गुजरात चुनाव में एक महीने से भी कम वक्त बचा है. कांग्रेस और भाजपा दोनों ने पूरे गुजरात में अलग-अलग एजेंसी से आंतरिक सर्वे करवाया. कांग्रेस का सर्वे जानकर गुजरात के कांग्रेसी नेता बेहद खुश हैं. पहली बार इस तरह का कोई सर्वे बताता है कि पार्टी अगर मजबूती से चुनाव लड़ी तो 90 सीटें भी जीत सकती है. वहीं भाजपा का आंतरिक सर्वे कहता है कि अगर भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी तब भी 120 से ज्यादा सीटें नहीं जीत पाएगी जबकि लक्ष्य 150 का रखा गया है. गुजरात भाजपा के एक बड़े नेता ने कुछ पत्रकारों को अहमदाबाद में बुलाया था. उनसे भी ज़मीनी हकीकत की रिपोर्ट ली गई है. टेलीविजन चैनलों पर दिखाए गए ओपिनियन पोल से ज्यादा भरोसा भाजपा को अपनी इस ग्राउंड रिपोर्ट पर है.

सुनी-सुनाई से कुछ ज्यादा है कि इस आधार पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने तीन मोर्चों पर गुजरात चुनाव की तैयारी की है. दिल्ली से हर हफ्ते केंद्रीय मंत्रियों को गुजरात के अलग-अलग इलाके में भेजा जाएगा. ये मंत्री रैली करने के बजाय हर शहर में लोगों से सीधे मिलेंगे. बड़े-बड़े मंत्री छोटे-छोटे शहरों में जाकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे. मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, सूचना प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण को पहले राउंड में भेजा गया था. गुजरात चुनाव में अमित शाह के ‘इलेक्शन मैनेजमेंट’ का यह पहला हिस्सा है जो अगले कुछ हफ्तों तक जारी रहेगा.

दूसरे मोर्चे की तैयारी के तहत अमित शाह ने गुजरात के हर जिले के भाजपा अध्यक्ष और प्रखंड अध्यक्ष से सीधा संपर्क कर रहे हैं. अहमदाबाद में भाजपा कार्यालय में एक ‘वॉर रूम’ तैयार किया गया है जो गुजरात के हर शहर से सीधे संपर्क में रहता है. गुजरात के प्रदेश स्तर के एक भाजपा नेता बताते हैं कि चुनाव मुश्किल है इसलिए तैयारी माइक्रो और मैक्रो दोनों लेवल पर चल रही है. मैक्रो लेवल पर प्रदेश और केंद्रीय स्तर के नेता प्रचार करेंगे. लेकिन असली रणनीति माइक्रो लेवल पर बनाई गई है. गुजरात में कांग्रेस का संगठन कमजोर है, इसलिए भाजपा अपने संगठन की ताकत के जरिए कांग्रेस को हराएगी.

सुनी-सुनाई है कि नवंबर के महीने में भाजपा नेतृत्व ने गुजरात के गांव-गांव में ‘पन्ना प्रमुख’ की नियुक्ति कर दी है. ‘पन्ना प्रमुख’ की कल्पना अमित शाह की है, लेकिन इसे पहली बार इस बड़े पैमाने पर लागू किया जा रहा है. ‘पन्ना प्रमुख’ मतलब एक व्यक्ति को वोटर लिस्ट के एक पन्ने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, ये उस खास व्यक्ति की जिम्मेदारी होगी कि वह उस पन्ने पर दर्ज 20-25 वोटरों को कैसे भाजपा के पाले में खींचता है और फिर चुनाव के दिन उन सभी को बूथ तक पहुंचाता है.‘ अगर पन्ना प्रमुख’ को किसी भी तरह की समस्या आती है तो वह बूथ इंचार्ज से संपर्क कर सकता है.

गुजरात के कुछ पत्रकारों को इस मैनेजमेंट की कुछ बारीक बातें पता चली है, एक पत्रकार ने बताया, ‘हर जिले के लिए एक अलग से शक्ति सेंटर यानी पॉवर रूम बनाया जा रहा है. यहां जिले के प्रभावशाली भाजपा नेता बैठेंगे जो हर तरह से संपन्न होंगे. यह पॉवर सेंटर किसी भी तरह की समस्या को पल में निपटाएगा. अफसरों से बात करनी हो या संसाधनों की कमी हो, हर बात का उपाय इस पॉवर सेंटर से मिलेगा. इस बार गुजरात चुनाव जीतने का यही सबसे नया प्रयोग है.’

इस बार कांग्रेस ने भी संसाधनों की कोई कमी नहीं की है. राहुल गांधी पहले ही करीब-करीब हर इलाके में एक रैली कर चुके हैं. 24 अकबर रोड की खबर रखने वाले बताते हैं कि पहली बार कांग्रेस के दफ्तर में ऐसी तैयारी और गर्मजोशी दिख रही है. संगठन कमजोर है लेकिन प्रचार बहुत आक्रामक है. जीएसटी की दरों में भारी रियायत सरकार ने दी, लेकिन इससे कांग्रेस के नेता ज्यादा खुश हुए क्योंकि उन्हें लगता है राहुल गांधी जो बातें उठाते हैं मोदी सरकार देर-सबेर उन्हें मानती है. यही बात वे जनता को भी समझाना चाहते हैं.

इसके उलट दिल्ली से लेकर अहमदाबाद तक भाजपा थोड़ी बेचैन है. उसके चुनाव प्रबंधन का तीसरा हिस्सा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके व पार्टी के प्रचार से जुड़ा हुआ है. दिल्ली और गांधीनगर में खबर फैली है कि इस बार प्रधानमंत्री का प्रचार एकदम अलग होगा. गुजरात के एक सांसद बातचीत के दौरान कुछ पत्रकारों को बताते हैं कि ‘अभी भाजपा के पास एक ब्रह्मास्त्र बचा है. जैसे ही प्रधानमंत्री धुआंधार चुनाव प्रचार करेंगे, पूरा माहौल भाजपा के पक्ष में हो जाएगा. मोदी का भाषण शुरू होते ही आखिरी के 4-5 दिनों में पूरे चुनाव का माहौल बदलेगा. इस बार प्रधानमंत्री मोदी गुजरात के लोगों से सीधे इमोशनल अपील करेंगे और गुजरात की जनता उनकी भावनात्मक अपील जरूर सुनेगी.’