दिल्ली में वायू प्रदूषण का संकट लगातार गहराता जा रहा है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के आधार पर गुरुवार को नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (एनजीटी) ने कहा कि यह समस्या केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) इससे जूझ रहा है.

दिल्ली में धुंध के अलावा हवा में तैरने वाले सूक्ष्म कणों पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) की मात्रा तय सीमा से कई गुना ज्यादा बढ़ गई है. दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के अनुसार बुधवार को हवा में पीएम-10 का स्तर 986 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा, जबकि तय सीमा 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है. इसी तरह पीएम-2.5 की मात्रा 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की मान्य सीमा से सात गुना ज्यादा रही. गुरुवार को स्थिति सुधरने के बजाए और बिगड़ गई. हवा में पीएम-10 की मात्रा 1136, जबकि पीएम 2.5 की मात्रा 760 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गई. इस समस्या से निपटने के लिए एनजीटी ने ये निर्देश दिए हैं-

1. दिल्ली और एनसीआई में सभी तरह के निजी और सरकारी निर्माण कार्यों पर रोक रहेगी. लेकिन इस दौरान इस क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों को मजदूरी नहीं रोकी जाएगी. अगली सुनवाई तक निर्माण सामग्री खास तौर पर सीमेंट और बजरी लेकर ट्रकों के दिल्ली आने पर पाबंदी रहेगी.

2. दिल्ली के सभी नगर निगम, दिल्ली विकास प्राधिकरण, स्वास्थ्य और पर्यावरण विभाग अपने अधिकारियों की टीम बनाएंगे जो अपने-अपने क्षेत्रों में जांच कर यह सुनिश्चित करेंगी कि कहीं पर कूड़ा न जलाया जाए. इसे एनसीआर में शामिल नोएडा, गाजियाबाद, सोनीपत, गुरुग्राम, पलवल, ग्रेडर नोएडा और बहादुरगढ़ के स्थानीय प्रशासन को भी लागू करना होगा. इसके अलावा उत्सर्जन करने वाली सभी औद्योगिक गतिविधियों पर अगली सुनवाई तक बंद रहेंगी.

3. राज्य सरकारें यह सुनिश्चित करेंगी कि कोई भी निर्माण सामग्री खुले में न रखी हो, अगर कहीं पर ऐसी कोई सामग्री मिलती है तो उसे जब्त कर लिया जाए. इसके लिए एनजीटी के फैसले के आधार पर उसके मालिक से जुर्माना वसूला जाए. दिल्ली-एनसीआर में ईंट भट्ठे और हॉट मिक्स प्लांट्स अगली सुनवाई तक बंद रखा जाए.

4. जिन इलाकों में पीएम-10 का स्तर 600 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से ज्यादा है, वहां पानी का छिड़काव कराया जाए. पानी का छिड़काव कराने के लिए हेलिकॉप्टर या दमकल विभाग की मदद ली जा सकती है. पानी के छिड़काव के बाद सड़कों की नियमित सफाई कराई जाए. यह भी सुनिश्चित किया जाए कि 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल और 15 साल से ज्यादा पुराने पेट्रोल वाहन सड़कों पर न आने पाएं. जहां भी कोई अधिकारी ऐसे वाहनों को पकड़े, उन्हें कल तक चिन्हित कर ली जाने वाली जगहों पर रखवाए.

5. सीपीसीबी और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के अलावा पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड दिल्ली-एनसीआर के अपने-अपने क्षेत्रों में वायु की गुणवत्ता के आंकड़े जुटाएंगे. सभी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अगली सुनवाई पर 12 मानकों के आधार वायु गुणवत्ता का विश्लेषण पेश करें. इन राज्यों की सरकारें यह सुनिश्चित करेंगी कि उनके क्षेत्रों में किसान अपनी फसलों के अवशेष न जलाएं.

एनजीटी ने इसके साथ बदरपुर थर्मल पॉवर प्लांट को मार्च 2018 या सरकार के आदेश तक बंद रखने का निर्देश दिया है. साथ में राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से एनसीआर में शामिल उनके जिलों में हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए दो हफ्ते में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी) भी मांगा है. इस मामले की अगली सुनवाई 14 नवंबर को होगी.