विधानसभा चुनावों के मद्देनजर गुजरात में सियासी पारा तेजी से चढ़ता जा रहा है. सत्ताधारी भाजपा और कांग्रेस लगातार एक-दूसरे को कई मुद्दों पर घेरने की कोशिश में लगी हुई हैं. बीती 22 अक्टूबर को भाजपा के स्टार प्रचारक नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, ‘चुनाव हमारे लिए विकासवाद की जंग है, उनके लिए वंशवाद की जंग है. कांग्रेस पार्टी विकास के मुद्दे पर लगातार भागती रहती है. मेरी इच्छा है कि कभी कांग्रेस पार्टी विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़े.’

उधर, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी रोजगार सहित कई मुद्दों पर भाजपा पर हमलावर दिखे हैं. बीती एक नवंबर को उनका कहना था, ‘चीन में हर रोज 50,000 नौकरियां पैदा होती हैं और भारत में केवल 450. मेक इन इंडिया के बावजूद यह स्थिति है.’ राहुल गांधी ने आगे कहा, ‘किसान और गरीब को पानी नहीं मिलता, पूरा पानी चंद अमीरों को दिया जाता है. इसके अलावा वे नोटबंदी और जीएसटी से छोटे और मध्यम किस्म के कारोबारियों को होने वाली परेशानियों को लेकर भाजपा पर निशाना साधते रहे हैं.’

इस बीच, एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने जनवरी से अप्रैल, 2017 के दौरान देश के 527 संसदीय क्षेत्रों में 2,70,000 लोगों के बीच एक सर्वे किया है. इसमें चुनाव से जुड़े कई मुद्दों पर मतदाताओं का मन टटोलने की कोशिश की गई है. एडीआर ने इस सर्वे के आधार पर गुजरात को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है.

इस रिपोर्ट में गुजरात के मतदाताओं ने 30 मुद्दों में से रोजगार, सार्वजनिक परिवहन सेवा, महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा को सबसे ऊपर रखा है. इसके अलावा 73 फीसदी मतदाताओं का मानना है कि आपराधिक मामलों का सामना कर रहे उम्मीदवार को वोट नहीं देना चाहिए.

राज्य के 8.72 फीसदी मतदाताओं ने कहा है कि उनके लिए चुनावी मुद्दों में रोजगार के बेहतर मौके पहले पायदान पर है. अच्छी सार्वजनिक सेवा 7.65, महिला सशक्तिकरण 7.6 और महिला सुरक्षा 7.41 फीसदी लोगों के लिए सबसे ऊपर है. इनके अलावा सांसदों की विश्वसनीयता, पर्यावरण से जुड़े मुद्दे, बिजली आपूर्ति, बेहतर सड़कें, पेयजल और कानून व्यवस्था भी लोगों के लिए शीर्ष मुद्दों में शामिल हैं.

गुजरात के मतदाताओं के लिए मुख्य चुनावी मुद्दे | साभार : एडीआर
गुजरात के मतदाताओं के लिए मुख्य चुनावी मुद्दे | साभार : एडीआर

राज्य के गांवों में रहने वाले मतदाताओं की बात करें तो इनके लिए भी रोजगार (8.61 फीसदी), फसलों की उचित कीमत (8.58 फीसदी) और सार्वजनिक परिवहन की बेहतर सुविधा सबसे अहम मुद्दा है. इनके अलावा खेती के लिए बिजली (6.69 फीसदी) और सिंचाई सुविधा (6.65 फीसदी) भी शीर्ष-10 मुद्दों में शामिल हैं.

गुजरात में गांव के मतदाताओं के लिए मुख्य चुनावी मुद्दे | साभार : एडीआर
गुजरात में गांव के मतदाताओं के लिए मुख्य चुनावी मुद्दे | साभार : एडीआर

उधर, करीब नौ फीसदी शहरी मतदाताओं के लिए भी रोजगार का मुद्दा ही सबसे ऊपर है. हालांकि, इसके बाद 8.54 फीसदी ने सड़कों पर पैदल और साइकिल से चलने के लिए अलग लेन बनाए जाने को प्राथमिक चुनावी मुद्दा बताया है. इनके अलावा सड़कों पर जाम से मुक्ति (7.64 फीसदी), महिला सुरक्षा (7.36 फीसदी) और नौकरियों के लिए प्रशिक्षण (6.71 फीसदी) प्रमुख चुनावी मुद्दों में शामिल हैं.

शहरी मतदाताओं के लिए मुख्य चुनावी मुद्दे | साभार : एडीआर
शहरी मतदाताओं के लिए मुख्य चुनावी मुद्दे | साभार : एडीआर

चुनावी मुद्दों से आगे वोटिंग पैटर्न की बात करें तो सूबे के 8.27 फीसदी मतदाता जाति और धर्म के आधार पर अपना प्रतिनिधि चुनते हैं. इसके बाद 8.27 फीसदी मतदाता पार्टी विशेष प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को देखकर और 5.77 फीसदी उन्हें मिले ‘उपहारों’ के आधार पर ही वोट देते हैं. सर्वे में यह बात सामने आई है कि केवल 4.58 फीसदी वोटर ही उम्मीदवार को देखकर मताधिकार का इस्तेमाल करते हैं.

राज्य के मतदाताओं का वोटिंग पैटर्न और व्यवहार | साभार : एडीआर
राज्य के मतदाताओं का वोटिंग पैटर्न और व्यवहार | साभार : एडीआर

दूसरी ओर, 28 मतदाताओं ने माना है उन्हें इसकी जानकारी है कि ‘गिफ्ट’ लेना गैर-कानूनी है. इसके अलावा 60 फीसदी से अधिक का कहना था कि चुनाव के दौरान उम्मीदवार मतदाताओं के बीच ‘गिफ्ट’ बांटते हैं.