पुणे के सावित्रीबाई फुले विश्वविद्यालय ने अनोखा फ़रमान जारी किया है. इसके मुताबिक सिर्फ उन्हीं छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक दिया जाएगा जो शाकाहारी हैं और कोई नशा नहीं करते.

इंडिया टुडे के मुताबिक विश्वविद्यालय से संबद्ध सभी महाविद्यालयों को एक सर्कुलर जारी कर यह सूचना दी गई है. साल 2006 से विश्वविद्यालय ने स्नातकोत्तर परीक्षा में अव्वल विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक देने का सिलसिला शुरू किया था. इसमें एक साल विज्ञान और फिर अगले साल अन्य संकाय के छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक दिया जाता है. यह सिलसिला अदल-बदलकर बारी-बारी से चलता रहता है. इस क्रम में इस बार गैर-विज्ञान संकायों के बच्चों की बारी है.

ख़बर के मुताबिक स्वर्ण पदक योगमूर्ति राष्ट्रीय कीर्तनकार रामचंद्र गोपाल शेलार (शेलार मामा) और उनकी पत्नी त्यागूर्ति सरस्वती रामचंद्र शेलार के नाम पर उन्हीं के परिवार द्वारा स्थापित ट्रस्ट की ओर से दिए जाते हैं. हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि शाकाहारी छात्र-छात्राओं को ही स्वर्ण पदक देने संबंधी सर्कुलर कोई नई बात नहीं है. और न ही यह किसी को ऊपर खान-पान संबंधी किसी तरह की बंदिशें लगाने की कोशिश ही है.

विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार अरविंद शालिगराम कहते हैं, ‘सर्कुलर पुराना है. उसकी भाषा भी नई नहीं है. हम पुराने सर्कुलर में सिर्फ़ तारीख बदलकर उसे हर साल जारी करते हैं. स्वर्ण पदक के लिए जो नियम-शर्तें रखी गई हैं उससे विश्वविद्यालय का कोई लेना-देना नहीं है. ये शर्तें शेलार मामा ट्रस्ट की ओर से निर्धारित की गई हैं.’ हालांकि जैसा कि द इंडियन एक्सप्रेस ने ख़बर दी है कांग्रेस और शिवसेना इसे मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही हैं.