केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार इस बार भी आम बजट एक फरवरी को ही पेश करने की तैयारी कर रही है. सूत्रों के हवाले से हिंदुस्तान टाइम्स ने बताया है कि 2018-19 का बजट पेश करने की तारीख़ आगे या पीछे करने की कोई संभावना नहीं है. यह बजट 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार का आखिरी पूर्ण बजट होगा.

अख़बार को एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया है, ‘बजट की तारीख आगे बढ़ाने का अभी कोई सवाल ही नहीं है. यह 2017-18 के बजट की तरह एक फरवरी को ही पेश किया जाएगा.’ उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने वित्त वर्ष को जनवरी से दिसंबर के बीच करने के बारे में भी अब तक कोई फैसला नहीं किया है. यहां बताते चलें कि काफी समय से यह ख़बरें आ रही हैं कि मोदी सरकार वित्तीय वर्ष को अप्रैल-मार्च से बदलकर जनवरी-दिसंबर करने की तैयारी में. इसीलिए जब 2017-18 का बजट एक फरवरी को पेश किया गया तो इन खबरों को थोड़ा आधार मिला था. इसी के बाद ये अटकलें भी लगाई जाने लगीं थी कि बजट की तारीख और आगे खिसकाई जा सकती है.

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी में प्रोफेसर एनआर भानुमूर्ति इस बार के बजट से जुड़े अन्य पहलू की तरफ ध्यान दिलाते हैं. उनके मुताबिक, ‘मौजूदा सरकार के लिए यह चुनावपूर्व वर्ष का बजट है. साथ ही जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) लागू होने के बाद पहला भी. जाहिर तौर पर सरकार अब कोई नया प्रयोग नहीं करना चाहेगी. बल्कि उसका ध्यान सामाजिक क्षेत्र, छोटे-मंझोले कारोबार और राेजगार सृजन के पहलुओं पर ज्यादा रहेगा.’ ग़ौरतलब है कि 2016 तक केंद्रीय बजट फरवरी के आख़िरी कार्यदिवस (26, 27 या 28 तारीख) पर पेश होता था. मगर 2017 में दशकों पुरानी परंपरा तोड़कर मोदी सरकार ने बजट एक फरवरी को पेश किया था. ताकि योजनाओं के लिए पैसा जल्द मिल सके.