अमेरिका: चर्च में बंदूकधारी की अंधाधुंध गोलीबारी, 26 की मौत | सोमवार, 06 नवंबर 2017

बीते रविवार को अमेरिका में गोलीबारी की एक और घटना सामने आई. टेक्सास राज्य के एक चर्च में एक बंदूकधारी ने प्रार्थना सभा के दौरान लोगों पर गोलियां चला दीं. बीबीसीके मुताबिक़ इस घटना में 26 लोगों की मौत हो गई है और 20 से ज्यादा लोग घायल हुए. हालांकि, पुलिस ने हमलावर को घटनास्थल पर ही मार गिराया. ख़बर के मुताबिक़ यह वारदात सदरलैंड स्प्रिंग्स के विलसन काउंटी स्थित फ़र्स्ट बैप्टिस्ट चर्च में हुई. हमलावर सुबह 11.30 बजे चर्च में घुसा और गोलीबारी शुरू कर दी. प्रांत के गवर्नर ग्रेग एबॉट ने इस घटना को टेक्सास के इतिहास की सबसे भयावह गोलीबारी बताया है.

भ्रष्टाचार पर सऊदी अरब की यह कार्रवाई भारत के लिए भी एक मिसाल हो सकती है | मंगलवार, 07 नवंबर 2017

सऊदी अरब में भ्रष्टाचार के मामलों में अब तक की संभवत: सबसे बड़ी कार्रवाई की गई है. इसके तहत एक दर्जन से ज्यादा दिग्गजों को एक ही झटके में जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया गया है. और यह कार्रवाई भी ऐसे समय में हुई जब पनामा और पैराडाइज़ पेपर्स जैसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं. इन मामलों में भारत सहित कई देशों के हजारों उन दिग्गजों के नामों का ख़ुलासा हो रहा है जिन्होंने काला धन अपने देश की सीमाओं के बाहर जमा कर रखा है. इसीलिए सऊदी अरब की यह कार्रवाई भारत के लिए भी मिसाल साबित हो सकती है.

सऊदी अरब के सरकारी टीवी चैनल अल-अरेबिया के हवाले से द हिंदू ने बताया कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस (राजा के बाद दूसरा सबसे शक्तिशाली पद) मोहम्मद बिन सलमान के आदेश पर कई बड़ी हस्तियों को ग़िरफ़्तार किया गया है. इनमें शाही परिवार के 11 राजकुमार शामिल हैं. उनके अलावा चार मौज़ूदा मंत्री, 12 से ज्यादा पूर्व मंत्री और कई बड़े कारोबारी हैं. हालांकि सरकार की ओर से रविवार को ग़िरफ़्तार किए गए सिर्फ 14 लोगों की सूची ही अधिकृत तौर पर जारी की गई. साथ में यह भी बताया गया कि सऊदी नेशनल गार्ड, नौसेना प्रमुख और आर्थिक मामलों के मंत्री को भी उनके पदों से हटा दिया गया है. सऊदी अरब में ये पद शाही परिवार के किसी न किसी सदस्य के पास ही होते हैं.

रूसी क्रांति के सौ साल पूरे होने पर पुतिन की बेरुखी, किसी कार्यक्रम में भाग नहीं लिया| बुधवार, 08 नवंबर 2017

मंगलवार को रूसी क्रांति के ठीक सौ साल पूरे हो गए. इस मौके को पूरे विश्व के कम्युनिस्ट विचारक गर्मजोशी से याद कर रहे हैं लेकिन रूसी सरकार इसे लेकर उदासीन बनी रही. वहां के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने तो इस अवसर पर आयोजित किसी भी कार्यक्रम में भाग नहीं लिया. पुतिन के प्रवक्ता ने बताया कि राष्ट्रपति के लिए आज का दिन सामान्य कामकाज का ही दिन रहा और वे अपनी पूर्व निर्धारित बैठकों में व्यस्त रहे. रूसी खुफिया एजेंसी केजीबी के पूर्व एजेंट पुतिन 1991 तक कम्युनिस्ट पार्टी के नेता रहे हैं, पर उसके विघटन के बाद उन्होंने उससे दूरी बना ली. जानकारों के अनुसार वे रूस के विघटन के लिए कम्युनिस्ट पार्टी को जिम्मेदार मानते रहे हैं.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार आज राजधानी मॉस्को के ऐतिहासिक लाल चौक पर सैन्य परेड का आयोजन किया गया लेकिन राष्ट्रपति ने इसमें शिरकत नहीं की. समारोह का सरकारी टेलीविजन पर सीधा प्रसारण तक नहीं हुआ. वहीं इस परेड में 1917 के ऐतिहासिक बोल्शेविक क्रांति के बजाय द्वितीय विश्वयुद्ध में सोवियत रूस की भागीदारी का जश्न मनाने पर ज्यादा जोर रहा. ​दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान 1941 में सोवियत सेना ने आज ही के दिन युद्धग्रस्त इलाके की ओर कूच किया था.

