हवाई अड्‌डे पर यात्री से मारपीट के मामले में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इंडिगो एयरलाइंस से रिपोर्ट तलब की है. ख़बर के मुताबिक नागरिक उड्‌डयन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने इस घटना पर संज्ञान लिया है. उन्होंने इसे ‘दुर्भाग्यपूण और ख़ेदजनक’ बताया है. ट्विटर पर एक के बाद एक अपनी पोस्ट में उन्होंने बताया कि उनके मंत्रालय ने एयरलाइंस से घटना की तत्काल विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. वे जल्द ही मोंटू कालरा नाम के उस कर्मचारी से भी मिलेंगे जिसे इंडिगो ने नौकरी से निकाला है. इसके अलावा उन्होंने उम्मीद जताई कि राजीव कतियाल नाम के जिस यात्री से मारपीट की गई वे इस मामले में पुलिस रिपोर्ट दर्ज कराएंगे ताकि जिम्मेदार कर्मचारियों पर जरूरी कार्रवाई की जा सके.

हालांकि इस बाबत अख़बार ने जब कालरा से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि मंत्रालय की ओर से अब तक किसी ने उनसे संपर्क नहीं किया है. वहीं पीड़ित यात्री कतियाल ने अख़बार के फोन और मैसेज़ का कोई जवाब ही नहीं दिया. अलबत्ता एयर इंडिया के पूर्व चेयरमैन अश्विनी लोहानी ने ज़रूर फेसबुक पर लिखा है, ‘बेहद अमानवीय और घृणित. सभ्य समाज में ऐसी घटना को स्वीकार नहीं किया जा सकता.’ लोहानी वर्तमान में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन हैं.

द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक घटना 15 अक्टूबर की है. उस दिन कतियाल की इंडिगो एयरलाइंस के ग्राउंड स्टाफ के तीन कर्मचारियों से किसी बात पर झड़प हो गई. इसके बाद जब कतियाल विमान से उतरकर टर्मिनल जाने वाली बस में सवार हो रहे थे तो तीन में दो कर्मचारियों ने उन्हें नीचे उतारकर उनसे मारपीट की. कतियाल चेन्नई से दिल्ली आई उड़ान संख्या 6ई 487 के यात्री थे. ख़बर के मुताबिक मोंटू ने मामले में बीच-बचाव करने की कोशिश लेकिन जब वह सफल नहीं हुआ तो उसने इसका वीडियो बना लिया. इंडिगो ने इसी वज़ह से उसे नौकरी से निकाल दिया था.

घटना के करीब तीन हफ़्ते बाद इसी मंगलवार को इसका वीडियो सामने आने पर सोशल मीडिया में एयरलाइंस को लेकर बेहद तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. द इकॉनॉमिक टाइम्स के अनुसार ट्विटर पर इंडिगो के ख़िलाफ ‘हैशटैगबॉयकॉटइंडिगो’ के नाम से अभियान चल रहा है. ट्विटर के एक सक्रिय यूज़र बेंगलुरू के रमेश श्रीवत्स ने लिखा है, ‘इंडिगो सस्ते किराए वाली एयरइलाइंस नहीं है. वह ओछी एयरइलाइंस है. उसने घटना के तीन सप्ताह बाद भी मारपीट करने वाले कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की. बस एक झूठा माफीनामा जारी कर छुट्‌टी पा ली. और उल्टे उस कर्मचारी को ही नौकरी से निकाल दिया जिसने वीडियो बनाकर घटना का ख़ुलासा किया.’