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दिल्ली में फैले प्रदूषण की चर्चा देश भर में है. तमाम जानकार प्रदूषण और इसके कारण छाए स्मॉग की चर्चा करते हुए इसे सेहत के लिए खतरनाक बता रहे हैं. लेकिन यह खतरा तो तभी तक है जब तक इंसान सांस ले रहा है, अगर सांसें रुक जाएं तो खतरा खत्म. फिलहाल व्हाट्सएप पर तेजी से वायरल हो रहे इस वीडियो को देखकर आपको पता चलता है कि स्मॉग न सिर्फ स्वास्थ्य खराब कर धीरे-धीरे आपकी जान ले सकता है बल्कि मिनटों में खेल खत्म करने की वजह भी बन सकता है. यह वीडियो बताता है कि कोहरे के दौरान दिल्ली-एनसीआर के हाइवेज पर तेज रफ्तार भागती गाड़ियां कभी भी सैकड़ों जानों के लिए खतरा बन सकती हैं. यहां पर यह बात सही मानी जा सकती है कि लोग इस वीडियो को देखकर थोड़े सचेत हो जाएंगे या सरकार-पुलिस को सुरक्षा इंतजाम करने की याद आ जाएगी. लेकिन सही सूचना देने वाले इस वीडियों के बारे में भी आपको मिली जानकारी गलत है.

तमाम समाचार वेबसाइटें इस वीडियो को आठ नवंबर 2017 की सुबह का बताकर रिपोर्ट कर रही हैं. बताया जा रहा है कि यह यमुना एक्सप्रेसवे पर आज सुबह हुई 18 गाड़ियों की टक्कर का वीडियो है. वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे तेज रफ्तार गाड़ियां आकर एक के बाद एक टकराती जा रहीं हैं. एकाध मौके ऐसे भी हैं जब एक गाड़ी के टकराने के बाद उसमें सवार लोगों को उतरने का वक्त भी नहीं मिल पाता और दूसरा वाहन उससे आकर भिड़ जाता है. इससे पहले ऐसे दृश्य हमने-आपने सिर्फ कॉमेडी फिल्मों में ही देखे हैं, असल जिंदगी में इन्हें घटता देखकर रूह कांप जाती है. इसलिए इसका तेजी ले वायरल होना सहज ही है.

यह सही है कि आज भी एक ऐसी ही दुर्घटना यमुना एक्सप्रेसवे पर दनकौर इलाके के आस-पास हुई है. लेकिन वाइरल हो रहे वीडियो का संबंध उस दुर्घटना से जोड़ना सही नहीं है. क्योंकि कई यूट्यूब चैनलों पर यह वीडियो पहले ही पब्लिश किया जा चुका है. नीचे एक यूट्यूब चैनल के स्क्रीनशॉट में आप देख सकते हैं कि कैसे आठ नवंबर की दुर्घटना का यह वीडियो एक यूट्यूब चैनल पर सात नवंबर को ही पब्लिश कर दिया गया था.

यह सही है कि यह वीडियो यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए एक हादसे का ही है और गाड़ियों की टक्कर भी उसी दुर्भाग्यपूर्ण ढंग से हुई थी, जैसे आज हुई है. लेकिन यह वीडियो आज का होने की बजाय करीब एक साल पुराना हो सकता है. 24 दिसंबर 2016 को बिजनेस स्टैंडर्ड में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी. इस रिपोर्ट के मुताबिक एक्सप्रेसवे पर उस दिन घने कोहरे के कारण कई गाड़ियां आपस में टकरा गई थीं. इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत होने के साथ-साथ करीब 10 लोग घायल भी हुए थे. बहुत संभावना है कि इस वीडियो का संबंध उसी दुर्घटना से हो.

कुछ समाचार वेबसाइटों ने जब अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इस वीडियो को पोस्ट किया तो कई लोगों ने इसे पुराना बताते हुए इसके खिलाफ आपत्ति भी दर्ज की है. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इसे पुलिस द्वारा जारी वीडियो बताया जा रहा है. यानी कि इस वीडियो के वायरल होने में नोएडा पुलिस की लापरवाही का भी थोड़ा योगदान हो सकता है.

ये कुछ कारण है जिनके चलते हम सुरक्षित होकर कह सकते हैं कि यह वीडियो आठ नवंबर को हुई दुर्घटना का नहीं है. फिर भी वीडियो यह तो बताता ही है कि कि कोहरे के दौरान लोगों को थोड़ा ज्यादा सावधान रहना चाहिए और नियंत्रित स्पीड में गाड़ी चलानी चाहिए. लेकिन जो बात वह इससे भी ज्यादा मजबूती से कहता है वह यह कि कितना भी मुश्किल वक्त हो सोशल मीडिया पर भरोसा जरा सोच-समझकर ही करना चाहिए.