डोनाल्ड ट्रंप की उत्तर कोरिया को सीधी चेतावनी, कहा- अमेरिका को आजमाने की कोशिश न करे | गुरुवार, 09 नवंबर 2017

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण कोरिया में नेशनल असेंबली को संबोधित करते हुए उत्तर कोरिया को सीधी चेतावनी दी है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसारउत्तर कोरिया की तरफ से अमेरिका और उसके सहयोगियों को निशाना बनाने के खतरे पर उन्होंने कहा, ‘अमेरिकी प्रशासन को पहले जैसा समझना बड़ी भूल होगी. अब वहां पहले से अलग प्रशासन है. हमें कम करके न आंकें. हमें अाजमाने की भी कोशिश न करें.’

अमेरिकी राष्ट्रपति ने उत्तर कोरिया के तानाशाह शासक किम जोंग-उन से अपना परमाणु हथियार कार्यक्रम बंद करने की भी अपील की. उन्होंने कहा कि इस अंधेरे रास्ते पर हर कदम के साथ उत्तर कोरिया के लिए जोखिम बढ़ता जाएगा. डोनाल्ड ट्रंप ने परमाणु हथियार कार्यक्रम बंद करने पर उत्तर कोरिया की मदद करने का भी प्रस्ताव रखा. उन्होंने यह भी कहा, ‘हम न तो डरेंगे और न ही इतिहास के भीषण अत्याचारों को यहां दोहराने देंगे. इसी आधार पर हम अपनी सुरक्षा के लिए संघर्ष करेंगे.’

इस शहर पर इराकी सेना के कब्जे के साथ आईएस की सत्ता का आखिरी गढ़ ढह जाएगा | शुक्रवार, 10 नवंबर 2017

इराकी सेना ने आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) को उसके आखिरी ठिकाने से खदेड़ने का अभियान शुरू कर दिया है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार सेना ने आईएस के नियंत्रण वाले आखिरी इराकी शहर रावा पर कब्जा जमाने की लड़ाई छेड़ दी है. इस शहर पर इराकी सेना के कब्जे के साथ आईएस के कथित खलीफा शासन का युग समाप्त हो जाएगा. आईएस ने 2014 में इराक और सीरिया के बड़े हिस्से पर खलीफा के शासन का दावा किया था.

इराक में आईएस के कथित खलीफा शासन को कुचलने का अभियान अपने अंतिम दौर में है. इराक ने रावा शहर और सीरिया की सीमा तक के इलाके पर कब्जा करने के लिए सेना की दो पैदल टुकड़ियों के अलावा सुन्नी ट्राइबल फोर्सेज को लगाया है. रिपोर्ट के मुताबिक इराक के संयुक्त अभियान कमान ने यह जानकारी दी है. बीते हफ्ते इराकी सेना ने अल-क़ैम शहर को आईएस के कब्जे से मुक्त कराया था. इसके बाद इराक के प्रधानमंत्री हैदर अल-आब्दी ने इसे रिकॉर्ड समय में मिली सफलता करार दिया था.

बांग्लादेश के पहले हिंदू मुख्य न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार सिन्हा का इस्तीफा | शनिवार, 11 नवंबर 2017

बांग्लादेश के पहले हिंदू मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सुरेंद्र कुमार सिन्हा ने सरकार के साथ टकराव के चलते अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. हालांकि उन पर मनी लॉन्डरिंग और भ्रष्टाचार के आरोप भी थे. इन वजहों से वे पिछले एक महीने से छुट्टी पर आॅस्ट्रेलिया चले गए थे. अपनी छुट्टी खत्म होने के बाद उन्होंने वहीं से अपना इस्तीफा राष्ट्रपति अब्दुल हामिद को भेज दिया. राष्ट्रपति के प्रेस सचिव जैनुल आबेदिन ने शनिवार को जस्टिस सिन्हा के इस्तीफे की पुष्टि की और बताया कि राष्ट्रपति ने इसे मंजूर कर लिया है.

जस्टिस सिन्हा बांग्लादेश के पहले हिन्दू मुख्य न्यायाधीश थे. उन्होंने 17 जनवरी 2015 को अपने पद की शपथ ली थी. उनका कार्यकाल अगले साल 21 जनवरी तक का था. जस्टिस सिन्हा के छुट्टी पर जाने पर कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किए गए जस्टिस अब्दुल वहाब अब अगले आदेश तक इस पद पर काम करते रहेंगे. बांग्लादेश के संविधान के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ जज ही कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश बनते हैं. इससे पहले जुलाई में जस्टिस सिन्हा के उस फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट और सरकार के बीच टकराव शुरू हो गया था जिसमें उन्होंने जजों के महाभियोग संबंधी संसद के अधिकारों को खत्म कर दिया था.