सिद्धारमैया सरकार ने काफी आगे-पीछे होने के बाद मंगलवार को आखिरकार अंधविश्वास विरोधी नया विधेयक विधानसभा में पेश कर दिया. डेक्कन हेराल्ड के मुताबिक कर्नाटक के कानून मंत्री टीबी जयचंद्र ने नए विधेयक को विधानसभा में पेश किया. इसमें झाड़-फूंक, काला जादू, टोना-टोटका, खुद को चोट पहुंचाने वाले कर्मकांड, कांटों के बिस्तर पर बच्चों को ऊंचाई से फेंकना, महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाना और अलौकिक शक्तियों का नाम पर यौन शोषण जैसे अंधविश्वासों और कुरीतियों पर रोक लगाई गई है.

नए विधेयक का नाम कर्नाटक अमानवीय प्रथा और काला जादू निषेध और उम्मूलन विधेयक-2017 है. इसे 2013 में पेश कर्नाटक अंधविश्वास रोकथाम विधेयक की तुलना में काफी कमजोर बताया जा रहा है, क्योंकि इसमें संख्या विज्ञान और ज्योतिष को शामिल नहीं किया गया है.

रिपोर्ट के मुताबिक सिद्धारमैया सरकार द्वारा 2013 में पेश किया गया अंधविश्वास विरोधी विधेयक काफी सख्त था. इसकी वजह से उसे धार्मिक संस्थाओं के साथ-साथ समाज के कई हिस्सों से विरोध झेलना पड़ा था. इसके बाद उसे विधानसभा की समीक्षा समिति के हवाले कर दिया गया था. हालांकि, सरकार ने विवाद से बचने के लिए नए विधेयक में इन बातों का ख्याल रखा है. इससे अंक विज्ञान और ज्योतिष शास्त्र के साथ-साथ वास्तु शास्त्र को भी बाहर कर दिया गया है. इसके अलावा ‘अघोरी’ और ‘नरबलि’ जैसे शब्दों को भी इस विधेयक से हटा दिया गया है, क्योंकि कर्नाटक में यह प्रचलित नहीं है.