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गुजरात में चुनाव प्रचार करते हुए भारतीय जनता पार्टी का ध्यान विपक्षी पार्टियों पर होने के बजाय मीडिया पर ज्यादा है. ऐसा भाजपा के ऑफिशियल यूट्यूब चैनल से जारी किए गए कुछ वीडियो को देखकर लगता है. हाल ही में नोटबंदी की सालगिरह पर भी एक वीडियो जारी किया गया है जिसका शीर्षक है ‘आपने भी सुना, नोटबंदी फेल है? देखिेए, क्या कहना है मोदी के साथ चल रहे भारत का.’ यह वीडियो एक गांव में टीवी रिपोर्टर के पहुंचने का किस्सा दिखाता है जिसमें रिपोर्टर को गांव वालों से अपनी मनचाही बात कहलवाने की कोशिश करते दिखाया गया है. उसकी इस कोशिश को (मोदी जी के साथ चल रहा) ‘भारत’ नाम का किरदार असफल कर देता है और नोटबंदी के फायदे गिनाकर पत्रकार का मुंह बंद कर देता है. काले धन से बड़ी समस्या है काला मन, कहते हुए यह किरदार मीडिया पर तंज करता है. वीडियो में ध्यान देने वाली बात यह भी है कि भाजपा या भाजपा सरकार की बात न करते हुए यह केवल प्रधानमंत्री मोदी पर केंद्रित रहता है.

यह पहली बार नहीं है कि भाजपा ने मीडिया को निशाने पर लिया है. कुछ हफ्ते पहले जारी एक और वीडियो ‘मैं हूं विकास, मैं हूं गुजरात’ भी मीडिया पर ही निशाना साधता दिखा था. इसमें जाने-पहचाने गुजराती एक्टर जिमित त्रिवेदी गुजरात/विकास नाम के किरदार में दिखाई दिए थे जो एक पत्रकार से बातचीत करते दिखते हैं. यह वीडियो भी मीडिया वालों को कॉकटेल पार्टी न देने और फॉरेन ट्रिप पर न ले जाने से नाराज बताता है. वीडियो में दिखने वाले इन किरदारों की खासियत यह है कि ये बेहद तल्ख, लहजे और जुबान में बात करते है. साथ ही जिस तरह से नमस्ते गुरू या नमस्ते भाईसाब कहते हैं, आपको मोदी जी के मितरों की याद आ जाती है. कई तरह से मोदी प्रभावित इन वीडियोज के बारे में दिलचस्प यह भी है कि गुजरात चुनाव को ध्यान में रखकर बनाये जाने के बावजूद इनमें कहीं भी किसी चुनावी वादे का जिक्र तक नहीं किया गया है.

नासमझ पत्रकारों को समझाइश देते ये वीडियो आलोचना करने वाले मीडिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगाने की कोशिश करते हुए से लगते हैं. हालांकि यह और बात है कि कुछ लोगों को ये बातें सरकार और पीएम की तरफ दिया गया सफाईनामा भी लग सकती हैं. एक सवाल यह भी किया जा सकता है कि कथित ‘दलाल मीडिया’ को निशाना बनाने के बहाने भाजपा, अपनी केंद्र सरकार के फैसलों से पैदा हुए असंतोष से निपटने की कोशिश तो नहीं कर रही है! अगर ऐसा है तो यह बीजेपी के कम होते आत्मविश्वास को भी दिखाता है.

वैसे, इन बातों से हटकर देखें तो जनता का भरोसा दोबारा कायम करने की जरूरत शायद मोदी सरकार और मीडिया दोनों को बराबर-बराबर है. क्योंकि इन दोनों पर ही जनता का भरोसा पूरी तरह से हटा भले न हो, थोड़ा हिल जरूर गया है.

इसके अलावा कश्मीर, सेना के जवान और जन-गण-मन तक की बात करने वाले ये वीडियो देखते हुए आपको बड़ी शिद्दत से यह भी महसूस होता है कि भाजपा को ऐसे वीडियो बनाने से पहले एक अच्छे कॉपी राइटर की सेवाएं लेने की जरूरत है.

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