सुप्रीम कोर्ट ने सात राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के हिंदुओं को अल्पसंख्यक दर्जा देने की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है. समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता को इस मामले में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग से संपर्क करने की सलाह दी है. याचिकाकर्ता अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने एक जनहित याचिका के जरिए मिजोरम, नगालैंड, मेघालय, जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और पंजाब के साथ एक केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप के हिंदुओं को अल्पसंख्यक दर्जा देने की मांग की थी.

लाइव लॉ वेबसाइट के अनुसार शुक्रवार को जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा, ‘हम ऐसा कोई आदेश नहीं दे सकते हैं. आपको अल्पसंख्यक आयोग जाना चाहिए, वही इस मामले में सक्षम संस्था है.’ हालांकि, याचिकाकर्ता अश्वनी उपाध्याय के पैरवीकार वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने दलील दी कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग केवल राष्ट्रीय स्तर पर मामलों को देखता है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई गई है. लेकिन अदालत ने उनकी इस दलील को नहीं माना.

याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने जनगणना के आंकड़ों के आधार पर इन सात राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के हिंदुओं को अल्पसंख्यक बताया था. जनहित याचिका में कहा गया था कि इन्हें अवैध और मनमाने ढंग से अल्पसंख्यकों को मिलने वाले अधिकारों से वंचित किया जा रहा है. याचिका के मुताबिक इन राज्यों के हिंदुओं को केंद्र या राज्य सरकारों ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम-1992 के तहत अल्पसंख्यक के रूप में अधिसूचित नहीं किया है, इसी वजह से इन्हें अल्पसंख्यकों के अधिकार नहीं मिल पा रहे हैं.