सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल कॉलेज घूसखोरी मामले में जजों की संलिप्तता के आरोपों की विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने की मांग खारिज कर दिया है. अंग्रेजी अखबार द हिंदू के अनुसार शीर्ष अदालत ने इस मामले से जुड़ी अधिवक्ता कामिनी जायसवाल और एनजीओ कैंपेन फॉर जूडीशियल अकाउंटबिलिटी एंड रिफॉर्म (सीजेएआर) के अधिवक्ताओं के व्यवहार और तौर-तरीके को अदालत की अवमानना करने वाला, अनैतिक, अपमानजनक और अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला बताया है.

मंगलवार को फैसला सुनाते हुए जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा, ‘हमने पाया है कि हम (जज) कानून से ऊपर नहीं हैं. लेकिन सब कुछ तय प्रक्रिया के अनुसार होना चाहिए.’ सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता कामिनी जायसवाल पर अपने मामले की जल्द सुनवाई कराने के लिए तय प्रक्रिया का उल्लंघन करने का आरोप लगाया. अदालत ने कहा, ‘अधिवक्ता कामिनी जायसवाल ने जस्टिस चेलामेश्वर की अदालत को यह नहीं बताया कि ऐसी एक याचिका जस्टिस सीकरी की अदालत में भी लंबित है.’ हालांकि, अदालत ने अवमानना की कार्यवाही शुरू करने से इनकार कर दिया. अदालत ने कहा, ‘हम सब एकजुट हों और इस महान संस्था के लिए काम करें.’

यह पूरा मामला एक मेडिकल कॉलेज को मान्यता दिलाने के लिए अदालत से फैसले को प्रभावित करने के एवज में उच्च न्यायपालिका के सेवानिवृत्त जजों को रिश्वत देने के आरोपों से जुड़ा है. अभी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) इसकी जांच कर रहा है. इसकी एसआईटी जांच करने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सोमवार को शीर्ष अदालत ने कहा था कि आज पूरा देश सुप्रीम कोर्ट की विश्वसनीयता पर संदेह कर रहा है. जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा था, ‘अगर ऐसे आरोपों पर विचार किया जाने लगा तो एक जज नहीं बच पाएगा.’

सुप्रीम कोर्ट में यह विवाद नौ नवंबर को तब सामने आया, जब जस्टिस चेलामेश्वर की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय बेंच ने अधिवक्ता कामिनी जायसवाल की याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया. इसके बाद बेंच ने इस याचिका को संवैधानिक बेंच के सुपुर्द कर दिया. हालांकि, चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली संवैधानिक बैंच ने अप्रत्याशित सुनवाई करते हुए जस्टिस चेलामेश्वर के आदेश को पटल दिया. इसके साथ अदालत ने यह भी कहा कि केवल चीफ जस्टिस ही बेंच गठित कर सकते हैं और अन्य किसी जज को यह अधिकार नहीं है. इसके बाद 11 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सभी गैर-सूचीबद्ध मामलों को चीफ जस्टिस की अदालत में उठाने का आदेश जारी कर दिया.