वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उत्पाद व सेवा कर (जीएसटी) में अभी और बदलाव लाने के संकेत दिए हैं. उन्होंने कहा कि भविष्य में सरकार के राजस्व को देखते हुए दरों में और बदलाव किया जाएगा. अरुण जेटली ने जीएसटी के 28 प्रतिशत वाले स्लैब के 176 आइटमों को 18 प्रतिशत वाले स्लैब में लाने के फ़ैसले को लेकर लगाए गए राजनीतिक आरोपों का भी जवाब दिया. टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़ वित्त मंत्री ने कहा कि 28 प्रतिशत वाले स्लैब के उत्पादों को कम करने की कवायद तीन-चार महीनों से चल रही थी और इसे गुजरात चुनाव से जोड़ना ‘बचकानी राजनीति’ है.

अरुण जेटली ने विपक्षी पार्टियों की एकल दर कर की नीति की बात को भी ख़ारिज किया. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्विटर पर सभी उत्पादों को 18 प्रतिशत की दर के तहत रखने की बात की थी. उनकी पार्टी के कुछ लोग भी यह बात दोहराते रहे हैं. इस पर जेटली ने कहा कि जीएसटी काउंसिल ने ऐसे कर ढांचे का चुनाव किया जिससे खाद्य उत्पादों में छूट मिले. उनके मुताबिक आम आदमी से जुड़े उत्पादों को पांच प्रतिशत वाले स्लैब में रखा गया. वित्त मंत्री ने कहा, ‘गेहूं, चावल या चीनी पर मर्सडीज़ (कार) या तंबाकू जैसा कर नहीं लगाया जा सकता. इसलिए अलग-अलग दरें रखी गईं.’ राहुल गांधी की सभी उत्पादों को एक ही दर के तहत रखने की बात पर जेटली ने कहा, ‘जो लोग एकल-दर वाले जीएसटी की बात कर रहे हैं उन्हें कर संरचना की कोई समझ नहीं है. उन्हें जीएसटी की प्रारंभिक समझ भी नहीं है.’

वित्त मंत्री का यह भी कहना है कि जीएसटी से महंगाई में कमी आई है. उन्होंने कहा, ‘इससे वास्तव में महंगाई घटी है. यह एक प्रभावी टैक्स सिस्टम के फ़ायदों में से एक है.’ कुछ दिन पहले ही जीएसटी काउंसिल ने जीएसटी के तहत सबसे ऊंची दर (28 प्रतिशत) के तहत आने वाले उत्पादों में बड़ी कटौती की है. अब इस स्लैब में केवल 50 वस्तुएं रह गई हैं. वहीं, राज्यों के वित्त मंत्रियों ने कहा है कि इस लिस्ट में और कटौती की जाएगी. उनके मुताबिक आने वाले महीनों में 12 और 18 प्रतिशत वाले स्लैबों में भी परिवर्तन किए जाएंगे.