बदले-बदले से सलमान नजर आते हैं, लेकिन क्यों?

कैसे सिर्फ एक फ्लॉप फिल्म सुपरस्टारों का नजरिया बदल देती है, इसका लेटेस्ट उदाहरण सलमान खान हैं. लगने वालों को लगा था कि सलमान भाई ‘बजरंगी भाईजान’ के बाद हमेशा के लिए हटके फिल्में करेंगे और स्क्रीन पर अपनी बढ़ती उम्र का खयाल भी रखेंगे. लेकिन जरूरत से ज्यादा हटके बनी ‘ट्यूबलाइट’– इतनी कि दर्शक ही उससे दूर हट गए - की असफलता ने उन्हें वापस अपने पुराने वाले रूप में ला दिया है. वापस से खालिस मसाला फिल्मों वाला वह सुपरस्टार बना दिया है जो सिर्फ बॉक्स-ऑफिस के आंकड़ों के हिसाब से फिल्मों का चयन करता है.

इसलिए यह समझने के लिए किसी नास्त्रेदमस की जरूरत नहीं है कि अब निकट भविष्य में सलमान खान प्रयोगधर्मी फिल्में व किरदार बिलकुल नहीं करेंगे. उनकी फिल्में सिर्फ बॉक्स-ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक सफलता हासिल करने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए ही बनाई जाएंगी और आज के वक्त में फटाफट ऐसा लक्ष्य हासिल करने के लिए धांसू एक्शन फिल्मों से बेहतर कुछ हो नहीं सकता!

यही वजह है कि जोर-शोर से सलमान खान ने ‘रेस 3’ की शूटिंग की शुरुआत कर दी है, जिसमें उनका किरदार जाहिर तौर पर सीटियां मिलने वाले एक्शन-हीरो का है. जिस फ्रेंचाइजी का हीरो अभी तक ग्रे शेड वाला रहा करता था, उसे सलमान की इमेज अनुसार बदलकर सुपर पॉजिटिव किया गया है और जैकलीन फर्नांडिस का साथ देकर ‘किक’ की यादों को भी जिंदा रखा गया है. सफल रही एक्शन-थ्रिलर फिल्म ‘किक’ का सीक्वल बनाने पर भी साथ ही काम चल रहा है और ऐसा होने से पहले सलमान ने अपनी अगली रिलीज होने वाली फिल्म को भी एक शुद्ध एक्शन फिल्म की तरह मार्केट करना शुरू कर दिया है.

कबीर खान निर्देशित ‘एक था टाइगर’ में जहां सलमान और कैटरीना के बीच का इश्क ही मुख्य कहानी थी, और ढेर सारा एक्शन होने के बावजूद फिल्म को प्रेम-कहानी कहकर ही प्रचारित किया गया था, वहीं इसके सीक्वेल ‘टाइगर जिंदा है’ के प्रमोशन में उस प्रेम-कहानी से ज्यादा फोकस सलमान को बतौर एक्शन-हीरो स्थापित करने में है. ट्रेलर में इसलिए सलमान और कैट की मोहब्बत वाला एक भी दृश्य शामिल नहीं है और खबर है कि ऐसा सलमान खान के कहने पर खासतौर पर किया गया है. क्योंकि भाई चाहते हैं कि उनके फैन्स सिर्फ हार्डकोर एक्शन सीन्स में उन्हें देखने के लिए थियटरों में आएं और मामूली इंसान बनकर जो भूल वे ‘ट्यूबलाइट’ में कर चुके हैं, उसके लिए उन्हें माफ कर दें!

क्यों महाराष्ट्र के एक नेता ने शाहरुख को खरी-खोटी सुनाई?

हाल ही में शाहरुख खान अलीबाग में अपना जन्मदिन मनाकर लौटे. इस दौरान मुंबई ही नहीं अलीबाग में भी उन्हें देखने के लिए प्रशंसकों का इतना जमावड़ा लग गया कि न सिर्फ भीड़ बेकाबू हो गई बल्कि इसी बेकाबू भीड़ के बीच फंसकर महाराष्ट्र के एक नेता आगबबूला हो गए. वह भी इतने ज्यादा कि शाहरुख की बोट से बोट सटाकर उन्हें जमकर खरी-खोटी सुनाई और उनका गुस्सा वहां मौजूद हर शख्स ने देखा. लेकिन बदकिस्मती यह रही कि यह सारा माजरा कैमरे में रिकॉर्ड हो गया और घटना के कई दिनों बाद पब्लिक हो गया!

