बांग्लादेश के पहले हिंदू मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सुरेंद्र कुमार सिन्हा ने सरकार के साथ टकराव के चलते अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. हालांकि उन पर मनी लॉन्डरिंग और भ्रष्टाचार के आरोप भी थे. इन वजहों से वे पिछले एक महीने से छुट्टी पर आॅस्ट्रेलिया चले गए थे. अपनी छुट्टी खत्म होने के बाद उन्होंने वहीं से अपना इस्तीफा राष्ट्रपति अब्दुल हामिद को भेज दिया. राष्ट्रपति के प्रेस सचिव जैनुल आबेदिन ने शनिवार को जस्टिस सिन्हा के इस्तीफे की पुष्टि की और बताया कि राष्ट्रपति ने इसे मंजूर कर लिया है.

जस्टिस सिन्हा बांग्लादेश के पहले हिन्दू मुख्य न्यायाधीश थे. उन्होंने 17 जनवरी 2015 को अपने पद की शपथ ली थी. उनका कार्यकाल अगले साल 21 जनवरी तक का था. जस्टिस सिन्हा के छुट्टी पर जाने पर कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किए गए जस्टिस अब्दुल वहाब अब अगले आदेश तक इस पद पर काम करते रहेंगे. बांग्लादेश के संविधान के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ जज ही कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश बनते हैं.

इससे पहले जुलाई में जस्टिस सिन्हा के एक फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट और सरकार के बीच टकराव शुरू हो गया था. इस फैसले में देश की शीर्ष अदालत ने जजों के महाभियोग संबंधी संसद के अधिकारों को खत्म कर दिया था. सरकार द्वारा संविधान में किए गए इस 16वें संशोधन को रद्द करने के बाद जस्टिस सिन्हा बांग्लादेश की शेख हसीना सरकार के निशाने पर आ गए थे. इस मसले पर सरकार के रुख की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट न्यायपालिका का संरक्षक है, उसकी छवि की रक्षा करना उनका दायित्व है. बांग्लादेश सरकार ने 2014 में इस संशोधन को मंजूरी दी थी, जिसके तहत जजों को भी जांच के दायरे में लाया जा सकता था. इसके अनुसार जजों के दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ महाभियोग भी लाया जा सकता था.

हालांकि 16वें संशोधन को रद्द करने वाले फैसले के कुछ दिन बाद ही सुप्रीम कोर्ट के पांच अन्य वरिष्ठ जजों ने चीफ जस्टिस पर मनी लॉन्डरिंग और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे. इन जजों ने इन आरोपों के रहते मुख्य न्यायाधीश सिन्हा के साथ काम करने से इनकार कर दिया था.