नोटबंदी के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को नए नोटों की छपाई का ऑर्डर बीते पांच साल में सबसे कम करने को मजबूर होना पड़ा है. इसकी वजह केंद्रीय बैंक और सार्वजनिक बैंकों के करेंसी चेस्ट में जमा हुए पुराने अमान्य नोट हैं. लाइवमिंट के अनुसार नाम न जाहिर करने की शर्त पर एक कार्यकारी अधिकारी ने बताया, ‘बैंकों के करेंसी चेस्ट और आरबीआई की तिजोरी में नए नोटों को रखने के लिए बहुत कम जगह बची है, जबकि 50-60 फीसदी अमान्य नोट आरबीआई को भेजे जा चुके हैं.’ इन नोटों को नष्ट करने के पहले गिना जा रहा है. उधर, आरबीआई ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है.

रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले की जानकारी रखने वाले दो लोगों ने बताया कि वित्त वर्ष 2018 के लिए 21 अरब नए नोटों की छपाई का ऑर्डर दिया गया है, जबकि पिछले साल यह संख्या 28 अरब थी. यही नहीं, बीते पांच साल में औसतन 25 अरब नए नोटों की छपाई कराई गई है. हालांकि, पिछले साल नए नोटों की छपाई बढ़ने के बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि यह उछाल आरबीआई द्वारा नई सीरीज के नोट शुरू करने की वजह से आया था. वास्तव में, यह संख्या 29 अरब से ज्यादा थी.

वहीं, आरबीआई ने नए नोटों की छपाई में कटौती के साथ 10 रुपये, 20 रुपये और 50 रुपये के उन रद्दी नोटों को बदलने पर अभी विचार नहीं किया है, जिन्हें पिछले साल नगदी की किल्लत दूर करने के लिए दोबारा जारी किया गया था. इन नोटों की संख्या 12 अरब के आसपास थी. आरबीआई के मानकों के अनुसार पुराने, गंदे और कटे-फटे नोटों को रद्दी घोषित करके नष्ट कर दिया जाता है.

हालांकि, इस बीच आरबीआई ने नोटबंदी के बाद नए नोटों की आपूर्ति का काम लगभग-लगभग पूरा कर लिया है. उसके हालिया आकंड़ों के अनुसार 16 अक्टूबर तक देश में 15.3 लाख करोड़ रुपये के मूल्य के नोट प्रचलन में आ गए थे. यह एक साल पहले के मुकाबले केवल 10 फीसदी ही कम है.