केंद्र सरकार आज नोटबंदी की वर्षगांठ पर ‘कालाधन-विरोधी दिवस’ मना रही है. अपने इस ऐतिहासिक क़दम को लेकर वह कई दावे कर रही है. उनमें एक दावा यह है कि नोटबंदी के दौरान देश की कुल आबादी में 0.00011 प्रतिशत नागरिकों ने बैंकों में जमा कुल कैश का 33 प्रतिशत हिस्सा जमा कराया था. सरकार की तरफ़ से देश के कई अख़बारों में दिए विज्ञापन में यह दावा किया गया है. विज्ञापन में सरकार ने नोटबंदी को ‘एक ऐतिहासिक और बहुआयामी सफलता’ बताया है.

विज्ञापन में दावा किया गया है कि नोटबंदी की वजह से आतंकनिरोधी प्रयासों से लेकर नौकरियों के सृजन तक हर चीज़ पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा. 500 और एक हज़ार के नोटों को रद्द करने के फ़ैसले को सरकार ने आतंकवाद और नक्सलवाद के ख़िलाफ़ संघर्ष में एक निर्णायक क़दम बताया. यह भी कहा गया कि नोटबंदी की वजह से कश्मीर में पत्थरबाज़ी की घटनाओं में 75 प्रतिशत तक की कमी आई. सरकार ने कहा कि नोटबंदी ने नक्सलवाद के चलते होने वाली घटनाओं को भी 20 प्रतिशत तक कम कर दिया.

सरकार ने यह भी कहा है कि नोटबंदी ने देश के वित्तीय तंत्र और अन्य क्षेत्रों की बड़े स्तर पर सफ़ाई करने का काम किया. विज्ञापन में उसका कहना है, ‘नोटबंदी के बाद शेल कंपनियों पर सर्जिकल स्ट्राइक (कार्रवाई) की गई, 2.24 लाख कंपनियों को बंद किया गया, 35 हज़ार कंपनियों के 58 हज़ार बैंक खातों पर कार्रवाई हुई जो 17 हज़ार करोड़ रुपये का लेन-देन कर रहे थे.’

नोटबंदी की वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काफ़ी सक्रिय नज़र आए. उन्होंने एक के बाद एक कई ट्वीट किए. ट्विटर पर उन्होंने एक शॉर्ट फ़िल्म भी शेयर की जिसमें नोटबंदी के फ़ायदे गिनाए गए हैं.