सरकार का नोटबंदी के सकारात्मक परिणाम गिनाना जारी है. नोटबंदी की वर्षगांठ पर क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने दावा किया था सरकार की नोटबंदी से देह व्यापार में भारी कमी आई. अब वित्त मंत्रालय ने दावा किया है कि नोटबंदी की वजह से करीब छह लाख करोड़ रु का संभावित काला धन अर्थव्यवस्था से निकल गया है. उसका यह भी कहना है कि नोटबंदी के चलते लोगों की बचत करने की आदत में बदलाव आया है. मंत्रालय के मुताबिक अब कई लोग अपनी आय को बैंक खातों और म्यूचल फंड में जमा कर रहे हैं.

हिंदुस्तान टाइम्स की एक ख़बर के मुताबिक़ मंत्रालय ने एक संसदीय पैनल को दिए एक नोट में ये बातें कही हैं. इस नोट में कहा गया है कि साल 2016-17 में बैंक खातों, शेयरों, डिबेंचरों, बीमा और पेंशन निधियों में 48 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. वहीं, म्यूचल फ़ंड में जुलाई 2016 से जुलाई 2017 के बीच 45 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. नोट में कहा गया है, ‘नोटबंदी से (लोगों की) बचत की आदतों और संपत्तियों के प्रबंधन में महत्वपूर्ण बदलाव आया है.’ मंत्रालय ने कहा कि बीमा प्रीमियम के ज़रिए जमा हुई रक़म से पता चलता है कि नोटबंदी की घोषणा के बाद लोगों ने जल्दी-जल्दी पुराने नोटों से भुगतान किया था.

सरकार ने यह दावा भी किया कि नोटबंदी से क़रीब छह लाख करोड़ रुपये का कालाधन प्रभावी रूप से अर्थव्यवस्था से निकल गया. हालांकि विपक्ष ने इस दावे को ख़ारिज किया है. 500 और 1000 रुपये के नोटों की वृद्धि दर के आधार पर सरकार ने कहा कि अब तक उनकी क़ीमत 18 लाख करोड़ रुपये हो जाती. नोट में कहा गया है, ‘सितंबर 2017 तक अधिक मूल्य वाले नोटों की क़ीमत लगभग 12 लाख करोड़ रुपये आंकी गई. इस तरह इन नोटों की क़ीमत में प्रभावी रूप से छह लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई.’

नोटबंदी को लेकर विपक्ष का सरकार पर निशाना जारी है. गुरुवार को विपक्ष के कई सदस्यों ने नोटबंदी को लेकर आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष गर्ग और वित्तीय सेवाओं के सचिव अंजलि दुग्गल से सवाल किए थे. उन्होंने पूछा था कि नोटबंदी के चलते कितना ख़र्च आया और बैंक ख़ूब पैसा होने के बाद भी ऋण क्यों नहीं दे रहे.