केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर में सभी पक्षों से बातचीत का सिलसिला फिर शुरू कराने में अमेरिका की भी भूमिका हो सकती है. द इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से जो खबर दी है उससे यह संकेत मिलता है.

अख़बार के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में बातचीत के लिए आईबी (ख़ुफ़िया ब्यूरो) के पूर्व प्रमुख दिनेश्वर शर्मा को वार्ताकार नियुक्त किए जाने से करीब एक महीने पहले अमेरिकी प्रतिनिधि कश्मीर के दौरे पर गए थे. उनकी यात्रा बीते 27 सितंबर को हुई थी. अमेरिकी प्रतिनिधियों में वॉशिंगटन में दक्षिण एवं मध्य एशियाई मामलों के ब्यूरो में राजनीतिक इकाई के प्रमुख जोशुआ गोल्डबर्ग और दिल्ली के अमेरिकी दूतावास में पदस्थ अधिकारी डेविड अरुलनांथम शामिल थे.

सूत्र बताते हैं कि ये दोनों अमेरिकी प्रतिनिधि कश्मीर में एक रात रुके थे. इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती की सरकार के तीन मंत्रियों से मुलाकात की. इसके अलावा दो पत्रकारों और मानवाधिकार मामलों के वकील परवेज़ इमरोज़ तथा खुर्रम परवेज़ से भी बातचीत की थी. बताया जाता है कि इन मुलाकातों के दौरान अमेरिकी प्रतिनिधियों ने घाटी के हालात का जायजा लिया और यह जानने की भी कोशिश की कि ‘माहौल बातचीत शुरू करने लायक है या नहीं.’

यही नहीं, अमेरिकी प्रतिनिधियों के कश्मीर दौरे से एक दिन पहले अमेरिका के रक्षा मंत्री जिम मैटिस (जेम्स नॉर्मन मैटिस) भी भारत के दौरे पर आए थे. हालांकि इस सिलसिले में जब अमेरिकी दूतावास ने अख़बार ने संपर्क किया तो वहां से कहा गया, ‘हमारे अधिकारी नियमित रूप से देश के विभिन्न हिस्सों में जाते हैं. वहां के हालात का जायजा लेते रहते हैं. सरकार और समाज के विभिन्न लोगों से मिलते हैं. लेकिन हम इन बैठकों की जानकारी सार्वजनिक नहीं करते.’