकमात्र पूर्व मंत्री को 50 हज़ार यूरो की ज़मानत पर घर जाने की छूट मिली, उसकी बहादुरी इतनी ही थी कि उसने कतालोनिया की विधानसभा में स्वतंत्रता वाली घोषणा पारित होने के एक ही दिन पहले अपना पद त्याग दिया था.

अनुचित और असंतुलित सज़ा

गिरफ्तार मंत्रियों के वकीलों ने जज लामेला के फ़ैसले को पहले से ही तयशुदा, अनुचित और असंतुलित बताते हुए उसके विरुद्ध अपील करने की बात कही है. पूर्व सरकार-प्रुमुख पुज्देमोन और उनके साथ के चार मंत्री उस दिन ब्रसेल्स में ही रहे, माद्रिद नहीं गये. यदि वे भी वहां गये होते, तो तुरंत जेल पहुंच जाते. जज लामेला ने सुनवाई के तुरंत बाद आठ पूर्व मंत्रियों को अदालत से ही सीधे जेल भेज देने का औचित्य यह बताया कि उनके फ़रार हो जाने का डर था.

यह सब इस आपाधापी और इतने सरसरे ढंग से हुआ, कि स्वयं स्पेन के ही कई न्यायविद और समीक्षक, देश की एक विधिसम्मत प्रादेशिक सरकार के तीन-चौथाई मंत्रियों को एकमुश्त जेल भेज देने का औचित्य पचा नहीं पा रहे हैं. वे भी यह मानते हैं कि भले ही इन मंत्रियों ने, कतालोनिया की स्वाधीनता की घोषणा करते हुए, देश के संविधान का उल्लंघन किया, पर उन्होंने बलप्रयोग या हिंसा का कभी आह्वान नहीं किया और न ही कोई हिंसात्मक घटना हुई है.

फासिस्ट तानाशाही की परछाई

हिंसा के अभाव में यह बात समझ से सर्वथा परे है कि सर्वोच्च न्यायालय की महिला जज ने कतालोनिया के अपदस्थ मंत्रियों को ‘बग़ावत’ और ‘राजद्रोह’ जैसे दो ऐसे कामों का दोषी कैसे ठहराया, जो हिंसा के बिना हो ही नहीं सकते! स्पेन को जानने-समझने वाले इस विरोधाभास के बारे में कहते हैं कि वहां के संविधान और वहां की न्यायप्रणाली को चार दशक पूर्व तक रही जनरल फ्रांसिस्को फ्रांको की कुख्यात फासिस्ट तानाशाही वाली परछाई से आज भी पूरी तरह मुक्त नहीं कहा जा सकता.

कतालोनिया की राजधानी बार्सेलोना की मेयर अदा कोलाउ ने एक वक्तव्य में सर्वोच्च शासकीय न्यायालय के 2 नवंबर वाले फ़ैसले की कड़ी निंदा करते हुए कहा, ‘आज का दिन कतालोनिया के लिए काला दिन है. मतदान द्वारा निर्वाचित एक लोकतांत्रिक सरकार को जेल में बंद कर दिया गया है... हम ऐसे हद दर्जे की क़ानूनी बेहूदगी का सामना कर रहे हैं, जो यूरोपीय लोकतंत्रों के पिछले इतिहास में बेजोड़ है... हम एक बेहद गंभीर और अत्यंत भयावह राजनैतिक ग़लती के साक्षी बन रहे हैं...’ हज़ारों लोग अपने अपदस्थ मंत्रियों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए एक बार फिर बार्सेलोना की सड़कों पर उतर आये. ‘इंटरसिंदिकात’ नाम की श्रमिक यूनियन और दो अन्य संगठनों ने 9 नवंबर को आम हड़ताल का भी आह्वान किया है.

‘लोकतंत्र पर बहुत ही गंभीर हमला’

एक टेलीविज़न चैनल के माध्यम से उसी दिन (2 नवंबर को) ब्रसेल्स से ही अपनी जनता को संबोधित करते हुए कतालोनिया के अपदस्थ सरकार प्रमुख पुज्देमोन ने स्रर्वोच्च न्यायालय के फ़ैसले को ‘लोकतंत्र पर एक बहुत ही गंभीर हमला’ बताया. उन्होंने कहा, ‘ऐसे नेताओं को जेल में डाल देना, जो अपने चुनावी वचन को निभा रहे थे, लोकतंत्र के आधारभूत सिद्धांतों की धज्जियां उड़ाना है.’

स्पेन की केंद्र सरकार कतालोनिया की भंग प्रादेशिक विधानसभा का स्थान लेने के लिए आगामी 21 दिसंबर को नये चुनाव करवाने जा रही है. उनकी वैधता पर संदेह जताते हुए पुज्देमोन ने इस टेलीविज़न संबोधन में कहा कि मतदान अब एक ऐसे ‘दमनपूर्ण वातावरण’ में होगा, जिसमें सबके लिए ‘समान अवसर नहीं होंगे.’ अपने समर्थकों से उन्होंने अपील की कि वे तब भी ‘सबके विचारों का आदर करते हुए, अहिंसक और शांतिपूर्ण ढंग से, अपना विरोध प्रकट करें.’ उनका यह भी कहना था कि कतालोनिया की स्वाधीनता स्पेन का घरेलू मामला अब नहीं रही. अब वह एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बन गयी है.

