वस्तु और सेवाकर (जीएसटी) काउंसिल ने उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है. शुक्रवार को गुवाहाटी में आयोजित बैठक में 177 वस्तुओं को 28 फीसदी वाले जीएसटी स्लैब से बाहर कर दिया गया है. अब इन पर 18 फीसदी कर लगेगा. सोशल मीडिया पर दोपहर से इस बैठक के नतीजों को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं. हालांकि एक बार जीएसटी से जुड़ी यह घोषणा होने के बाद यहां भाजपा और कांग्रेस समर्थक भिड़ते हुए दिखे. कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि जीएसटी काउंसिल ने पार्टी के दबाव में यह फैसला किया है. रचित सेठ का ट्वीट है, ‘यह कांग्रेस की बड़ी जीत है... मोदी का अहंकार झुक गया है.’ इसके साथ ही यहां कई लोगों का कहना है कि यह फैसला गुजरात चुनाव के मद्देनजर लिया गया है. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पिछले दिनों भाजपा पर हमला करते हुए जीएसटी को – गब्बर सिंह टैक्स नाम दिया था. आज इस बात का जिक्र करते हुए भी कुछ मजेदार टिप्पणियां आई हैं. पत्रकार पंकज पचौरी का ट्वीट है, ‘जीएसटी काउंसिल की ताजा मीटिंग के बाद गब्बर सिंह टैक्स का नाम बदलकर रब्बर सिंह टैक्स कर देना चाहिए. यह लचीला है.’

आज मैसूर के शासक टीपू सुल्तान की जयंती है और कर्नाटक में पिछले दो-तीन साल की तरह एक बार फिर इस मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं. कर्नाटक की कांग्रेस सरकार 18वीं सदी के इस शासक को कन्नड़ अस्मिता का प्रतीक मानती है और इस मौके पर सरकारी कार्यक्रम आयोजित करती है. वहीं भाजपा यह कहकर इस कार्यक्रम का विरोध करती रही है कि टीपू सुल्तान एक अत्याचारी शासक था जिसने जबर्दस्ती लाखों हिंदुओं का धर्मांतरण करवाया था. कर्नाटक में भाजपा और उसके सहयोगी संगठनों के सदस्यों ने आज कई जगह विरोध प्रदर्शन किए हैं और इस दौरान इनकी गिरफ्तारी भी हुई है. सोशल मीडिया पर इन खबरों की चर्चा तो है ही साथ ही यहां TipuJayanti लगातार ट्रेंड कर रहा है.

भाजपा और कांग्रेस समर्थकों के बीच जारी बहस के साथ सोशल मीडिया में इस मुद्दे पर कुछ सुलझी हुई टिप्पणियां भी आई हैं. प्रसिद्ध इतिहासकार इरफान हबीब का ट्वीट है, ‘यह दुख की बात है कि राजनीति ने टीपू सुल्तान को एक विभाजनकारी ऐतिहासिक किरदार बना दिया. 18वीं शताब्दी के कई शासकों की तरह वे भी लोकतांत्रिक नहीं थे और दमन करने में शामिल रहे लेकिन वे सांप्रदायिक-कट्टरपंथी नहीं थे, जैसा कि उन्हें बताया जा रहा है... ऐतिहासिक किरदारों से जुड़े आयोजन भी राजनीति से प्रेरित हैं.’ इस बहस के बहाने मुकेश विज ने राजनेताओं पर तंज किया है, ‘टीपू सुल्तान उतना बड़ा तानाशाह कभी नहीं हो सकता जितने हमारे आज के नेता हैं!’

इन दोनों घटनाक्रमों पर सोशल मीडिया में आई कुछ और प्रतिक्रियाएं :

सुभाष एन सुभाष | facebook/subhash.banik.37

इसका (जीएसटी काउंसिल के ताजा फैसले का) मतलब है कि जीएसटी में खामियां भरी हैं. जीएसटी काउंसिल के पास वस्तुओं की कीमतें बढ़ाने का अधिकार है. इस बात की कोई निश्चितता नहीं है कि गुजरात इलेक्शन के बाद कीमतें फिर नहीं बढ़ाई जाएंगी.

उजागीर यादव | facebook/ujagir.yadav

चार महीने में 40 बदलाव. मतलब बिना सोचे-समझे जीएसटी लागू किया गया था... यह वही नोटबंदी वाला किस्सा है.

हैरीटेज टाइम्स | @Heritage__Times

1792 : लॉर्ड कॉर्नवालिस टीपू सुल्तान के बंधक बेटों अब्दुल खलीक और मुइजिद्दीन (उम्र 10 और आठ साल) से बात करते हुए.

अनूप चठोथ | @anoopc

कर्नाटक में कांग्रेस सरकार जिस चमक-दमक के साथ टीपू सुल्तान का जन्मदिन मना रही है, खुद टीपू सुल्तान ने कभी अपना जन्मदिन इस तरह नहीं मनाया होगा. हालांकि टीपू को चुनाव और तुष्टिकरण की चिंता भी तो नहीं करनी थी.

रोफल क्रिटिक | @RoflCritic

भाजपा को प्रदूषण की नहीं, पद्मावती और टीपू सुल्तान की चिंता है.

अब्दुल कादिर जाफरी | @JafriQadir

अगर टीपू सुल्तान देशभक्त नहीं थे तो निश्चित रूप से झांसी की रानी समेत अंग्रेज़ों से लड़ते हुए मारे गए तमाम राजे-रजवाड़े देशभक्त नही थे.... असल में ये लोग सिर्फ अपना राजपाट बचाने के लिए लड़ रहे थे.