लगता है कि अब भारतीय जनता पार्टी ने भी मान लिया है कि वह गुजरात में मुश्किल लड़ाई में फंस चुकी है. शायद इसीलिए उसने अपनी पार्टी के नेताओं के साथ ही गठबंधन के अन्य नेताओं को भी विधानसभा चुनाव के प्रचार अभियान में उतार दिया है. और इसकी एक मिसाल हैं दलित नेता, केंद्रीय मंत्री और लाेकजनशक्ति पार्टी के प्रमुख रामविलास पासवान.

ख़बरों के मुताबिक पासवान गुजरात में भाजपा के स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल हैं और उनके कार्यक्रम शनिवार से ही शुरू हो चुके हैं. बताया जाता है कि प्रदेश के दलित बहुल इलाकों में खास तौर पर उनके सघन दौरों के कार्यक्रम बनाए गए हैं. वे इन इलाकों में कई रैलियों को संबोधित करने वाले हैं. साथ ही भाजपा प्रत्याशियों के लिए घर-घर जाकर वोट भी मांगेंगे. गुजरात गौरव संपर्क अभियान के तहत भाजपा हर घर तक पहुंचने की कोशिश में लगी हुई है.

यहां ध्यान दिला दें कि इससे पहले उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में दलितों की बड़ी आबादी होने के बावजूद भाजपा ने पासवान को चुनाव प्रचार में नहीं उतारा था. लेकिन इस बार गुजरात के जातीय समीकरण ऐसे उलझ गए हैं कि उसे वहां उनकी मदद लेनी पड़ रही है. भाजपा के विरोध में इन जातीय समीकरणों को उलझाने में सबसे बड़ी भूमिका तीन युवाओं- हार्दिक पटेल, जिग्नेश मेवानी और अल्पेश ठाकोर ने निभाई है.इनमें अल्पेश कांग्रेस में ही शामिल हो चुके हैं.

वहीं दूसरी तरफ हार्दिक और जिग्नेश कांग्रेस का समर्थन कर भाजपा को हराने के लिए कमर कस चुके हैं. हार्दिक जहां पटेलाें को गोलबंद कर रहे हैं वहीं अल्पेश अन्य पिछड़ा वर्गों और जिग्नेश दलितों काे लामबंद करने में जुटे है. यही कारण हैं कि इन तीनों की काट के लिए भाजपा को अपने और गठबंधन के सहयोगी नेताओं को भी प्रचार में लगाना पड़ रहा है.