‘मुझे शर्म आती है...’

स्पेन के 2015 के संसदीय चुनावों में 20.7 प्रतिशत मतों के साथ 69 सीटें जीतने वाली केवल तीन वर्ष पुरानी ‘पोदेमोस’ पार्टी के युवा अध्यक्ष पाब्लो इग्लेसियास स्पेन के संभवतः एकमात्र ऐसे प्रमुख नेता हैं, जिन्होंने खुल कर 2 नवंबर वाले अदालती फ़ैसले पर दुख प्रकट किया. उन्होंने कहा, ‘मुझे शर्म आती है कि वे मेरे देश में विपक्षियों को जेल में बंद कर देते हैं. हम कतालोनिया की स्वतंत्रता नहीं चाहते, पर आज हम भी यही कहेंगे कि राजनैतिक बंदियों को मुक्त कर दो.’

यूरोपीय परिदृश्य के प्रेक्षक इस बात से चकित हैं कि दुनिया में हर जगह और हर मौके-बेमौके, लोकतंत्र और आत्मनिर्णय के अधिकार का ढोल पीटने वाले यूरोपीय संघ के प्रमुख पदाधिकारी और यूरोपीय संसद के सांसद भी, स्पेन में इस समय जो कुछ हो रहा है, उसके मूक दर्शक बने हुए हैं. यूरोपीय संघ के वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि संघ के पास ऐसी कोई क़ानूनी प्रक्रिया ही नहीं है, जो उसे इस तरह के मामलों में कुछ करने का अधिकार दे सके. यूरोपीय शिखर नेताओं की परिषद की अध्यक्षता करने वाले दोनाल्द तुस्क ने 27 अक्टूबर के दिन ही कह दिया था कि हमारे लिए ‘स्पेन ही एकमात्र संभाषी है.’

यूरोपीय संघ का डर

यूरोपीय संघ को वास्तव में यह डर सता रहा है कि कतालोनिया की देखादेखी संघ के दूसरे देशों में भी पृथकतावाद कहीं सिर न उठाने लग जाये. इसी डर से यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष जौं-क्लूद युंकर के मुंह से निकल गया, ‘मैं ऐसी कोई स्थिति नहीं चाहता कि कल यूरोपीय संघ 95 अलग-अलग देशों का बना हुआ संघ हो जाये. लिस्बन संधि के अनुरूप यूरोपीय संघ भविष्य में भी क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने सहित (सदस्य) देशों के सभी मूलभूत दायित्वों का सम्मान करता रहेगा.’

यूरोपीय संघ के पदाधिकारियों की इस विवशता से कोई इनकार नहीं करता, पर, कुछ लोगों का मानना है कि यूरोपीय संघ पर्दे के पीछे रह कर कतालोनिया संकट में एक मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता था. मौन दर्शक बना रह कर वह न केवल यूरोपीय एकता के भक्तों को निराश कर रहा है, संघ की सक्षमता और उपयोगिता पर उंगली उठाने का भी मौका दे रहा है.

स्वतंत्रता के प्रति जनसमर्थन बढ़ा

दो नवीनतम मतसर्वेक्षणों के परिणाम दिखाते हैं कि कतालोनिया की स्वतंत्रता-समर्थक पार्टियों के प्रति जनसमर्थन बढ़ कर 54 प्रतिशत हो गया है. इसका अर्थ यही है कि स्पेनी सरकार कतालोनिया की अपदस्थ सरकार के नेताओं के साथ जितनी निष्ठुरता बरतेगी, उन की पार्टियों के प्रति जनसमर्थन उतना ही बढ़ता जायेगा. 21 दिसंबर वाले मतदान में यदि स्वतंत्रतावादियों को पहले से अधिक बहुमत मिल गया, तो स्पेनी सरकार मुंह दिखाने लायक नहीं रह जायेगी.

संभावना यही है कि कतालोनिया संकट जितना ही गहरायेगा, यूरोपीय संघ के लिए भी उतना ही भारी सिरदर्द बनता जायेगा. इसी को रेखांकित करते हुए एक प्रमुख जर्मन दैनिक ने लिखा, ‘कौन कहता है कि राष्ट्र-राज्य ही इतिहास का अंतिम शब्द है... हाथकंगन को आरसी क्या. राष्ट्र-राज्यों के सहबंध वाले अपने वर्तमान स्वरूप में यूरोपीय संघ का कोई दीर्घकालिक भविष्य नहीं है.’ दैनिक का कहना है कि यूरोपीय का भविष्य इसी में है कि वह राष्ट्र-राज्यों के बदले अंचलों का, प्रदेशों का संघ बनने की सोचे.