देश में खुदरा महंगाई दर (सीपीआई) का बढ़ना लगातार पांचवें महीने जारी है. अक्टूबर में यह बढ़ते-बढ़ते सात महीने के सबसे उच्च स्तर 3.58 फीसदी तक पहुंच गई. इससे पहले इस साल मार्च में यह 3.89 फीसदी के स्तर पर थी. वहीं सितंबर में यह 3.28 फीसदी थी. महंगाई के इस आंकड़े से आरबीआई के लिए इसे चार फीसदी के दायरे में रखने की चुनौती और कठिन हो गई है.

सोमवार को केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार खुदरा महंगाई दर में बढ़ोतरी का कारण अक्टूबर में सब्जियों के साथ अंडे और दूध के दाम में तेजी आना रहा. हालांकि इस दौरान दाल और फल थोड़े सस्ते हुए. सितंबर में सब्जियों के मूल्य में वृद्धि दर जहां चार फीसदी के लगभग थी, वहीं अक्टूबर में यह 7.5 फीसदी हो गई. सीएसओ के अनुसार इस वजह से अक्टूबर में केवल खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर सितंबर के 1.25 फीसदी से बढ़कर 1.9 फीसदी हो गई. दूसरी ओर ईंधन और आवासीय सेक्टर में भी अक्टूबर में ज्यादा महंगाई दर्ज की गई.

आज जारी हुए इन आंकड़ों के साथ ही निगाहें अब अगले महीने (पांच और छह दिसंबर को) होने वाली भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक पर चली गई हैं. लेकिन खुदरा महंगाई के इन आंकड़ों को देखते हुए जानकारों को लगता है कि अगली बैठक में भी ब्याज दरें कम नहीं होंगी. वह इसलिए भी कि मौजूदा हालात में खुदरा महंगाई अभी और बढ़ने की आशंका है.