कर्नाटक में कांग्रेस की सिद्धारमैया सरकार के ऊर्जा मंत्री हैं डीके शिवकुमार. खासे धनी-मानी और रसूख़दार. अपनी पार्टी के साथ दूसरी पार्टियों के नेताओं से भी उनके अच्छे ताल्लुक़ात हैं. शायद इसीलिए उन पर कर चोरी के मामलों में आयकर छापे के बावज़ूद मुख्य विपक्षी दल भाजपा सहित किसी पार्टी ने उनके ख़िलाफ़ असरदार आवाज़ बुलंद नहीं की. बल्कि जैसा कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया आरोप लगाते हैं, ‘आयकर विभाग के छापों के मार्फ़त दबाव बनाकर उन्हें भाजपा में शामिल करने की कोशिश की जा रही है. और यह कोशिश सीधे भाजपा नेताओं ने नहीं बल्कि आयकर अधिकारियों ने की है.’

द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक सिद्धारमैया ने कहा है, ‘केंद्र सरकार सीबीआई (केंद्रीय जांच ब्यूरो) आयकर विभाग और ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) जैसी संस्थाओं का इस्तेमाल लोगों को धमकाने के लिए कर रही है. इस साल अगस्त में जब शिवकुमार के ठिकानों पर छापे मारे गए तो आयकर अधिकारियों ने खुले तौर उन्हें भाजपा में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था. देश में भगवाकरण का यह आलम हो गया है.’ सिद्धारमैया ने नोटबंदी का एक साल पूरा होने के मौके पर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के तहत हुई एक रैली के दौरान बुधवार को यह आरोप लगाया है.

यही नहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जी परमेश्वरा ने भी आरोप लगाया है कि उनके ऊपर भाजपा में शामिल होने का दबाव बनाया जा रहा है. इस बारे में भाजपा नेताओं की ओर से झूठे दावे किए जा रहे हैं. उन्होंने मीडिया को बताया, ‘तुमकुरू में हुई एक रैली के दौरान भाजपा नेता सीटी रवि ने दावा किया कि मैं जल्द ही भाजपा में शामिल होने वाला हूं. इस पर जब मैंने उनसे सफाई मांगी तो उनका कहना था कि उनके पास रैली में बोलने के लिए कोई मुद्दा नहीं इसलिए मेरा नाम घसीट लिया. लेकिन उसके बाद रवि अब धमकाने वाले अंदाज में यह कह रहे हैं कि मेरे पास भाजपा में शामिल होने का आख़िरी मौका बचा है. मैं भी उन्हें बता देना चाहता हूं कि कांग्रेस मेरे खून में है. मैं इसे नहीं छोड़ने वाला.’