आम आदमी पार्टी के बड़े-बड़े नेता राज्यसभा जाने की जुगाड़ में जुटे हैं. जनवरी में दिल्ली की तीनों राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होगा. इस समय ये सीटें जनार्दन द्विवेदी, परवेज हाशमी और डॉक्टर करण सिंह के पास हैं. चूंकि दिल्ली विधानसभा में आम आदमी पार्टी के 66 विधायक हैं इस हिसाब से यहां की तीनों सीटें आम आदमी पार्टी को मिलनी तय हैं. लेकिन सुनी-सुनाई कुछ ऐसी है जो आम आदमी पार्टी के दिग्गज नेताओं के सपनों पर पानी फेर सकती है और कई लोगों को हुरी तरह से चौंका भी सकती है.

अरविंद केजरीवाल के बेहद करीबी एक पत्रकार की बातों पर यकीन करें तो राज्यसभा की तीन में से एक सीट किसी बड़े सलेब्रिटी को मिलेगी और वह खास व्यक्ति दक्षिण भारत का हो सकता है. इस व्यक्ति के जरिए आम आदमी पार्टी दक्षिण में अपना विस्तार करना चाहती है. केजरीवाल ने तमिल सुपरस्टार कमल हासन के नाम पर अपने कुछ खास लोगों से चर्चा भी की है. पिछली बार जब कमल हासन और केजरीवाल की लंबी मुलाकात हुई थी तो बताया जा ता है कि उस दौरान उन्होंने अपने लहजे में यह बात कमल हासन को बताई भी थी. कमल हासन तैयार हैं, बस केजरीवाल जल्दबाजी में ऐलान करना नहीं चाहते. केजरीवाल कमल हासन के अगले फैसले और पार्टी के नेताओं पर बारीकी से नज़र बनाए हुए हैं.

इसी सिलसिले में आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराज रामन से भी आम आदमी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने चर्चा की थी, लेकिन रघुराज रामन ने फिलहाल अमेरिका छोड़ने और दिल्ली में राजनीति करने से साफ इनकार कर दिया है. अब राज्यसभा की दूसरी सीट पार्टी के ही किसी नेता को दी जा सकती है. लेकिन इस सीट के लिए लड़ाई जबरदस्त है. अब कुमार विश्वास के करीबी भी ये मानकर चल रहे हैं कि उन्हें राज्यसभा सांसद नहीं बनाया जाएगा. इसलिए उन्होंने राजस्थान में मेहनत शुरू कर दी है और दिल्ली के कार्यक्रमों से खुद को अलग कर लिया है.

राज्यसभा की इस दूसरी सीट के लिए पार्टी के करीब दस नेता दावेदार हैं. लेकिन अभी रेस में सबसे आगे केजरीवाल के खासमखास संजय सिंह माने जा रहे हैं. अभी पार्टी में वे ही इकलौते ऐसे नेता हैं जो जब चाहे केजरीवाल के एक इशारे पर सांसद बनने के बाद भी कुर्सी छोड़ सकते हैं. आशुतोष, आशीष खेतान, पंकज गुप्ता, दिलीप पांडे जैसे नेताओं का सिर्फ नाम ही चल रहा है, इनके राज्यसभा जाने की उम्मीद बेहद कम है.

आखिरी और तीसरी सीट के लिए जिस शख्स का नाम पता चला है वह बेहद चौंकाने वाला है. सुनी-सुनाई है कि केजरीवाल खुद भी राज्यसभा जा सकते हैं. कहा जा रहा है कि केजरीवाल ने इस बाबत बस एक-दो लोगों से ही बातचीत की है. खबर है कि वे अब दिल्ली से आगे निकलकर संसद की सियासत करना चाहते हैं. दिल्ली की सरकार वे अब उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया के हवाले कर देना चाहते हैं. 2018 के जनवरी में होने वाले राज्यसभा चुनाव से बेहतर मौका केजरीवाल के पास नहीं है जब वे सीधे संसद पहुंच सकें. पिछली बार केजरीवाल ने वाराणसी से लोकसभा चुनाव लड़ा था और नरेंद्र मोदी से उन्हें शिकस्त मिली थी. अब वे लोकसभा चुनाव लड़ने का जोखिम नहीं उठाना चाहते. इसलिए अगर अगले साल केजरीवाल भी राज्यसभा में बैठे दिखाई दें तो इसमें कोई हैरानी की बात नहीं होगी.

आम आदमी पार्टी के ‘थिंक टैंक’ मानते हैं कि नीतीश कुमार के नरेंद्र मोदी से हाथ मिलाने के बाद सियासत में एक ऐसे नेता की जगह खाली है जो उत्तर भारतीय हो और कांग्रेस और भाजपा दोनों से समानांतर वैचारिक दूरी रखता हो. उन्हें फिलहाल भारत की सियासत में केजरीवाल के अलावा कोई और नहीं दिखता. ममता बनर्जी संसद के दोनों सदनों में केजरीवाल की पार्टी से ज्यादा ताकतवर हैं लेकिन वे उत्तर भारत की नेता नहीं मानी जाती.

आम आदमी पार्टी के एक नेता कहते हैं कि इस समय केजरीवाल नरेंद्र मोदी के प्रभाव से ज्यादा राहुल गांधी के बढ़ते कद से परेशान हैं. धीरे-धीरे राहुल गांधी विपक्ष के नेता की भूमिका में दिखने लगे हैं. उत्तर प्रदेश में चुनाव राहुल गांधी भी हारे और अखिलेश यादव भी, लेकिन वहां की हार का ज्यादा नुकसान अखिलेश को हुआ जबकि पंजाब में जीत से कांग्रेस को संजीवनी मिल गई. पंजाब की हार ने केजरीवाल को जोर का झटका दे दिया. देर से ही सही लेकिन राहुल की बातों का असर केंद्र सरकार पर होता है और केंद्र के मंत्री उनकी बातों का जवाब भी देते हैं जबकि केजरीवाल की बातों पर कोई प्रतिक्रिया तक नहीं देता. ऐसे हालात में केजरीवाल अब एक नए रोल की तलाश में लगे हुए हैं.