फेसबुक लोगों से उनकी ‘न्यूड’ तस्वीरें मांग रहा है. पहली नजर में यह बात किसी को भी बहुत अजीब लग सकती है लेकिन, ऐसा करने के पीछे भी एक नेक मकसद ही है. पिछले दिनों ऑस्ट्रेलिया में फेसबुक ने लोगों से अपनी नग्न तस्वीरें और वीडियो उसे भेजने के लिए कहा है. इसका मकसद इन तस्वीरों को भविष्य में वायरल होने से बचाना है.

ऑस्ट्रेलियाई मीडिया के मुताबिक हाल ही में फेसबुक ने सरकार की सहमति के बाद एक नए फीचर की टेस्टिंग शुरू की है. इसके तहत लोगों से कहा गया है कि अगर उन्हें ऐसा लगता है कि उनका पूर्व पार्टनर उनकी अंतरंग तस्वीरों को सोशल मीडिया पर अपलोड कर सकता है तो कृपया ऐसी तस्वीरें फेसबुक को भेज दें ताकि, उन्हें भविष्य में अपलोड होते ही ब्लॉक किया जा सके.

ऑस्ट्रेलिया की ई-सुरक्षा आयुक्त जूली ग्रांट ने इसकी कार्य प्रणाली के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि लोगों के फोटो मिलते ही फेसबुक का सॉफ्टवेयर इस फोटो की विशेष पहचान या आईडी तैयार कर देगा. इसके बाद जब भी कोई यूजर इस फोटो को फेसबुक पर अपलोड करेगा तो वह फोटो स्वतः ही ब्लॉक हो जाएगा. जूली ग्रांट ने लोगों को आश्वस्त करते हुए यह भी कहा है कि सोशल मीडिया साइट यूजर के भेजे गए फोटो को अपने डेटाबेस में स्टोर नहीं करेगी बल्कि, फोटो को विशेष पहचान देने के बाद तुरंत ही डिलीट कर दिया जाएगा.

पेटेंट विवाद में सैमसंग एपल को 780 करोड़ रुपये देगा

एपल के साथ पेटेंट विवाद में सैमसंग को बड़ा झटका लगा है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार सोमवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के खिलाफ सैमसंग की अपील को खारिज कर दिया. निचली अदालत ने सैमसंग से स्लाइड टु अनलॉक, ऑटोकरेक्ट और क्विक लिंक्स जैसे फीचर्स के पेटेंट उल्लंघन के लिए एपल को 12 करोड़ डॉलर (लगभग 780 करोड़ रुपये) देने का आदेश दिया था.

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने स्मार्टफोन बनाने वाली दुनिया की शीर्ष कंपनियों के मामले में दखल देने से इनकार कर दिया और 2016 के अपीलीय अदालत के फैसले को बरकरार रखा. इस आदेश में निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया था, जिसमें दक्षिण कोरिया की कंपनी सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स को एपल इंक के कई पेटेंट का उल्लंघन का दोषी माना गया था. उधर, सैमसंग ने अपनी अपील में पेटेंट अदालत के जज पर फैसले की समीक्षा के दौरान कानूनी प्रक्रिया का पालन न करने का आरोप लगाया था. उसने यह भी आरोप लगाया कि जज ने बगैर सुनवाई या अन्य कानूनी दस्तावेजों को देखे ही आदेश पारित कर दिया. वहीं, एपल ने दलील दी कि सैमसंग की अपील में कुछ भी गौर करने लायक नहीं है.

हालांकि, सैमसंग को इससे पहले एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल चुकी है. पिछले साल दिसंबर में अदालत ने एपल के आईफोन की डिजाइन को कॉपी करने के मामले में सैंमसंग पर 39.9 करोड़ डॉलर (2,594 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाने वाले फैसले को पलट दिया था.

ट्विटर ने ट्वीट की कैरेक्टर लिमिट बढ़ाई

ट्विटर ने अपने यूजर्स को ट्वीट लिखने के लिए पहले से दोगुनी आजादी दे दी है. कंपनी ने लोगों की परेशानियां समझते हुए ट्वीट लिखने की सीमा 140 अक्षरों (कैरक्टर्स) से बढ़ाकर 280 कर दी है. इस बारे में ट्विटर की ओर से कहा गया है, ‘अब आप एक ट्वीट में अपनी भावनाओं को ज्यादा आसानी से और तेजी से व्यक्त कर सकते हैं...देखा गया है कि अंग्रेजी भाषा में नौ फीसदी ट्वीटस को 140 कैरक्टर की सीमा के अंदर लिखने में समस्याओं का सामना करना पड़ता है. यूजर्स का काफी समय ट्वीट को एडिट कर छोटा करने में खराब हो जाता है. लेकिन अब इससे निजात मिलने की उम्मीद है.’

हालांकि, ट्विटर ने चीनी, जापानी और कोरियाई भाषा में ट्वीटस लिखने वाले लोगों के लिए अक्षरों की सीमा नहीं बढ़ाई है क्योंकि इन भाषाओं में लिखने के लिए काफी कम अक्षरों की जरूरत होती है.

ट्विटर ने कैरेक्टर संख्या बढ़ाने के साथ ही कई और बदलाव भी किए हैं. इनके तहत ‘मल्टी पार्ट ट्वीट’ और ‘टेक्स्ट ब्लॉक’ के स्क्रीनशॉट को भी अब ट्वीट में शामिल किया जा सकता है. इसके अलावा पहले ट्वीट लिखते समय कैरक्टर्स की बची हुई संख्या दिखती रहती थी, लेकिन अब इसकी जगह एक सर्किल बन कर आता है जो ट्वीट लिखने के साथ-साथ डार्क होता चला जाता है. जब 280 कैरक्टर पूरे हो जाते हैं तो पूरा सर्किल डार्क हो जाता है.

इससे पहले बीते सितम्बर में कंपनी ने बताया था कि उसने ट्वीट के लिए तय अक्षरों की सीमा को बढाकर 280 कर दिया है जिसका छोटे-छोटे समूहों में परीक्षण किया जा रहा है. उसका कहना था कि अगर यह परीक्षण सफल रहा तो साल के अंत तक इस नए फीचर को बाकी यूजर्स के लिए भी लॉन्च कर दिया जाएगा.