बात तीन नवम्बर की है जब अपना जन्मदिन मनाने शाहरुख यॉट से अलीबाग पहुंचे ही थे. लेकिन वे फटाफट उतरकर अपने बंगले में नहीं जा पाए क्योंकि उन्हें समंदर किनारे पाकर प्रशंसकों की भीड़ लग गई. इसी दौरान अलीबाग के शेतकरी कामगार पार्टी के एमएलसी जयंत पाटिल मुंबई रवाना होने के लिए पोर्ट पर पहुंचे लेकिन प्रशंसकों की भीड़ और शाहरुख की यॉट खड़ी होने की वजह से अपनी नौका में नहीं चढ़ पाए. इस वजह से उन्हें पोर्ट से सटी खड़ी शाहरुख की यॉट पर चढ़कर उसे पारकर अपनी यॉट पर जाना पड़ा और इस बात पर जयंत साहब का गुस्सा फूट पड़ा. इस दौरान उनकी सहायता करने शाहरुख भी अपनी यॉट से बाहर नहीं निकले इसलिए गुस्से के फूटने की इंटेंसिटी भी ज्यादा थी और यह आप नीचे दिए वीडियो में देख भी सकते हैं.

अपनी यॉट पर पहुंचकर जयंत पाटिल रवाना होने की जगह वापस पलटे और शाहरुख को देखते हुए (जोकि अपनी यॉट में अंदर बैठे थे) मराठी में चिल्लाते हुए बोले, ‘क्या तुमने पूरा अलीबाग खरीद लिया है? बताओ मुझे तुमने पूरा अलीबाग खरीद लिया है क्या. सुन लो मेरी परमिशन के बिना तुम अलीबाग में घुस भी नहीं सकते हो.’

हालांकि इस दौरान शाहरुख चुपचाप अपनी यॉट में बैठे रहे और चंद पलों बाद सिक्योरिटी द्वारा रास्ता क्लीयर होने का संदेश आने के बाद ही बाहर आए. लेकिन अब सुना है कि पाटिल साहब इस मसले को विधानसभा में उठाने वाले हैं. क्योंकि उनके अनुसार हिंदी फिल्म स्टार्स अकसर गेटवे ऑफ इंडिया से समंदर के रास्ते अलीबाग आते-जाते रहते हैं और उनकी वीआईपी मूवमेंट की वजह से आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है! इसलिए अपनी आम परेशानी को खास बनाने के लिए वीआईपी पाटिल साहब नेतागिरी का जमकर सहारा लेने वाले हैं!


‘अब दर्शकों को इससे फर्क नहीं पड़ता कि आपने 200 करोड़ खर्च किए हैं या दो करोड़, उन्हें बस सार्थक सिनेमा चाहिए...अब फिल्में दिमाग से बनने लगी हैं, सिर्फ पैसे से नहीं. आप चाहे कपूर, खान या चोपड़ा क्यों न हों, अगर कहानी से दर्शकों का जुड़ाव नहीं है तो फिल्म नहीं चलेगी’

— संजय मिश्रा, फिल्म अभिनेता

फ्लैशबैक | जब तेजी बच्चन भी एक थप्पड़ से अमिताभ बच्चन को नहीं बचा पाईं

हमारी फिल्मों में कितनी मर्तबा होता है न, कि जब हीरो को करारा तमाचा पड़ने वाला होता है तो उसकी मां बीच में आ जाती है. हीरो बच जाता है और मां का ज्ञान पाकर तमाचा मारने की तैयारी करने वाला शख्स शर्मसार हो जाता है. ऐसा एक बार अमिताभ बच्चन के साथ असल जिंदगी में भी हुआ, लेकिन इस बार उनकी मां चाहकर भी उन्हें बचा नहीं पाईं!

बात तब की है जब अमिताभ बच्चन फिल्मों में नए आए थे और सुनील दत्त व वहीदा रहमान अभिनीत ‘रेशमा और शेरा’ (1971) की शूटिंग कर रहे थे. फिल्म में उनका किरदार सुनील दत्त के छोटे भाई छोटू का था जो कि गूंगा भी था. फिल्मों में नए होने की वजह से सेट पर उनके साथ अकसर उनकी मां तेजी बच्चन आया करती थीं और एक दिन जब वे सेट पर उपस्थित थीं तभी वह सीन शूट होना था जिसमें वहीदा रहमान को कसकर एक थप्पड़ अमिताभ को मारना था.

तेजी बच्चन को जैसे ही यह पता चला कि सीन की मांग अनुसार यह थप्पड़ करारा पड़ने वाला है, उन्होंने कई बार वहीदा रहमान से दरख्वास्त करना शुरू कर दी कि वे उनके बेटे को धीरे से मारें! वहीदा रहमान पशोपेश में पड़ गईं क्योंकि थप्पड़ अगर तेज नहीं पड़ा तो सीन प्रभावहीन रह जाएगा और तेज पड़ गया तो एक मां का दिल बैठ जाएगा.

इसलिए जल्द ही एक युक्ति निकाली गई और किसी बहाने से तेजी बच्चन को सेट से दूर किसी जगह पर भेज दिया गया. और फिर जल्दी-जल्दी में जोरदार थप्पड़ पड़ने वाला वो सीन शूट किया गया और लौटकर जब तेजी बच्चन ने पूछा तो सभी ने कहा कि बहुत हौले से थप्पड़ मारा था वहीदा जी ने अमिताभ को!