ब्रिटिश प्रधानमंत्री थेरेसा मे की कुर्सी को ख़तरा पैदा हो गया है. द एशियन एज़ के मुताबिक उनकी पार्टी के 40 सांसद उनके ख़िलाफ़ बग़ावत करने की तैयारी कर रहे हैं.

अख़बार ने संडे टाइम्स के हवाले से बताया है कि कंज़रवेटिव पार्टी के असंतुष्ट सांसद एक पत्र पर दस्तख़त कर रहे हैं. इसमें थेरेसा के नेतृत्व पर अविश्वास जताया जा रहा है. साथ ही नेतृत्व परिवर्तन की मांग की जा रही है. हालांकि यह मांग पूरी होने की संभावना तभी बनेगी जब नियमानुसार असंतुष्ट सांसदों की संख्या 48 हो जाएगी. ख़बरों की मानें तो प्रधानमंत्री थेरेसा के सामने यह स्थिति उनकी पार्टी के दो बड़े मंत्रियों के इस्तीफ़े के बाद बनी है.

अभी हाल में ब्रिटिश सरकार में अंतर्राष्ट्रीय मामलों की मंत्री भारतीय मूल की नागरिक प्रीति पटेल ने इस्तीफ़ा दिया है. उन पर इजरायली अधिकारियों के साथ अनधिकृत तौर पर बैठकें करने का आरोप था. उनसे पहले रक्षा मंत्री माइकल फालन ने इस्तीफ़ा दिया था. उन पर यौन दुराचरण के आरोप थे जिन्हें उन्होंने स्वीकार भी किया था. इनके अलावा विदेश मंत्री बोरिस जॉनसन और उनके डिप्टी डेमियन ग्रीन पर लगातार इस्तीफ़े का दबाव बना हुआ है.

इनमें ग्रीन पर भी यौन दुराचरण का आरोप है. जबकि जॉनसन पर आरोप है कि उन्होंने संसद के निचले सदन हाउस ऑफ कॉमन्स की कमेटी में ग़लतबयानी कर ब्रिटिश-ईरानी नागरिक की जान ख़तरे में डाली. यह नागरिक ईरान की राजधानी तेहरान की जेल में बंद है. इन तमाम आरोपों के बाद सत्ताधारी दल के सांसदों में धारणा बनी है कि थेरेसा एक कमजोर नेता हैं. वे आरोपों का सामना कर रहे नेताओं पर सख़्त कार्रवाई नहीं कर पा रही हैं.

ख़बरों की मानें तो सासंदों के अविश्वास के पीछे यूरोपीय संघ (ईयू) से ब्रिटेन के अलग होने (ब्रेक्जिट) का भी एक मसला है.
बताया जाता है कि ईयू के वार्ताकारों ने ब्रिटिश सरकार को ब्रेक्जिट विधेयक पर जवाब देने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है. द गार्जियन के मुताबिक इस विधेयक में ब्रेक्जिट के दौरान और उसके बाद दोनों पक्षों द्वारा उठाई जाने वाली वित्तीय जिम्मेदारियों का उल्लेख है. कहा जा रहा है कि इस मसले पर बातचीत का अगला दौर अब दिसंबर के मध्य तक शुरू होगा. जबकि प्राथमिक समझौता दिसंबर के बजाए अब अगले साल मार्च तक हो सकेगा.