सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में लगातार बेकाबू चल रहे वायु प्रदूषण पर चिंता जताई है. अदालत ने इसे रोकने के प्रयासों पर केंद्र के साथ-साथ दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारों से जवाब मांगा है. सुप्रीम कोर्ट ने इस वायु प्रदूषण की तुलना आपातकालीन परिस्थितियों से की है. शीर्ष अदालत ने अधिवक्ता आरके कपूर की याचिका पर यह नोटिस जारी किया है. इस याचिका में फसलों के अवशेष को जलाने और निर्माण कार्यों से धूल पैदा होने वाली धूल को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की गई है.

उधर, वायु प्रदूषण के लगातार ऊंचे स्तर को देखते हुए दिल्ली सरकार ने सोमवार को ऑड-ईवन योजना को लेकर नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (एनजीटी) का दरवाजा खटखटाया है. सरकार ने एनजीटी से 11 नवंबर के अपने फैसले में बदलाव करके महिलाओं, दोपहिया वाहनों और सरकारी गाड़ियों को ऑड-ईवन योजना से बाहर रखने की इजाजत देने मांग की है. इस पर मंगलवार को सुनवाई होने की उम्मीद है. शनिवार को एनजीटी ने इस छूट के बगैर ऑड-ईवन योजना को लागू करने की इजाजत दी थी. हालांकि, दिल्ली सरकार इसे लागू करने से पीछे हट गई थी. इसे 13 नवंबर से लागू किया जाना था.

इस बीच दिल्ली में लगभग एक हफ्ते से वायु प्रदूषण की स्थिति गंभीर बनी हुई है. बीते हफ्ते के आखिरी दिनों में वायु गुणवत्ता सूचकांक में कुछ सुधार के बाद सोमवार को स्थिति दोबारा गंभीर हो गई. दिल्ली के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 500 अंक से ज्यादा रहा. वायु गुणवत्ता सूचकांक में 50 तक का अंक ‘अच्छा’, 100 तक का अंक ‘संतोषजनक’ और 400-500 तक के अंक को ‘गंभीर’ माना जाता है. इसका मतलब होता है कि हवा खतरनाक स्तर तक प्रदूषक तत्वों से भरी है.