मंगल ग्रह की यात्रा के लिए क़रीब एक लाख 40 हज़ार भारतीयों ने टिकट बुक करा लिया है. हालांकि ये लोग खुद नहीं बल्कि उनके नाम मंगल ग्रह की यात्रा करेंगे. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा मई, 2018 में अपने ‘इनसाइट’ मिशन के तहत एक यान इस लाल ग्रह पर भेजेगी. इन सभी लोगों के नाम यान पर लगे एक माइक्रोचिप पर दर्ज होंगे. नासा ने कहा कि उसने इन लोगों को ऑनलाइन बोर्डिंग पास भी दिए हैं.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़ नासा ने बताया कि मंगल मिशन के लिए नाम भेजनेवालों में भारतीय काफ़ी आगे रहे. इस मिशन के लिए दुनियाभर से क़रीब 24 लाख 30 हजार लोगों ने आवेदन किया था. भारत इस लिहाज से तीसरे नंबर पर रहा. पहले नंबर पर अमेरिका रहा जिसके छह लाख 75 हज़ार से भी ज़्यादा लोगों ने अपने नाम भेजे. उसके बाद दूसरे नंबर पर चीन रहा. उसके दो लाख 60 हज़ार से भी ज़्यादा लोगों ने मिशन के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है.

नासा का कहना है कि अमेरिका का पहले नंबर पर रहना कोई हैरानी की बात नहीं है क्योंकि यह नासा का ही मिशन है, लेकिन भारत का तीसरे नंबर पर रहना महत्वपूर्ण है. विशेषज्ञों की मानें तो मंगलयान मिशन के बाद भारत के नागरिकों में (अंतरिक्ष को लेकर) उत्साह और रुचि पैदा हुई है. वे भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ते सहयोग को भी इसकी मुख्य वजह बताते हैं.

नासा के मुताबिक़ उसका यान 26 नवंबर, 2018 को मंगल ग्रह पर लैंड करेगा. 720 दिनों के इस मिशन में मंगल पर आनेवाले भूकंपों का अध्ययन किया जाएगा. इससे न सिर्फ यह पता चलेगा कि मंगल की आंतरिक संरचना कैसी है, बल्कि सौरमंडल के दूसरे ग्रहों की बनावट से जुड़ी जानकारियां भी हासिल होंगी.